सॉफ्टवेयर दिग्गज सत्यम कंप्यूटर सर्विसेज ने मायटास की दो कंपनियों के साथ अपने सौदे को रद्द करने का ऐलान तो कर दिया, लेकिन उसके ग्राहकों के बीच उसकी साख में शायद कुछ कमी आ गई है।
सत्यम के चेयरमैन बी रामलिंग राजू की नीयत पर कंपनी के तमाम ग्राहक सवाल खड़ा कर रहे हैं और कंपनी के साथ हुए सौदों पर भी फिर विचार करने की बात उनके बीच से सुनाई दे रही है।सत्यम को फिलहाल लगभग 960 करोड़ रुपये के सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) ठेकों के नवीनीकरण का इंतजार है।
उनमें से कुछ बड़े ग्राहक यूनिलीवर, नेस्ले, डुपाँट, सिस्को सिस्टम्स, जीई, सोनी और ऐप्लाइड मैटीरियल्स हैं। लेकिन माना जा रहा है कि सत्यम के मायटास कांड की वजह से इन कंपनियों के साथ उसके रिश्तों में दरार पड़ सकती है।
एक सूत्र ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘ऐसा नहीं है कि सिर्फ निवेशक ही सत्यम के इन्फ्रास्ट्रक्चर और रियल एस्टेट कारोबार में कदम रखने को सही नहीं मान रहे हैं बल्कि, कंपनी के क्लाइंट्स को भी इसमें आपत्ति है। अब ये क्लाइंट्स सवाल उठा रहे हैं कि कंपनी ने आईटी और बीपीओ क्षेत्र में अपने ग्राहकों की जरूरतों को पूरा करने के लिए आखिर क्या योजनाएं बनाई हैं।
भले ही सत्यम ने दोनों कंपनियों का अधिग्रहण करने के फैसले को वापस ले लिया है पर इस कदम के बाद से ही लगातार कंपनी के प्रबंधन पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।’
इधर कुछ सत्यम के कुछ ग्राहकों अब कंपनी को सेवाएं देने से पीछे हटने पर भी गंभीरता से विचार कर रहे हैं और अगर ऐसा होता है तो कंपनी को अपने प्रतिद्वंद्वियों टीसीएस, इंफोसिस और विप्रो के सामने काफी नुकसान हो सकता है।
एक प्रमुख विश्लेषक ने नाम नहीं बताने की शर्त पर कहा, ‘इस कदम ने पूरे आईटी उद्योग की एक नकारात्मक छवि पेश की है।’
इंडप्लेक्स कंसल्टिंग के सह संस्थापक और आउटसोर्सिंग सलाहकार सेवा के विशेषज्ञ सव्यसाची सतपथी ने कहा कि अगर कोई आईटी कंपनी अपने मुख्य कारोबार से अलग कुछ करने का विचार करती है तो तय है कि इससे ग्राहकों के पास गलत संदेश तो जाएगा ही।
वेंडरों के लिए आईटी ठेके आउटसोर्स करने के पहले विदेशी ग्राहकों विक्रेताओं की विश्वसनीयता को ही परखते हैं। उन्होंने कहा कि कोई भी ग्राहक किसी कंपनी के साथ जुड़ने के पहले इस बात को लेकर आश्वस्त हो जाना चाहता है कि वह कंपनी लंबे समय तक अपना कारोबार चलाना चाहती हो।