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हाइब्रिड बीजों से असंतुष्ट हैं वैज्ञानिक

Last Updated- December 07, 2022 | 6:42 AM IST

धान की अधिक पैदावार लेने के लिए हाइब्रिड बीजों का इस्तेमाल करने की उत्तर प्रदेश सरकार की योजना कृषि वैज्ञानिकों की नजर में घाटे का सौदा है।


खाद्यान्न संकट से निपटने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार का कृषि विकास विभाग इस वर्ष हाइब्रिड बीज बोकर अधिक उपज प्राप्त करने की योजना बना रहा है। विभाग ने पूरे प्रदेश में 9 लाख हेक्टेयर भूमि पर हाइब्रिड धान के बीजों से खेती कराने की योजना बनायी है।

उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद (उपकार) ने जब हाइब्रिड बीजों की बोआई एग्री क्लाइमेटिक जोन के हिसाब से करवा कर परीक्षण किया तो नतीजे खराब निकलें। उपकार के कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार हाइब्रिड बीजों के परीक्षण के दौरान सात रोगों के लक्षण दिखाई पड़े हैं। गलत बीज के इस्तेमाल से किसानों को नुकसान नहीं हो इसलिए परीक्षण से संबंधित सारे रिपोर्ट कृषि विभाग को भेज दिए गए हैं।

हाइब्रिड बीजों का प्रयोग ‘धान का कटोरा’ कहे जाने वाले पूर्वी मैदानी क्षेत्रों में ही परीक्षण के दौरान खरा नहीं उतरा है। प्रदेश में सबसे अधिक धान की पैदावार इसी क्षेत्र में होती है।कृषि वैज्ञानिक डॉ. एस के सिंह के अनुसार मॉनसून के सही रहने पर धान की खेती के लिए हाइब्रिड बीजों पर निर्भर रहने की रिपोर्ट कोई जरुरत नहीं रहेगी।

गौरतलब है कि प्रदेश में इस साल मॉनसून का आगमन समय से एक सप्ताह पहले ही हो गया है। लखनऊ और कानपुर के आस पास के क्षेत्रों में अब तक 100 मिलिलीटर से अधिक बारिश हो चुकी है जबकि बुंदेलखंड के झांसी मंडल में बीत दो दिनों में 13 मिलिलीटर पानी बरसा है।

First Published - June 19, 2008 | 10:46 PM IST

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