देश के रियल एस्टेट बाजार के लिए मई का महीना मिला-जुला रहा। एक तरफ घर खरीदने वालों की मांग बढ़ी और बिक्री में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिली, वहीं दूसरी तरफ बिल्डरों ने नए प्रोजेक्ट लॉन्च करने की रफ्तार धीमी कर दी। हालांकि साल के पहले पांच महीनों की तस्वीर देखें तो बिक्री और नए लॉन्च दोनों पिछले साल के मुकाबले बढ़े हुए हैं।
मई 2026 में घरों की बिक्री मूल्य के हिसाब से 17 फीसदी बढ़ी। यानी पिछले साल मई के मुकाबले इस बार ज्यादा कीमत के घर बिके। अप्रैल के मुकाबले भी बिक्री में 2 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। अगर घरों की संख्या के हिसाब से देखें तो बिक्री 6 फीसदी बढ़ी है। यह लगातार चौथा महीना है जब घरों की बिक्री की संख्या पिछले साल के मुकाबले बढ़ी है।
इस साल जनवरी से मई के बीच बेंगलुरु में घरों की बिक्री मूल्य के हिसाब से 39 फीसदी बढ़ी, जो सभी बड़े शहरों में सबसे ज्यादा है। चेन्नई भी पीछे नहीं रहा, वहां बिक्री में 26 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। मुंबई महानगर क्षेत्र (एमएमआर) और कोलकाता में भी घरों की मांग मजबूत रही और बिक्री 11 से 13 फीसदी तक बढ़ी। इसके अलावा पुणे, हैदराबाद और अन्य प्रमुख शहरों में भी 4 से 8 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
हालांकि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) की तस्वीर थोड़ी अलग रही। यह एकमात्र बड़ा बाजार रहा जहां घरों की बिक्री की संख्या सालाना आधार पर घटी है। कुल मिलाकर जनवरी से मई 2026 के दौरान घरों की बिक्री मूल्य के हिसाब से 13 फीसदी और बिक्री की संख्या के हिसाब से 5 फीसदी बढ़ी है।
घरों की मांग बढ़ने के बावजूद मई में बिल्डरों ने नए प्रोजेक्ट लॉन्च करने में सावधानी बरती। मई में नए लॉन्च का मूल्य पिछले साल की तुलना में 18 फीसदी और अप्रैल के मुकाबले 12 फीसदी घट गया। हैदराबाद को छोड़कर लगभग सभी बड़े शहरों में नए लॉन्च कम रहे। हालांकि साल की शुरुआत में बिल्डरों ने काफी आक्रामक तरीके से प्रोजेक्ट लॉन्च किए थे। यही वजह है कि जनवरी से मई 2026 के दौरान कुल लॉन्च अब भी 10 फीसदी बढ़े हुए हैं।
शहरवार आंकड़ों पर नजर डालें तो चेन्नई में लॉन्च मूल्य 34 फीसदी और हैदराबाद में 12 फीसदी घटा है। वहीं बेंगलुरु में नए लॉन्च का मूल्य 47 फीसदी बढ़ा है। बाकी शहरों में भी 5 से 15 फीसदी तक की बढ़ोतरी देखने को मिली है।
रियल एस्टेट बाजार के लिए एक राहत की बात यह है कि बिना बिके घरों का स्टॉक फिलहाल नहीं बढ़ रहा। देशभर में औसतन 20 महीने का इन्वेंट्री स्तर बना हुआ है। यानी मौजूदा बिक्री रफ्तार के हिसाब से उपलब्ध घरों को बेचने में करीब 20 महीने लगेंगे। पुणे, बेंगलुरु और एनसीआर में यह आंकड़ा 15 से 17 महीने के बीच है, जो अपेक्षाकृत बेहतर माना जाता है। दूसरी तरफ हैदराबाद में सबसे ज्यादा 29 महीने का स्टॉक मौजूद है। इसके अलावा बाकी प्रमुख शहरों में इन्वेंट्री 19 से 23 महीने के बीच है।
ब्रोकरेज फर्म नुवामा की रिपोर्ट की सबसे अहम बात यह है कि लगभग सभी बड़े शहरों में घरों की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। सबसे ज्यादा तेजी चेन्नई और एनसीआर में देखने को मिली, जहां कीमतें 18 से 19 फीसदी तक बढ़ गईं। कीमतें बढ़ने का सीधा असर घर की कुल लागत यानी टिकट साइज पर पड़ा। चेन्नई और एनसीआर में घरों का औसत टिकट साइज 27 से 28 फीसदी बढ़ गया।
मुंबई महानगर क्षेत्र, पुणे और बेंगलुरु में भी घरों का औसत टिकट साइज 17 से 19 फीसदी तक बढ़ा है। एनसीआर देश का सबसे महंगा बाजार बना हुआ है। मई के दौरान वहां एक घर की औसत कीमत करीब 3.9 करोड़ रुपये रही। इसके अलावा घरों का औसत आकार भी बढ़ा है, जिससे कुल खरीद लागत और ऊपर चली गई है।
रिपोर्ट का मानना है कि आने वाले समय में घरों की बिक्री में बहुत तेज बढ़ोतरी की उम्मीद नहीं है। इसकी सबसे बड़ी वजह घरों की बढ़ती कीमतें और घटती वहनीयता (अफोर्डेबिलिटी) है। विशेषज्ञों का कहना है कि बिल्डरों ने पिछले कुछ वर्षों में लग्जरी और महंगे घरों पर ज्यादा ध्यान दिया है। अब उन्हें मध्यम आय वर्ग और प्रीमियम सेगमेंट की ओर ज्यादा फोकस करना होगा। साथ ही घरों की कीमतों और टिकट साइज को नियंत्रित रखना भी जरूरी होगा ताकि ज्यादा लोग घर खरीदने का फैसला कर सकें।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि रियल एस्टेट कंपनियों के शेयरों में पिछले कुछ समय से गिरावट देखी गई है। इसकी वजह बिक्री की रफ्तार को लेकर निवेशकों की चिंता है। हालांकि जिन कंपनियों के पास किराये से नियमित आय (एन्युटी पोर्टफोलियो) आती है, उनका प्रदर्शन अपेक्षाकृत बेहतर रह सकता है। ब्रोकरेज हाउस नुवामा ने रियल एस्टेट सेक्टर में प्रेस्टिज एस्टेट्स को अपनी सबसे पसंदीदा कंपनी बताया है।
(डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।)