राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजित डोभाल ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते का भारत स्वागत करता है। डोभाल ने मंगलवार को ‘ब्रिक्स’ देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक में कहा कि भारत ‘सतर्क रुख’ के साथ उम्मीद करता है कि संघर्ष समाप्त करने के लिए दोनों देशों के बीच हुआ समझौता ठोस नतीजे लाएगा।
इस बैठक की अध्यक्षता करने वाले डोभाल ने कहा कि भारत को उम्मीद है कि अमेरिका-ईरान के बीच हुआ समझौता वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा स्थिर करेगा और जरूरी सामान व उर्वरकों की आपूर्ति श्रृंखला में आ रही बाधाएं दूर करेगा। उन्होंने कहा,‘होर्मुज स्ट्रेट का खुलना बहुत अच्छी बात है। इससे आपूर्ति श्रृंखला की बाधाएं दूर होंगी और उर्वरक व रसायन जैसे क्षेत्रों में कमी की समस्या का समाधान होगा।’
इस समूह की मौजूदा अध्यक्षता भारत के पास है और वह सितंबर में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। बैठक में चीन के विदेश मंत्री वांग यी, रूस के एनएसए सर्गेई शोइगु, ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के उप-सचिव घादिर नेजामीपुर और ब्रिक्स के अन्य वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी शामिल हुए।
सम्मेलन में चीन के विदेश मंत्री ने ब्रिक्स देशों से वैश्विक चुनौतियों ( जिनमें वैश्विक ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा, इबोला से लेकर एआई तक शामिल हैं) का मिलकर सामना करने और रणनीतिक खनिज संसाधनों पर सहयोग मजबूत करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि समूह को ‘बहुपक्षवाद का झंडा ऊंचा रखना चाहिए’ और एकपक्षीयता व संरक्षणवाद का पुरजोर विरोध करना चाहिए। वांग ने कहा,‘ब्रिक्स सदस्यों को न्याय की बात करने और निष्पक्ष नतीजे दिलाने में पहल करने की जरूरत है, साथ ही अंतरराष्ट्रीय मामलों में अपनी स्थिति और भूमिका और मजबूत बनानी चाहिए।’
चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक वांग ने सोमवार शाम डोभाल से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने कहा कि भारत और चीन के लिए एक-दूसरे के ‘मुख्य हितों’ का सम्मान करना और दोनों देशों के नेताओं के बीच बनी ‘महत्त्वपूर्ण सहमति’ लागू करने के लिए ठोस कदम उठाना ‘बहुत आवश्यक’ है। वांग और डोभाल भारत-चीन सीमा मुद्दे पर विशेष प्रतिनिधि हैं।
वांग ने कहा कि सबसे बड़ी आबादी वाली दो अर्थव्यवस्थाओं के तौर पर चीन और भारत को न केवल द्विपक्षीय संबंधों को दीर्घकालिक नजरिये से देखना चाहिए बल्कि वैश्विक हालात को ध्यान में रखते हुए भी दोनों देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक-दूसरे के मुख्य हितों का सम्मान करना, संवेदनशील मुद्दों को सही ढंग से संभालना और चीन-भारत सीमा मुद्दे को सही जगह पर रखना जरूरी है ताकि इनका असर द्विपक्षीय संबंधों पर न हो। चीन के विदेश मंत्रालय के बयान के मुताबिक वांग ने कहा कि द्विपक्षीय संबंध ‘धीरे-धीरे ‘अब सुधर रहे हैं और दोबारा पटरी पर लौट रहे हैं।’
शिन्हुआ ने आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति का हवाला देते हुए बताया कि चीन के विदेश मंत्री ने बातचीत के तंत्र को बहाल करने और व्यापार, वित्त, कानून प्रवर्तन और मीडिया जैसे विभिन्न क्षेत्रों में आदान-प्रदान को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने मंगलवार को बीजिंग में मीडिया को बताया कि चीन-भारत सीमा क्षेत्र आम तौर पर स्थिर है और दोनों पक्ष सीमा से जुड़े मुद्दों पर एक दूसरे के साथ लगातार संपर्क में हैं। नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोमवार को कहा कि डोभाल और वांग के बीच बातचीत ‘रचनात्मक और भविष्योन्मुखी’ थी।
उन्होंने कहा, ‘एनएसए डोभाल ने इस बात पर जोर दिया कि स्थिर, स्पष्ट और रचनात्मक द्विपक्षीय संबंध दोनों पक्षों के बीच विश्वास और बेहतर समझ बनाने में योगदान करते हैं।’ जायसवाल ने कहा कि दोनों पक्षों ने ‘धीरे-धीरे सामान्य स्थिति की ओर बढ़ने में हुई प्रगति पर ध्यान दिया।’
नई दिल्ली में 14 मई को हुई ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक की तरह ही ब्रिक्स देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक में भी ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों के बीच तीखी बहस हुई। ब्रिक्स में मूल रूप से ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल थे। इस समूह का वर्ष 2024 में विस्तार हुआ और इसमें मिस्र, इथियोपिया, ईरान और यूएई शामिल हुए।
बाद में ब्रिक्स देशों के एनएसए और वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। सोशल मीडिया ‘एक्स ‘पर एक पोस्ट में प्रधानमंत्री ने कहा कि बदलती दुनिया में सुरक्षा सहयोग गहरा करने और आतंकवाद, साइबर सुरक्षा से लेकर उभरती तकनीक जैसी साझा चुनौतियों से निपटने में ब्रिक्स की अहम भूमिका है।
अपने संबोधन में डोभाल ने कहा,‘हम बहुत उथल-पुथल भरे समय में मिल रहे हैं। दुनिया भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं, आर्थिक दबावों और विघटनकारी तकनीक का सामना कर रही है। न केवल खतरे बढ़ रहे हैं बल्कि इन संघर्षों को सुलझाने या कम करने के लिए मौजूदा साधन और संस्थागत तंत्र भी अपर्याप्त साबित हो रहे हैं।’ उन्होंने कहा कि बहुपक्षवाद कमजोर हो रहा है जिसे देखते हुए विभिन्न चुनौतियों से निपटने में ब्रिक्स की बड़ी भूमिका है।
ईरान के नेजामीपुर ने ईरान के शहर मिनाब में एक स्कूल पर हुए हमले में मारे गए बच्चों का पोस्टर दिखाया। उन्होंने कहा कि उनके देश के खिलाफ कुछ हमले यूएई में मौजूद ठिकानों से किए गए थे। उन्होंने कहा, ‘पूरी दुनिया ने देखा कि अमेरिका और इजरायल ही होर्मुज स्ट्रेट में संकट के सूत्रधार थे। हमले यूएई की धरती पर स्थित ठिकानों से भी किए गए थे।’ (साथ में एजेंसियां)