रुपये में राजस्व अर्जित करने वाली लेकिन विदेशी कर्ज पर ज्यादा आश्रित रहने वाली भारतीय कंपनियां रुपये में गिरावट से अपेक्षाकृत सुरक्षित हैं और इस साल अब तक रुपये में आई 3 फीसदी की गिरावट उनके लिए अस्थायी क्रेडिट नेगेटिव होगा। रेटिंग एजेंसी मूडीज ने गुरुवार को ये बातें कही।
मूडीज ने कहा, ज्यादातर कंपनियों के पास मुद्रा में होने वाले उतारचढ़ाव के असर को सीमित करने का सुरक्षात्मक उपाय है। इनमें नैचुरल हेजिंग, कुछ अमेरिकी डॉलर में राजस्व और वित्तीय हेजिंग या इन सभी चीजों का समन्वय शामिल है ताकि गंभीर रूप से गिरावट वाले परिदृश्य में नकदी प्रवाह और लिवरेज पर प्रतिकूल असर सीमित रखने में मदद मिले।
इसलिए रेटिंग का मौजूदा स्तर संरक्षित रह सकता है जबकि डॉलर के मुकाबले रुपये में और 15 फीसदी की गिरावट आ जाए। साल 2018 से रुपया 14.4 फीसदी कमजोर हो चुका है। 1 जनवरी, 2018 को यह डॉलर के मुकाबले 63.68 पर था, वहीं बुधवार को यह 74.36 पर बंद हुआ। इस साल अब तक रुपया 3 फीसदी कमजोर हुआ है। गुरुवार को रुपया मजबूत हुआ क्योंकि सूचकांकों में बढ़ोतरी हुई। मूडीज के मुताबिक, अगले 18 महीने में अमेरिकी डॉलर वाले कर्ज से जुड़ा पुनर्वित्त जोखिम का प्रबंधन हो सकता है क्योंकि ज्यादातर कंपनियां बाजार में मशहूर हैं।
रेटिंग वाली 22 भारतीय कंपनियों के विश्लेषण में मूडीज ने पाया कि करीब आधी कंपनियों को नैचुरल हेजिंग से फायदा हुआ है, जिसका मतलब यह हुआ कि कंपनियां अमेरिकी डॉलर में राजस्व अर्जित कर रही हैं या अमेरिकी डॉलर में उनका कॉन्ट्रैक्ट प्राइस है, जो उन्हें स्थानीय कमाई में विनिमय दर से होने वाले उतारचढ़ाव से संरक्षित करता है। इस समूह में नौ कंपनियां आईटी सेवा व जिंस क्षेत्र की हैं। उदाहरण के लिए आईटी सेवा से संबंधित कंपीनियों में जेनपेक्ट (बीएए3 स्थिर) और मार्बल-2 पीटीई (बीए2 स्थिर) अपना ज्यादातर राजस्व अमेरिकी डॉलर में अर्जित करती हैं, वहीं उनकी लागत का आधार मोटे तौर पर रुपये में है।