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चैनल पार्टनर के राजस्व पर मंदी के बादल

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Last Updated- December 10, 2022 | 9:12 PM IST

भारत में विभिन्न छोटे और मझोले उद्यमों से जुड़े चैनल पार्टनर मौजूदा आर्थिक संकट के कारण अपने राजस्व में बढ़ोतरी को लेकर सतर्क हो गए हैं।
इन चैनल पार्टनरों में एसएमई (लघु एवं मझोले उद्यम या फिर 999 तक कर्मचारियों वाली कंपनियां) और बड़े उद्यम (या 1000 कर्मचारियों से अधिक वाली कंपनियां) शामिल हैं।
न्यूयार्क स्थित एक्सेस मार्केट्स इंटरनेशनल (एएमआई) पार्टनर्स के मुताबिक एसएमई से जुड़े चैनल भागीदारों को 2009 में राजस्व में 12-13 फीसदी की बढ़ोतरी की उम्मीद है। वहीं बड़े उद्योगों से जुड़े चैनल भागीदारों को इस साल राजस्व में 17 फीसदी का इजाफा होने की उम्मीद है।
एएमआई-पार्टनर्स वैश्विक एसएमई पर मजबूती से ध्यान केंद्रित कर सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी), इंटरनेट, संचार कार्य योग्य बाजार सूचना के क्षेत्र में अहम स्थान बनाए हुए है। एएमआई-पार्टनर्स के शोध विश्लेषक अलंकार जोशी कहते हैं कि भारत में चैनल पार्टनर न सिर्फ पारंपरिक बॉक्स पुशर हैं बल्कि वे अत्याधुनिक उपभोक्ताओं को समग्र समाधान मुहैया कराने पर भी ध्यान केंद्रित करते हैं।
जोशी ने कहा, ‘चैनल भागीदारों के राजस्व विकास में आईटी सेवाओं का अहम योगदान है। महज हार्डवेयर की बिक्री करना अपेक्षाकृत कम मुनाफे वाला व्यवसाय बन गया है, क्योंकि बड़े डिस्काउंट ने मार्जिन पर दबाव बढ़ा दिया है।’
हार्डवेयर उत्पादों की बिक्री से मार्जिन इस साल घट कर 20 फीसदी रह गया है जो पिछले साल 29 फीसदी था। दूसरी तरफ आईटी सेवाओं पर मार्जिन 12 फीसदी से बढ़ कर 14 फीसदी हो गया है। एएमआई के शोध में कहा गया है कि एसएमई चैनल पार्टनर भी अपने विकास की रफ्तार को बरकरार रखने के लिए आकर्षक बिजनेस मॉडल के चयन के तौर पर आईटी सेवाओं और सॉल्युशन पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
जोशी ने कहा, ‘चैनल भागीदारों को कड़ी प्रतिस्पर्धा और आईटी विक्रेताओं के मार्जिन दबाव की वजह से व्यापक दबाव का सामना करना पड़ रहा है। ज्यादातर चैनल भागीदार ऋण उपलब्धता को लेकर चिंतित हैं। लगभग 50 फीसदी चैनल भागीदारों का मानना है कि अपर्याप्त नकदी प्रवाह उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती है।’
मौजूदा आर्थिक मंदी ने कंपनियों को अपने आईटी खर्च में कमी लाने और आईटी परियोजनाओं के समय की समीक्षा करने को बाध्य कर दिया है। खरीद के लिए वित्तीय मदद में भी कमी आई है। इसलिए हार्डवेयर बाजार के बुरी तरह प्रभावित होने की आशंका है और चैनल भागीदार अपने उत्पादों के लिए नए क्षेत्रों की तलाश कर रहे हैं।
चैनल भागीदारों के राजस्व में बड़ी भागीदारी रखने वाले दो प्रमुख क्षेत्र हैं निर्माण और शिक्षा। इन क्षेत्रों ने पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है। इनके अलावा फाइनैंस, बीमा और रियल एस्टेट (एफआईआरई) और रिटेल जैसे क्षेत्रों ने भी चैनल भागीदारों के राजस्व में अहम भूमिका निभाई है। राजस्व बढ़ाने के लिए जिन नए क्षेत्रों पर चैनल भागीदारों की नजर लगी है, उनमें मीडिया एवं प्रसारण, कानूनी कंपनियां और मनोरंजन क्षेत्र शामिल हैं।
मौजूदा समय में सदस्यता-आधारित मॉडल का चलन बढ़ रहा है। बड़ी तादाद में बड़े उद्यम-आधारित चैनल भागीदार सॉफ्टवेयर एज ए सर्विस (एसएएएस) तर्ज पर सौदे कर रहे हैं। कई बड़े उद्यम और अब छोटे एवं मझोले उद्यम भी परिचालन में आने वाली समस्याओं से बचने और लागत लाभ हासिल करने के लिए सदस्यता-आधारित मॉडल को अपना रहे हैं।
हालांकि बड़ी संख्या में चैनल भागीदार अभी भी डेस्कटॉप और पोटर्ेबल, प्रिंटर और पेरिफेरल, सर्वर और सुरक्षा सॉल्युशन जैसे कम्प्यूटिंग उत्पादों की पुन: बिक्री करते हैं। लेकिन अब वे महसूस कर रहे हैं कि मौजूदा आर्थिक मंदी के कारण इन उत्पादों से भी आगे बढ़ने की जरूरत है।

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First Published - March 23, 2009 | 10:22 PM IST

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