विश्लेषकों को रिलायंस में सुधार की उम्मीद

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 12, 2022 | 6:56 AM IST

पिछले छह महीने में एक्सचेंजों पर कमजोर प्रदर्शन के बावजूद विश्लेषक रिलायंस इंडस्ट्रीज पर आशावादी होने लगे हैं। उदाहरण के लिए जेफरीज के विश्लेषकों ने कहा कि भारत में उपभोग में होने वाली बढ़ोतरी में कंपनी की भूमिका अहम होगी।
जेफरीज के नोट के मुताबिक, इस शेयर के लिए मुख्य उत्प्रेरकों में खुदरा में उम्मीद से ज्यादा तेज गति से बाजार हिस्सेदारी में इजाफा, तेल से लेकर केमिकल की हिस्सेदारी बिक्री, सकल रिफाइनिंग मार्जिन में सुधार, जियो की संभावित सूचीबद्धता और बैंंकिंग लाइसेंस की संभावना शामिल है। विश्लेषकों का मानना है कि रिलायंस जियो की टैरिफ में होने वाली बढ़ोतरी भी उसके प्रदर्शन में योगदान करेगा।
विश्लेषकों ने कहा, बैलेंस शीट में कर्ज का हिस्सा पर्याप्त रूप से कम होने के कारण तेल से लेकर केमिकल कारोबार की रणनीतिक हिस्सेदारी बिक्री से मिलने वाली रकम से कंपनी के लिए काफी नकदी सृजित होगी।
जेफरीज के नोट में कहा गया है, ऊर्जा कारोबार के लाभ में सुधार और जियो के पूंजीगत खर्च में नरमी से वित्त वर्ष 22 के बाद उसके पास मुक्त नकदी प्रवाह देखने को मिलेगा। हमारा अनुमान है कि वित्त वर्ष 22 से उसके पास 6 अरब डॉलर सालाना से ज्यादा मुक्त नकदी प्रवाह होगा।
ब्लूमबर्ग के पास 36 विश्लेषकों में से 24 ने इस शेयर को खरीदने की सलाह दी है। ठीक-ठाक स्थिति में इस शेयर की सर्वोच्च लक्षित कीमत 2,900 रुपये होगी, जो मौजूदा स्तर से 38 फीसदी ज्यादा है। इस बीच, 7 विश्लेषकों ने इसमें निवेशित रहने की सलाह दी है जबकि 5 विश्लेषकों ने इसे बेचने की सिफारिश की है।
एक्सचेंजों पर हालांकि इस शेयर का प्रदर्शन कमजोर रहा है और अक्टूबर 2020 के बाद से यह करीब 6 फीसदी टूटा है जबकि इस अवधि में एसऐंडपी बीएसई तेल व गैस इंडेक्स में 28 फीसदी और एसऐंडपी बीएसई सेंसेक्स में 32 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज हुई है।

दूरसंचार व गैस वर्टिकल
विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में रिलायंस जियो 25 फीसदी एबिटा सीएजीआर व राजस्व बाजार हिस्सेदारी में वित्त वर्ष 23 तक 450 आधार अंकों के इजाफे के साथ अपनी अग्रणी स्थिति को एकीकृत कर सकती है और इस तरह से उसकी राजस्व बाजार हिस्सेदारी 42 फीसदी पर पहुंच जाएगी। संगठित रिटेल कुल रिटेल का महज 12 फीसदी है और रिलायंस रिटेल 10 रिटेलरों से भी बड़ी है और बढ़त के लिहाज से यह अग्रणी स्थिति में है। विश्लेषकों ने कहा कि एकीकृत एबिटा में उसका योगदान वित्त वर्ष 20 के 37 फीसदी के मुकाबले वित्त वर्ष 23 (अनुमान) में 49 फीसदी पर पहुंच जाएगा।
गैस के उपभोग में होने वाली संभावित बढ़ोतरी भी कंपनी के लिए सकारात्मक है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का गैस उत्पादन पिछले दो महीने में छह फीसदी बढ़कर 82.3 एमएमएससीएमडी (जनवरी 2021) पर पहुंच गया है क्योंंकि पूर्वी तट वाले गैस क्षेत्र से उत्पादन 4.4 एमएमएससीएमडी बढ़ा है। विश्लेषकों ने कहा कि यह मोटे तौर पर आरआईएल-बीपी गैस क्षेत्र से उत्पादन में बढ़ोतरी के कारण हुआ है।
दूसरी ओर, ओएनजीसी का उत्पादन इस अवधि में 1 फीसदी घटकर 6.2 एमएमएससीएमडी रह गया है। ऑयल इंडिया-प्राइवेट कंपनियों का उत्पादन सालाना आधार पर इस दौरान मामूली बढ़ा है। सीएलएसए के विश्लेषकों ने कहा कि उत्पादन में बढ़ोतरी के इन शुरुआती संकेतों से निवेशकों को भारत के गैस उत्पादन में सुधार की कहानी पर भरोसा करने में मदद करेगा।
जेपी मॉर्गन के विश्लेषकों ने कहा कि इस शेयर के लिए पर्याप्त उत्प्रेरक मौजूद हैं। अरामको को हिस्सेदारी बिक्री सकारात्मक होगी और उनका कहना है कि तेल से लेकर केमिकल की हिस्सेदारी एकीकृत एंटरप्राइज वैल्यू में करीब 37 फीसदी है। साथ ही जियो प्लेटफॉर्म व रिटेल इस शेयर को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाना जारी रखेगी। हालांकि ब्रोकरेज ने इस शेयर पर अभी अपना तटस्थ रुख बरकरार रखा है।

First Published : March 17, 2021 | 11:38 PM IST