ब्रिटेन और यूरोपीय संघ (ईयू) ने पिछले सप्ताह ऐतिहासिक ब्रेक्सिट सौदा किया, जिससे भारत के निवेशकों समेत वैश्विक बाजारों में खुशी की लहर दौड़ गई है। हालांकि बाजार के ज्यादातर विशेषज्ञों का उन कंपनियों के लिए संभावनाओं के बारे में सकारात्मक रुख है, जो इस क्षेत्र के साथ कारोबार करती हैं। मगर वे आगाह करते हैं कि यह लाभ केवल लंबी अवधि में ही नजर आएगा। ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के बीच मार्च से कड़ी सौदेबाजी चल रही है ताकि उनका वस्तु व्यापार 1 जनवरी, 2021 के बाद जारी रहे। गुरुवार को घोषित सौदे का मतलब है कि यह वस्तु व्यापार शुल्क और कोटे से मुक्त रहेगा। इस वस्तु व्यापार का यूरोपीय संघ-ब्रिटेन के वाणिज्य 900 अरब डॉलर में करीब आधा हिस्सा है।
विश्लेषकों का मानना है कि ब्रेक्सिट पर पहली बार मत 2016 में पड़े थे, इसलिए कंपनियों के पास दुनिया भर में अपने परिचालन को फैलाने का पर्याप्त समय था ताकि ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के बीच चल रही रस्साकशी के असर से बचा जा सके। भारत में वाहन, दवा, सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) और रसायन उन क्षेत्रों में शामिल हैं, जिनकी ब्रिटेन और यूरोपीय संघ पर काफी ज्यादा निर्भरता है। इन क्षेत्रों की कंपनियों में प्रमुख नाम टाटा मोटर्स, मदरसन सूमी, टाटा स्टील, टीसीएस, विप्रो, इनन्फोसिस और टेक महिंद्रा आदि शामिल हैं।
मोतीलाल ओसवाल फाइनैंशियल सर्विसेज के उपाध्यक्ष और प्रमुख (खुदरा अनुसंधान) सिद्धार्थ खेमका ने कहा, ‘हम समझते हैं कि यह पहले की झटके के साथ निकासी के बजाय धीरे-धीरे निकासी होगी। यह उन कंपनियों केलिए सकारात्मक है, जिनका ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के साथ कारोबार है क्योंकि उन्हें वस्तुओं के मुक्त व्यापार (शून्य शुल्क) के लाभ मिलते रहेंगे।’ उन्होंने कहा, ‘इस सौदे के बहुत से पहलू हैं, इसलिए हम अपने आमदनी अनुमानों में किसी संशोधन से पहले बारीक जानकारियों और कंपनियों की तरफ से आने वाले अपडेट का इंतजार कर रहे हैं।’ इस घटनाक्रम के बाद टाटा मोटर्स के शेयर सोमवार को करीब छह फीसदी चढ़ गए। वहीं मदरसन सूमी के शेयर 4.5 फीसदी और टाटा स्टील के 1.7 फीसदी चढ़े, जबकि बीएसई सेंसेक्स में 0.8 फीसदी बढ़त रही।
गोदरेज फाइनैंशियल सर्विसेज के प्रमुख (निवेश रणनीति) गौरांग शाह ने कहा, ‘ब्रेक्सिट सौदे का टाटा मोटर्स को फायदा मिलेगा क्योंकि इसका जगुआर लैंड रोवर (जेएलआर) के लिहाज से उस क्षेत्र में बड़ा कारोबार है।’ ताजा अनुमानों के मुताबिक टाटा मोटर्स के राजस्व में करीब 16 फीसदी हिस्सा ब्रिटेन से आता है, जबकि यूरोपीय संघ का 20 फीसदी हिस्सा है। लेकिन कंपनियों के लिए संभावनाओं पर ब्रेक्सिट से ज्यादा जीडीपी वृद्धि और अन्य घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय कारकों का असर पड़ेगा। यही वजह है कि इक्विनोमिक्स रिसर्च के संस्थापक और मुख्य निवेश अधिकारी जी चोक्कालिंगम का टाटा मोटर्स समेत वाहन क्षेत्र को लेकर नकारात्मक आउटलुक है।