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₹312 से ₹470 तक के टारगेट, Tata Motors PV को लेकर क्यों बंटे हैं ब्रोकरेज?

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टाटा मोटर्स के भविष्य को लेकर एक्सपर्ट्स बंटे हुए हैं। कुछ को बड़ी तेजी दिख रही है तो कुछ जोखिम की चेतावनी दे रहे हैं

Last Updated- June 24, 2026 | 11:44 AM IST
TATA Motors share price

Tata Motors Share Price: टाटा मोटर्स की पैसेंजर व्हीकल (पीवी) यूनिट ने अगले पांच साल के लिए बड़ा रोडमैप पेश किया है। कंपनी का कहना है कि वह भारतीय कार बाजार से कहीं तेज रफ्तार से बढ़ना चाहती है, इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) और सीएनजी गाड़ियों पर बड़ा दांव लगा रही है और 2031 तक बाजार हिस्सेदारी 20 फीसदी से ऊपर ले जाने का लक्ष्य रख रही है। इसके बावजूद मंगलवार को कंपनी का शेयर दबाव में नजर आया।

आज दोपहर करीब 11 बजे बीएसई सेंसेक्स 586 अंक से ज्यादा चढ़कर कारोबार कर रहा था, जबकि टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स का शेयर करीब 0.85 फीसदी की गिरावट के साथ 351.60 रुपये पर कारोबार कर रहा था। यानी बाजार में तेजी के बावजूद निवेशक फिलहाल कंपनी के भविष्य को लेकर मिले-जुले संकेतों पर नजर बनाए हुए हैं।

Tata Motors Share Price: अगले पांच साल में तेज बढ़त का लक्ष्य

कंपनी ने अपने निवेशक दिवस (इनवेस्टर डे) में कहा कि वह वित्त वर्ष 2026 से 2031 के बीच पैसेंजर व्हीकल बिक्री में 15 फीसदी सालाना वृद्धि हासिल करना चाहती है। यह पूरे उद्योग की अनुमानित 6-7 फीसदी वृद्धि दर से काफी ज्यादा है। कंपनी का लक्ष्य 2031 तक घरेलू पैसेंजर व्हीकल बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर 20 फीसदी तक पहुंचाना है। फिलहाल यह करीब 13.5 फीसदी के आसपास है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए कंपनी छह नई गाड़ियां लॉन्च करेगी, जिनमें तीन इलेक्ट्रिक वाहन शामिल होंगे। इसके अलावा मौजूदा मॉडल्स में 20 से ज्यादा बदलाव और अपडेट भी किए जाएंगे।

ईवी और सीएनजी पर बड़ा दांव

कंपनी का मानना है कि आने वाले सालों में कार बाजार की ज्यादातर वृद्धि इलेक्ट्रिक और सीएनजी वाहनों से आएगी। मैनेजमेंट के मुताबिक ईवी की मांग अभी भी मजबूत बनी हुई है और मौजूदा समय में कंपनी केवल करीब 50 फीसदी मांग ही पूरी कर पा रही है। इसलिए उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। कंपनी का कहना है कि वित्त वर्ष 2026 से 2031 के बीच उद्योग में होने वाली 80 फीसदी से ज्यादा वृद्धि ईवी और सीएनजी सेगमेंट से आ सकती है।

यह पढ़ें: घरों की बिक्री बढ़ने के बीच कौन सा Realty Stock खरीदें? नुवामा ने चुना अपना टॉप पिक

उत्पादन क्षमता और नेटवर्क का बड़ा विस्तार

कंपनी अपनी सालाना उत्पादन क्षमता को मौजूदा 9 लाख वाहनों से बढ़ाकर 13 लाख वाहन करने की तैयारी में है। इसके साथ ही डीलरशिप नेटवर्क को भी तेजी से बढ़ाया जाएगा। कंपनी का लक्ष्य डीलर आउटलेट्स की संख्या 1,669 से बढ़ाकर 3,200 तक ले जाना है।

सर्विस सेंटरों की संख्या भी 1,211 से बढ़ाकर 3,000 से ज्यादा करने की योजना है। कंपनी का मानना है कि ज्यादा शहरों तक पहुंच बढ़ने से बिक्री को और मजबूती मिलेगी।

लागत घटाने पर भी फोकस

सिर्फ नई गाड़ियां लॉन्च करने पर ही नहीं, बल्कि लागत कम करने पर भी कंपनी का जोर है। मैनेजमेंट ने कहा कि अगले दो सालों में पेट्रोल-डीजल वाहनों की लागत 5-6 फीसदी तक कम करने की कोशिश की जाएगी। वहीं इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रमुख पुर्जों की लागत में 25-35 फीसदी तक कमी लाने का लक्ष्य रखा गया है। इससे मुनाफे में सुधार की उम्मीद है, खासकर तब जब सरकार की पीएलआई योजना का लाभ धीरे-धीरे कम होगा।

Tata Motors Share Price: ब्रोकरेज की राय अलग-अलग

कंपनी के भविष्य को लेकर ब्रोकरेज हाउसों की राय एक जैसी नहीं है।

आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज ने शेयर पर ‘होल्ड’ रेटिंग बरकरार रखी है। ब्रोकरेज का टारगेट प्राइस 370 रुपये है, जो मौजूदा स्तर से करीब 4 फीसदी ऊपर है। उनका मानना है कि भारत में पैसेंजर व्हीकल कारोबार का भविष्य अच्छा दिख रहा है, लेकिन जगुआर लैंड रोवर (जेएलआर) की धीमी रिकवरी चिंता का विषय बनी हुई है।

एमके ग्लोबल (एमके/एमकेय) ने शेयर पर ‘ऐड’ रेटिंग दी है और 390 रुपये का टारगेट प्राइस रखा है। ब्रोकरेज का मानना है कि भारत में कंपनी का कारोबार मजबूत रहेगा और घरेलू बाजार की बढ़त जेएलआर की कमजोरी का कुछ हद तक असर कम कर सकती है।

सबसे ज्यादा उत्साहित नुवामा है। ब्रोकरेज ने शेयर पर ‘बाय’ रेटिंग बरकरार रखते हुए 470 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। नुवामा का मानना है कि कंपनी की बिक्री, राजस्व और मुनाफे में अगले कुछ सालों में मजबूत वृद्धि देखने को मिल सकती है। उनेके मुताबिक नई लॉन्चिंग, बेहतर प्रोडक्ट मिक्स और पीएलआई योजना का फायदा कंपनी को मजबूती देगा।

दूसरी तरफ मोतीलाल ओसवाल सबसे ज्यादा सतर्क नजर आ रहा है। ब्रोकरेज ने शेयर पर ‘सेल’ रेटिंग बरकरार रखते हुए 312 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। उसका कहना है कि भारत का कारोबार भले मजबूत दिख रहा हो, लेकिन बढ़ती लागत, वैश्विक अनिश्चितता और जेएलआर के सामने मौजूद चुनौतियां कंपनी के प्रदर्शन पर दबाव डाल सकती हैं।

(डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।)

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First Published - June 24, 2026 | 11:23 AM IST

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