facebookmetapixel
Advertisement
खरीफ फसलों पर संकट के बादल! कम बारिश से 315 जिले निशाने पर, 111 सबसे ज्यादा प्रभावितघरों की बिक्री बढ़ने के बीच कौन सा Realty Stock खरीदें? नुवामा ने चुना अपना टॉप पिकAkasa Air का बड़ा दावा! अगले 5 साल तक 40% ग्रोथ, IPO को लेकर भी दिया बड़ा संकेतIDBI Bank: LIC और सरकार की हिस्सेदारी खरीदने की तैयारी? फेयरफैक्स ने खरीदे हजारों करोड़ के बॉन्डऑटो कंपनियों का बड़ा संकट! टेक्नोलॉजी में भारी निवेश के बावजूद समय पर नहीं आ रहीं नई कारेंबैंकों में नकदी की कमी बढ़ी, क्या अब महंगे हो सकते हैं होम और ऑटो लोन?MSME को अब जल्दी मिलेगा पैसा, आरबीआई ने बदल दिए ट्रेड्स के नियमजून के PMI आंकड़ों ने निवेशकों और कारोबारियों को क्यों किया सतर्क?तेल और गैस सप्लाई के वैकल्पिक रास्ते तलाशना क्यों बन गया जरूरी?Opening Bell: हरे निशान में खुला बाजार! सेंसेक्स 100 अंक उछला, निफ्टी 23,800 के करीब; टेक महिंद्रा और अदाणी एंटरप्राइजेज चमके

वायदा बाजार में हल्दी नरम

Advertisement
Last Updated- December 07, 2022 | 4:01 AM IST

नकदी बाजार में हल्दी की कीमतों में आई गिरावट के चलते गुरुवार को हल्दी का वायदा बाजार भी नरम रहा।


एनसीडीईएक्स में हल्दी का जून वायदा दोपहर करीब दो बजे करीब एक फीसदी लुढ़ककर 3910 रुपये प्रति क्विंटल पर आ गया। इस तरह इसमें कुल 38 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट दर्ज की गई।

उधर, अगस्त वायदा में 1.15 फीसदी की गिरावट आई और यह करीब 48 रुपये लुढ़ककर 4114 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर पर आ गया। कार्वी कॉमट्रेड के विशेषज्ञ जी. हरीश के मुताबिक, हल्दी में गिरावट की मुख्य वजह नकदी बाजार में इसका कमजोर होना है। ऐसे में बाजार में आई गिरावट का असर भी इस पर पड़ा है।

दुनिया भर में करीब 8 लाख टन हल्दी के उत्पादन का अनुमान है, जिसमें से करीब 75-80 फीसदी हिस्सा भारत में पैदा होता है। देश में हुए कुल उत्पादन के करीब 80 फीसदी की खपत देश में ही हो जाती है। आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, उड़ीसा, तमिलनाडु, केरल और महाराष्ट्र हल्दी उत्पादन के प्रमुख इलाके हैं।

Advertisement
First Published - June 6, 2008 | 12:08 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement