बरगंडी प्राइवेट हुरुन इंडिया 500 की ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले पांच साल में भारती एयरटेल की वैल्यू में 7.64 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई। इस कारण वह सबसे ज्यादा संपत्ति बनाने वाली कंपनी बन गई। दूसरी ओर टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, इन्फोसिस और विप्रो की कुल वैल्यू में 8.5 लाख करोड़ रुपये की कमी आई, जिससे सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र वैल्यू के मामले में सबसे ज्यादा नुकसान वाला बन गया।
रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत की 500 सबसे मूल्यवान गैर-सरकारी कंपनियों की कुल वैल्यू 3.4 लाख करोड़ डॉलर थी। ये कंपनियां संयुक्त रूप से 89 लाख लोगों को रोजगार देती हैं। टैक्स के तौर पर 3.23 लाख करोड़ का योगदान करती हैं और कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) पहलों पर 13,433 करोड़ रुपये खर्च करती हैं।
यह ऐक्सिस बैंक प्राइवेट बैंकिंग बिजनेस, बरगंडी प्राइवेट और हुरुन इंडिया की पांचवीं रिपोर्ट है। हुरुन इंडिया के संस्थापक और मुख्य शोधकर्ता अनस रहमान जुनैद ने कहा, ‘2025 बरगंडी प्राइवेट हुरुन इंडिया 500 में शामिल कंपनियां भारत के निजी क्षेत्र की रीढ़ हैं और इनका काफी आर्थिक दबदबा है।
इन सभी कंपनियों का कुल मूल्यांकन 3.4 लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर है, जो कनाडा की जीडीपी और इंडोनेशिया व स्पेन , दोनों की संयुक्त जीडीपी से भी ज्यादा है।’ रिलायंस इंडस्ट्रीज ने 19.36 लाख करोड़ रुपये के मूल्यांकन के साथ लगातार पांचवें साल भारत की सबसे मूल्यवान कंपनी का अपना दर्जा बनाए रखा। इसके बाद 11.88 लाख करोड़ रुपये के साथ एचडीएफसी बैंक और 11.50 लाख करोड़ रुपये के साथ भारती एयरटेल का स्थान रहा।
पिछले एक साल में कम से कम 12 कंपनियों के मूल्यांकन दोगुने से अधिक हो गए हैं। इनमें सबसे आगे स्टॉक ब्रोकिंग प्लेटफॉर्म ग्रो रहा, जिसने 430 प्रतिशत की छलांग लगाई। इसके बाद अदाणी प्रॉपर्टीज (301 प्रतिशत), एथर एनर्जी (224 प्रतिशत), एंथम बायोसाइंसेज (185 प्रतिशत), मीशो (164 प्रतिशत), हल्दीराम स्नैक्स (136 प्रतिशत), मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज ऑफ इंडिया (117 प्रतिशत), लेंसकार्ट (111 प्रतिशत), पहारपुर कूलिंग टावर्स (111 प्रतिशत), अदाणी पावर (107 प्रतिशत), आरबीएल बैंक (100 प्रतिशत) और नवीन फ्लोरीन इंटरनैशनल (100 प्रतिशत) रहीं।
यह वृद्धि वित्तीय सेवाओं, रियल एस्टेट, इलेक्ट्रिक वाहन, फार्मास्युटिकल्स, उपभोक्ता वस्तु और विनिर्माण जैसे सेक्टरों में फैली हुई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस साल 95 कंपनियों ने रैंकिंग में प्रवेश किया है, जो इस सूची के शुरू होने के बाद से सबसे अधिक है।
रैंकिंग में सबसे बड़ी सेक्टर वित्तीय सेवा क्षेत्र रहा। इसमें 83 कंपनियों का संयुक्त मूल्यांकन 69.62 लाख करोड़ रुपये रहा। इसके बाद स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र का स्थान रहा, जिसमें 61 कंपनियों का मूल्यांकन 32.45 लाख करोड़ रुपये रहा। वित्तीय सेवाएं और स्वास्थ्य सेवा 2025 की रैंकिंग में सबसे बड़े योगदानकर्ता रहे।