यूरोप की विमान बनाने वाली कंपनी एयरबस की योजना एक सहायक कंपनी के जरिये जल्दी से भारत के विमानन उद्योग में उतरने की है।
उम्मीद है कि यह नई कंपनी इस साल के अंत से नई कंपनी के जरिये उसकी डिजाइन और उत्पादन तकनीक की आउटसोर्सिंग के साथ अपना परिचालन कार्य शुरू कर देगी। एयरबस भारतीय सरकार के साथ भारतीय वायु सेना के लिए पहले ही चेतावनी देने वाली प्रणाली की नई किस्म विकसित करने के लिए भी बातचीत कर रही है।
छह महीने में नई कंपनी
सीआईआई के सालाना सूचना, संचार और तकनीक (आईसीटी) सम्मेलन ‘कनेक्ट 2008’ के दौरान एयरबस की होल्डिंग कंपनी ईएडीएस डिफेंस ऐंड सिक्योरिटी के उपाध्यक्ष (डीफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स) मार्टिन क्रॉस ने बिजसनेस स्टैंडर्ड के साथ बातचीत में कहा कि नई सहायक कंपनी 2008 के अंत या 2009 की शुरुआत तक बना ली जाएगी।
एयरबस कुछ भारतीय कंपनियों के साथ साझेदारी के लिए बातचीत भी कर रही है, लेकिन उन्होंने इन कंपनियों के नामों का खुलासा करने से इनकार कर दिया।
हर दिशा में भरेगी उड़ान
यह नई कंपनी न सिर्फ भारतीय सरकार की सभी रक्षा परियोजनाओं में बोली लगाएगी, बल्कि यह एयरफ्रेम, विमान की सब-असेंबली, सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग और परीक्षण जैसे ढांचागत डिजाइन की परियोजनाओं में भी शामिल होगी।
साथ ही एयरबस भविष्य में इस नई कंपनी की मदद से भारत को डिजाइन और विमानों से जुड़े उपकरणों के उत्पादन की भी आउटसोर्सिंग करने पर विचार कर रही है। इन उपकरणों में विमान में इस्तेमाल के लिए इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम, संचार और नेविगेशन के लिए कृत्रिम सैटेलाइट और अंतरिक्ष यान, और बहुत से सिस्टमों का डिस्प्ले और प्रबंधन शामिल है।
बनेंगे लड़ाकू विमान भी
एयरबस भारतीय वायु सेना के लिए 126 मध्यम क्षमता वाले बहुउपयोगी लड़ाकू विमान उपलब्ध कराने वाले भारतीय रक्षा उपकरण खरीद कार्यक्रम से जुड़ने को बेकरार मुख्य कंपनियों की दौड़ में शामिल है।
इस करार की शर्तों में बताया गया है कि बोली की विजेता को उसके विनिर्माण संयंत्र में से अपने विमानों की पहली खेप भारतीय जमीन पर उतारने की अनुपति दी जाएगी, लेकिन अंत में विजेता को अपना विनिर्माण संयत्र भारत में लाना होगा।
क्रॉस का कहना है कि कंपनी ने मुकाबले, डॉलर की कीमत में बदलाव की समस्याओं और तेल की ऊंची कीमतों के कारण लागत में कटौती के लिए कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। इन उपायों में से एक भारत को आउटसोर्सिंग भी है। उदाहरण के लिए भारत में डिजाइन और उत्पादन गतिविधियों की आउटसोर्सिंग से कंपनी कुल उत्पादन लागत के 40 से 50 प्रतिशत हिस्से की बचत करती है।
उन्होंने अपनी बात को यह कह कर समाप्त कर दिया कि भारत को विमान उपकरणों, डिजाइनर और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में अपनी कुशलताओं को बेहतर करने की जरूरत है। क्रॉस ने यह भी कहा कि वह चेन्नई में प्रस्तावित एयरोस्पेस पार्क में बतौर सलाहकार हिस्सा लेने के इच्छुक हैं और वे यूरोप और भारतीय कंपनियों के बीच और विश्वविद्यालयों के साथ कड़ी की भूमिका निभा सकते हैं।