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आर्सेलरमित्तल को मिली राहत

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Last Updated- December 14, 2022 | 8:31 PM IST

नैशनल कंपनी लॉ अपील ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी) ने उस आदेश पर रोक लगा दी है जिसमें आर्सेलरमित्तल को ओडिशा स्लरी पाइपलाइन इन्फ्रास्ट्रक्चर की परिसंपत्तियों के इस्तेमाल के लिए कॉरपोरेट दिवालिया समाधान लागत के तौर पर 1,300 करोड़ रुपये उस कंपनी को चुकाने का आदेश दिया गया था। शुक्रवार को पारित आदेश में अपील ट्रिब्यूनल ने कहा कि अगली सुनवाई तक उस आदेश पर रोक रहेगी, जिसमें आर्सेलरमित्तल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को 15 दिसंबर, 2020 तक ओडिशा स्लरी पाइपलाइन को 1,300 करोड़ रुपये चुकाने का आदेश दिया गया है। इस मामले की अगली सुनवाई 22 जनवरी को होगी।
 
एनसीएलटी के अहमदाबाद पीठ ने वित्तीय लेनदार श्रेय इन्फ्रास्ट्रक्चर फाइनैंस के आवेदन के आधार पर 10 नवंबर को 322 पृष्ठ का आदेश जारी किया था। पीठ ने एस्सार स्टील के परिचालन में स्लरी पाइपलाइन के इस्तेमाल की लागत को दिवालिया समाधान लागत माना था।  यह भुगतान 15 दिसंबर तक होना था, जिसमें नाकाम होने पर एनसीएलटी एस्सार स्टील के खिलाफ परिसमापन आदेश जारी कर सकता था। आर्सेलरमित्तल ने इस आदेश के खिलाफ एनसीएलएटी में अपील की।
 
आर्सेलरमित्तल का प्रतिनिधित्व कर रहे हर्ष साल्वे ने तर्क दिया कि अपीलकर्ता आर्सेलरमित्तल इंडिया को दिवालिया समाधान लागत के तौर पर उस इकाई को भुगतन करने का आदेश दिया गया है, जिसने एस्सार स्टील के दिवालिया समाधान के समय और उसके बाद भी इसका दावा नहीं किया था। इस आदेश पर टिप्पणी करते हुए श्रेय के प्रवक्ता ने कहा, किसी फैसले के खिलाफ हर किसी को अपील का अधिकार होता है। हालांकि ऊपरी अदालत में भी अंतिम फैसला मामले के गुण के आधार पर होता है। हमें भरोसा है कि कार्यवाही के दौरान एनसीएलएटी प्रासंगिक तथ्यों पर ध्यान देगा। निप्पॉन स्टील कॉरपोरेशन के साथ मिलकर आर्सेलरमित्तल की तरफ से एस्सार स्टील के अधिग्रहण के करीब 11 महीने बाद 1,300 करोड़ रुपये अतिरिक्त लागत के तौर पर दिए जाने का आदेश एनसीएलटी ने दिया है। यह सौदा 42,000 करोड़ रुपये में हुआ और एस्सार स्टील का नाम एएमएनएस इंडिया रखा गया।
 
ओडिशा स्लरी पाइपलाइन 253 किलोमीटर लंबी स्लरी पाइपलाइन का परिचालन करती है, जो एएमएनएस इंडिया के लिए अहम है। यह एएमएनएस इंडिया के डाबुना स्थित आयरन ओर बेनिफिकेशन प्लांट को पारादीप स्थित 1.2 करोड़ टन वाले पैलेट प्लांट से जोड़ती है। इसका पट्टा एस्सार को दिया गया था। हालांकि ओडिशा स्लरी एनसीएलटी पहुंची और आर्सेलरमित्तल ने 2,359 करोड़ रुपये की समाधान योजना सौंपी, जिसे इस साल एनसीएलटी के कटक पीठ ने मंजूरी दी थी। श्रेय ने इसे एनसीएलएटी में चुनौती दी और फैसला अभी लंबित है। श्रेय मल्टीपल ऐसेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट के ग्रोथ ऑपरच्युनिटीज फंड के पास ओडिशा स्लरी पाइपलाइन की 69 फीसदी हिस्सेदारी है, वहीं बाकी एस्सार स्टील के पास है।
 
श्रेय के मुताबिक, अगर भुगतान समयबद्ध तरीके से किया गया  होता तो ओडिशा स्लरी पाइपलाइन अपने लेनदारों को कर्ज का ब्याज व किस्त देती रहती और इसे दिवालिया अदालत ले जाने की दरकार ही नहीं होती और ओडिशा स्लरी पाइपलाइन के लेनदारोंं व शेयरधारकों को नुकसान नहींं उठाना पड़ता। प्रवक्ता ने कहा, एनसीएलटी के फैसले में इस वास्तविकता को उचित व संतुलित तरीके से देखा गया है।

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First Published - December 6, 2020 | 8:52 PM IST

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