facebookmetapixel
ITC के Q3 नतीजों की तारीख तय, क्या इस बार मिलेगा मोटा डिविडेंड?Axis Bank, HCL Tech और Tata Steel पर दांव लगाने की सलाह, जानिए कितना मिल सकता है रिटर्नसेना दिवस: भैरव बटालियन ने जीता लोगों का दिल, ब्रह्मोस मिसाइल ने दिखाई अपनी ताकतX ने AI चैटबॉट ग्रोक से महिलाओं और बच्चों की अश्लील तस्वीरों पर लगाया बैन, पेड यूजर्स तक सीमित किया कंटेंट क्रिएशनI-PAC दफ्तर की तलाशी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: ED की याचिका पर बंगाल सरकार से जवाब, FIR पर रोकवै​श्विक वृद्धि के लिए हमारी रणनीति को रफ्तार दे रहा भारत, 2026 में IPO और M&A बाजार रहेगा मजबूत27 जनवरी को भारत-ईयू एफटीए पर बड़ा ऐलान संभव, दिल्ली शिखर सम्मेलन में तय होगी समझौते की रूपरेखासुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: टाइगर ग्लोबल को टैक्स में राहत नहीं, मॉरीशस स्ट्रक्चर फेलएशिया प्राइवेट क्रेडिट स्ट्रैटिजी के लिए KKR ने जुटाए 2.5 अरब डॉलर, निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ीचीन के कदम से देसी प्लास्टिक पाइप कंपनियों को दम, पिछले एक साल में शेयर 23% टूटे

मुरझा गए हीरा निर्यातकों के चेहरे

Last Updated- December 08, 2022 | 2:05 AM IST

डॉलर के मुकाबले रुपये में आई कमजोरी के बाद भी हीरा निर्यातकों के चेहरे मुरझा गए हैं। रुपये में आई भारी गिरावट के बाद भी हीरा निर्यातकों को कोई लाभ नहीं मिला है क्योंकि बाजार में फिलहाल मांग नहीं है।


डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट आने से निर्यातकों को बेहतर रिटर्न मिलता है, लेकिन हाल में रुपये में आई गिरावट से हीरा निर्यातकों को कोई मदद नहीं मिली है।

सूरत डायमंड असोसिएशन  के पूर्व अध्यक्ष प्रवीण नानावटी ने कहा कि अमेरिकी मंदी के चलते दुनिया भर की अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई है और इस वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में काटे गए और पॉलिश्ड हीरे की मांग में तेजी से कमी आई है।

गुजरात जेम्स एंड जूलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के क्षेत्रीय अधिकारी चंद्रकांत संघवी ने कहा कि डॉलर के मुकाबले रुपये में भारी गिरावट आई है। ऐसे में हीरा निर्यातकों को फायदा होना चाहिए था, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में पॉलिश्ड हीरे की मांग में 15-20 फीसदी की कमी आने से इन निर्यातकों को रुपये में आई गिरावट का लाभ नहीं मिल रहा।

उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंदी के चलते लग्जरी आइटम की बिक्री में खासी गिरावट आई है। मंदी के चलते डायमंड यानी हीरे के खरीदारों ने कम कीमत पर काटे गए और पॉलिश्ड हीरे की मांग करनी शुरू कर दी है और पहले दिए गए ऑर्डर में भी कटौती शुरू कर दी है।

प्रवीण नानावटी कहते हैं – अपरिष्कृत हीरे की लागत बढ़ गई है, ऐसे में मार्जिन पर दबाव पड़ा है। बताया जा रहा है कि इस वजह से हीरे की कई यूनिट में कर्मचारियों की छंटनी भी शुरू हो गई है। यहां यह बता देना उचित रहेगा कि अमेरिका डायमंड और जूलरी का सबसे बड़ा बाजार है।

पिछले साल भारत से जितना जेम्स और जूलरी का निर्यात हुआ था उनमें से 28 फीसदी अमेरिकी बाजार में पहुंचा था। सूरत में हीरे की कटिंग और पॉलिसिंग होने के बाद यह कई जगहों मसलन दुबई, हांगकांग, थाइलैंड और इजरायल होते हुए भी अमेरिका पहुंचता है।

सूरत के डायमंड कारोबारियों का कहना है कि जब काटे गए और पॉलिश्ड हीरे की मांग में कमी आ रही है और डॉलर का भाव चढ़ रहा है तो ऐसे में इसके अंतरराष्ट्रीय खरीदार पर बुरा असर तो पड़ेगा ही और नतीजे के तौर पर वे अपना ऑर्डर या तो कम कर देंगे या फिर सीमित कर देंगे। सूरत की डायमंड इंडस्ट्री ने गिरती मांग के चलते इस साल दीवाली में काफी पहले अवकाश घोषित कर दिया था।

First Published - November 3, 2008 | 10:23 PM IST

संबंधित पोस्ट