राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) के इलाहाबाद पीठ ने वेदांत लिमिटेड की आपत्तियों को खारिज करते हुए जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (जेएएल) के लिए अदाणी एंटरप्राइजेज की 15,000 करोड़ रुपये से अधिक की समाधान योजना को मंजूरी दे दी है। न्यायाधिकरण ने फैसला सुनाते हुए कहा कि योजना को मंजूरी दे दी गई है। आदेश की विस्तृत प्रति की प्रतीक्षा है।
इस मंजूरी के साथ समाधान योजना बाध्यकारी रूप से प्रभावी हो जाती है। इस तरह अदाणी एंटरप्राइजेज के लिए कर्ज में डूबी कंपनी का नियंत्रण अपने हाथ में लेने का रास्ता साफ हो गया। लेनदारों को भुगतान निगरानी समिति द्वारा तय किए गए कार्यक्रम के अनुसार किया जाएगा, जो दिवालिया समाधान से क्रियान्वयन की ओर बढ़ने का प्रतीक है।
वेदांत की बोली को ऋणदाताओं ने नामंजूर कर दिया था। लेकिन उसने पारदर्शिता और निष्पक्षता की कमी का आरोप लगाते हुए इस प्रक्रिया को चुनौती दी थी। कंपनी राष्ट्रीय कंपनी विधि अपील न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) के समक्ष अपील कर सकती है, जिससे एनसीएलटी की मंजूरी के बावजूद योजना पर अमल रुक सकता है।
स्वीकृत योजना को वित्तीय लेनदारों से लगभग 93 फीसदी स्वीकृति मिली, जो वैधानिक सीमा से कहीं अधिक थी। इसे लेकर समर्थन में मुख्य भूमिका नैशनल ऐसेट रीकंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड (एनएआरसीएल) की थी, जिसने बैंकों से कंपनी के ऋण का महत्त्वपूर्ण हिस्सा हासिल कर लिया था और प्रमुख लेनदार बन गई थी। येस बैंक के ऋण का प्रतिनिधित्व करते हुए ऐसेट केयर ऐंड रीकंस्ट्रक्शन एंटरप्राइज ने योजना के खिलाफ मतदान किया।
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अदाणी के प्रस्ताव को मुख्य रूप से उसकी भुगतान संरचना के कारण प्राथमिकता दी गई, जिसमें लगभग 6,000 करोड़ रुपये का अग्रिम भुगतान शामिल है और बाकी राशि का भुगतान दो वर्षों में किया जाना है। इसके विपरीत वेदांत के प्रतिस्पर्धी प्रस्ताव का शुद्ध वर्तमान मूल्य 12,505 करोड़ रुपये था और इसमें पांच वर्षों में किस्तों में भुगतान का प्रावधान था। लगभग 5.44 लाख करोड़ रुपये के स्वीकृत दावों के मुकाबले स्वीकृत योजना से लगभग 15,343 करोड़ रुपये की वसूली होगी, जो लेनदारों के लिए करीब 2.8 फीसदी की वसूली दर होगी।
रियल एस्टेट, सीमेंट निर्माण, अतिथि सत्कार, बिजली और इंजीनियरिंग एवं निर्माण जैसे क्षेत्रों में उच्च गुणवत्ता वाली संपत्तियों और व्यावसायिक हित रखने वाली कंपनी जेएएल ने 55,000 करोड़ रुपये से अधिक के ऋणों के भुगतान पर चूक के बाद जून 2024 में दिवालिया कार्यवाही में पहुंची। इसके बाद भारतीय स्टेट बैंक की अगुआई में ऋणदाताओं ने लगभग 12,700 करोड़ रुपये का ऋण एनएआरसीएल को हस्तांतरित कर दिया, जिससे एनएआरसीएल सबसे बड़ी ऋणदाता बन गई।
जेएएल के वित्तीय संकट की जड़ में भारी मात्रा में कर्ज लेकर किया गया आक्रामक विस्तार है, जो 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के प्रभाव और नोएडा में विशटाउन जैसी प्रमुख रियल एस्टेट परियोजनाओं में देरी से और भी बढ़ गया। इस कारण घर खरीदारों की शिकायतें भी बढ़ती गईं।
जेपी समूह की कई कंपनियां पहले ही दिवालिया की कार्यवाही में पहुंच चुकी हैं। इनमें से जेपी इन्फ्राटेक लिमिटेड को 2024 में सुरक्षा समूह ने अधिग्रहित कर लिया था जबकि भिलाई जेपी सीमेंट 2025 में दिवालिया कार्यवाही में पहुंची। समूह की अन्य कंपनियां पुनर्गठन के विभिन्न चरणों से गुजर रही हैं।
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जेएएल की ग्रेटर नोएडा में जेपी ग्रीन्स, नोएडा में जेपी ग्रीन्स विशटाउन का एक हिस्सा है और ये दोनों राष्ट्रीय राजधानी के बाहरी इलाके में स्थित हैं। जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास रणनीतिक रूप से स्थित जेपी इंटरनैशनल स्पोर्ट्स सिटी जैसी प्रमुख रियल एस्टेट परियोजनाएं भी उसी की हैं।
इसके अलावा, दिल्ली-एनसीआर में उसके तीन वाणिज्यिक/औद्योगिक कार्यालय हैं जबकि उसके होटल डिविजन की दिल्ली-एनसीआर, मसूरी और आगरा में पांच संपत्तियां हैं। जेएएल के मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में चार सीमेंट संयंत्र और मध्य प्रदेश में पट्टे पर ली गई चूना पत्थर की कुछ खदानें हैं। उसने जयप्रकाश पावर वेंचर्स लिमिटेड, यमुना एक्सप्रेसवे टोलिंग लिमिटेड, जेपी इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट लिमिटेड और कई अन्य सहायक कंपनियों में भी निवेश कर रखा है।