घरेलू मांग में मजबूती की उम्मीदों के चलते इस्पात निर्माताओं के शेयरों में भारी उछाल देखने को मिली और बीएसई पर ये शेयर करीब 6 फीसदी चढ़कर बंद हुए। मंगलवार को स्टील अथॉरिटी यानी सेल, टाटा स्टील, जिंदल स्टील और जेएसडब्ल्यू स्टील के शेयरों में 2 से 6 फीसदी तक की बढ़त दर्ज की गई। बीएसई सेंसेक्स 0.8 फीसदी के इजाफे के साथ 76,070 के स्तर पर पहुंच गया।
पिछले महीने में इन शेयरों में गिरावट की दर बेंचमार्क इंडेक्स में आई 9 प्रतिशत की कमी की तुलना में धीमी रही थी। इसके अलावा, पिछले छह महीनों में इनमें 5 फीसदी से 15.6 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है जबकि बीएसई सेंसेक्स में 8.4 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
भारतीय इस्पात उद्योग को इस्पात की मांग लगातार मिल रही है। वित्त वर्ष 2025-26 में नौ महीने की अवधि में खपत पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में करीब 7 फीसदी बढ़ी है। कच्चे इस्पात के उत्पादन में वृद्धि इससे भी ज्यादा रही है, जो करीब 9.5 फीसदी है। इस कारण भारत एक बार फिर शुद्ध निर्यातक बन गया है। निर्यात करीब 33 फीसदी बढ़कर 48 लाख टन पर पहुंच गया जबकि आयात करीब 37 फीसदी घटकर 46 लाख टन रह गया। सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी सेल ने अपनी तीसरी तिमाही की आय संबंधी कॉन्फ्रेंस कॉल में यह जानकारी दी थी।
आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के विश्लेषकों को हालांकि लौह क्षेत्र पर भूराजनीतिक तनाव का कोई बड़ा असर नहीं दिख रहा है क्योंकि कुल स्टील उत्पादन का महज छह फीसदी ही निर्यात होता है। ब्रोकरेज फर्म ने कहा, कारोबार में थोड़ी-बहुत बाधा हो सकती है, हालांकि देसी कंपनियों पर इसका बहुत ज्यादा असर पड़ने की संभावना नहीं है।
वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में अब तक थर्मल कोयले की कीमतों में तीसरी तिमाही के औसत की तुलना में 12 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इस कारण स्पंज आयरन उत्पादकों की इनपुट लागत बढ़ गई है। उद्योग की कंपनियां भी कीमतों में आक्रामक कटौती नहीं करना चाहतीं क्योंकि कोयले की बढ़ी हुई लागत को इस्पात की कीमतों में समायोजित करना होगा, जिससे मूल्य निर्धारण में अनुशासन रहेगा। इलारा कैपिटल के विश्लेषकों का कहना है कि इस स्थिति से प्राथमिक लॉन्ग स्टील की कीमतों पर सकारात्मक समर्थन की उम्मीद है।
सरकार द्वारा दिसंबर 2025 के मध्य में 12 फीसदी सुरक्षा शुल्क लागू करने के बाद घरेलू इस्पात की कीमतों में 5,000 रुपये टन की तीव्र बहाली देखी गई है।
आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के विश्लेषकों का मानना है कि इससे आगे चलकर इस्पात उद्योग से जुड़ी कंपनियों के मुनाफे में अच्छा सुधार होगा। हालांकि, कोकिंग कोयले की कीमतों में हाल में हुई वृद्धि, जो तिमाही आधार पर 1,500 रुपये प्रति टन तक की है, से यह बढ़त कुछ हद तक सीमित रहेगी। फिर भी, कर्मचारियों को कम करने और अन्य परिचालन लागतों को घटाने पर निरंतर ध्यान देने से मुनाफे में वृद्धि सुनिश्चित होगी। सुरक्षा शुल्क के चलते इस्पात की कीमतों में हुई वृद्धि, अनुकूल मांग और लागत अनुकूलन पर ध्यान केंद्रित करने के कारण आने वाले समय में सेल के बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है। अनुकूल मूल्यांकन को देखते हुए ब्रोकरेज फर्म ने सेल को 200 रुपये की लक्षित कीमत के साथ खरीद की रेटिंग दी है।
समेकित आधार पर टाटा स्टील का परिचालन लाभ वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में तिमाही आधार पर बढ़ेगा और उत्पादन वॉल्यूम में लगभग 5 लाख टन की वृद्धि होगी। भारत में इस्पात की ऊंची कीमतें कोकिंग कोयले की ज्यादा खपत को बराबर कर देंगी, जिससे वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में लाभ मार्जिन में इजाफा होगा। पूंजीगत व्यय, बैलेंस शीट की मजबूती के अनुरूप रहेगा, जिससे पूरे चक्र में लचीलापन रह सकता है।
ऐक्सिस सिक्योरिटीज के विश्लेषकों का कहना है कि बाजार में अस्थिरता के बावजूद लागत में बदलाव से आय में वृद्धि जारी रहेगी। ब्रोकरेज फर्म ने टाटा स्टील को खरीद की रेटिंग दी है और इसका लक्ष्य 219 रुपये प्रति शेयर बताया है।
मोतीलाल ओसवाल फाइनैंशियल सर्विसेज का मानना है कि नई उत्पादन क्षमताएं शुरू होने, मजबूत घरेलू मांग और बिक्री मिश्रण में मूल्यवर्धित उत्पादों की बढ़ती हिस्सेदारी के कारण जेएसडब्ल्यू स्टील अच्छी स्थिति में है। लौह अयस्क में निजी हिस्सेदारी बढ़ाने और कोल लिंकेज को बेहतर बनाने पर इसका ध्यान है जिससे आय को मदद मिलेगी।
ब्रोकरेज फर्म का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026 से 2028 के दौरान नई उत्पादन क्षमता में वृद्धि और सुरक्षा शुल्क के कारण कीमत बहाली से राजस्व में दो अंक की वृद्धि होगी। इसके अलावा, चूंकि इनपुट लागत स्थिर रहने की उम्मीद है, ऐसे में विश्लेषकों का मानना है कि घरेलू इस्पात की कीमतों में सुरक्षा शुल्क के कारण सुधार से वित्त वर्ष 2027/28 में प्रति टन परिचालन लाभ बढ़कर 13,500 रुपये प्रति टन हो जाएगा।