भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बैंकों को रुपया डेरिवेटिव में आर्बिट्राज ट्रेड पर लगी कुछ पाबंदियों में ढील दी है जिससे डॉलर के मुकाबले रुपये में आज नरमी आई। आरबीआई ने यह उपाय 1 अप्रैल को लागू किया था जिसे सोमवार को आंशिक रूप से वापस लिया गया। रुपया आज 0.4 फीसदी नरम होकर 93.50 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। सोमवार को रुपया 93.12 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।
फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स में ट्रेजरी हेड और कार्यकारी निदेशक अनिल कुमार भंसाली ने कहा, ‘रुपया इसलिए गिरा क्योंकि आर्बिट्राज ने ऑनशोर में खरीदने और ऑफशोर में बेचने का अपना खेल शुरू कर दिया। हालांकि दोनों के बीच का अंतर बहुत ज्यादा नहीं था।’ भंसाली ने कहा कि भले ही कुछ पाबंदियां हटा ली गई हैं मगर तेल कंपनियों के लिए डॉलर विंडो जैसे उपाय की वजह से रुपये में तेज गिरावट की आशंका कम है।
उन्होंने कहा, ‘आरबीआई की गतिविधियों पर कड़ी नजर होगी ताकि यह अंदाज लगाया जा सके कि वह विनिमय दर में कितना उतार चढ़ाव की अनुमति देगा। कल रुपये की विनिमय दर 93 से 93.75 रुपये प्रति डॉलर के बीच रहने की उम्मीद है।’
सप्ताहांत में प्रिंसटन यूनिवर्सिटी में दिए गए एक भाषण में आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा था कि केंद्रीय बैंक ने जरूरत पड़ने पर विदेशी मुद्रा बाजार में दखल दिया लेकिन उन्होंने किसी स्तर का बचाव करने की कोई प्रतिबद्धता नहीं जताई। संभवतः उनका इशारा मार्च में किए गए उस भारी हस्तक्षेप की ओर था जब पश्चिम एशिया में हुए संघर्ष के चलते रुपया दबाव में आ गया था।
बाजार के भागीदारों ने कहा कि पाबंदियों में आंशिक ढील का हाजिर रुपये पर तुरंत कोई असर पड़ने की संभावना नहीं है क्योंकि रुपये की दिशा अभी भी व्यापक वैश्विक कारकों से ही तय हो रही है। वैश्विक ऊर्जा बाजार में कीमतें बढ़ने से रुपये पर दबाव और बढ़ गया है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतें 95 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं।
डॉलर के मुकाबले मार्च में रुपया करीब 4 फीसदी से ज्यादा नरम हो गया था मगर अप्रैल में अभी तक यह 1.41 फीसदी मजबूत हुआ है। साल 2026 में रुपये में अभी तक 3.87 फीसदी की गिरावट आई है।