facebookmetapixel
Advertisement
US-Iran War: ईरान पर आर्थिक संकट का बम, ट्रंप बोले रोज 500 मिलियन डॉलर का नुकसानNestle India Share: नतीजों के बाद तेजी, शेयर 5% चढ़ा; ब्रोकरेज ने बढ़ाए अनुमान, पर चेतावनी भीGold and Silver Price Today: सोना 1.53 लाख के पार, चांदी में भी तूफानी तेजी; चेक करें आज के रेटHCL Tech Share को क्या हुआ? Q4 में मुनाफे बढ़ने के बावजूद 9% लुढ़का, एनालिस्ट्स ने बदला नजरियाNSE IPO: 10 साल बाद खुला रास्ता! सेबी से मिली बड़ी राहत, ₹1800 करोड़ के सेटलमेंट को मंजूरीWeather Update: झुलसाने लगी हवाएं, पारा 40°C पार; IMD ने जारी किया हीटवेव का अलर्टविदेश जाने वालों के लिए बड़ा बदलाव! PAN नहीं है तो अब बिना इस फॉर्म के नहीं भर पाएंगे उड़ानकेरल से लेकर पंजाब तक, कर्ज में डूबे राज्यों की वजह से धीमी पड़ रही विकास की रफ्तारतेल उछला, गैस फिसली और डॉलर मजबूत, ईरान तनाव के बीच ग्लोबल बाजार में उथल-पुथलहर बैग पर ₹10-12 महंगा हुआ सीमेंट, इस माहौल में ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा स्टॉक्स

पाबंदियों में आं​शिक ढील से फिसला रुपया, डेरिवेटिव ट्रेड ने बदली चाल

Advertisement

रुपया आज 0.4 फीसदी नरम होकर 93.50 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। सोमवार को रुपया 93.12 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था

Last Updated- April 21, 2026 | 10:37 PM IST
Rupee

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बैंकों को रुपया डेरिवेटिव में आर्बिट्राज ट्रेड पर लगी कुछ पाबंदियों में ढील दी है जिससे डॉलर के मुकाबले रुपये में आज नरमी आई। आरबीआई ने यह उपाय 1 अप्रैल को लागू किया था जिसे सोमवार को आं​शिक रूप से वापस लिया गया। रुपया आज 0.4 फीसदी नरम होकर 93.50 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। सोमवार को रुपया 93.12 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।

फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स में ट्रेजरी हेड और कार्यकारी निदेशक अनिल कुमार भंसाली ने कहा, ‘रुपया इसलिए गिरा क्योंकि आर्बिट्राज ने ऑनशोर में खरीदने और ऑफशोर में बेचने का अपना खेल शुरू कर दिया। हालांकि दोनों के बीच का अंतर बहुत ज्यादा नहीं था।’ भंसाली ने कहा कि भले ही कुछ पाबंदियां हटा ली गई हैं मगर तेल कंपनियों के लिए डॉलर विंडो जैसे उपाय की वजह से रुपये में तेज गिरावट की आशंका कम है।

उन्होंने कहा, ‘आरबीआई की गतिविधियों पर कड़ी नजर होगी ताकि यह अंदाज लगाया जा सके कि वह विनिमय दर में कितना उतार चढ़ाव की अनुमति देगा। कल रुपये की विनिमय दर 93 से 93.75 रुपये प्रति डॉलर के बीच रहने की उम्मीद है।’

सप्ताहांत में प्रिंसटन यूनिवर्सिटी में दिए गए एक भाषण में आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने कहा था कि केंद्रीय बैंक ने जरूरत पड़ने पर विदेशी मुद्रा बाजार में दखल दिया लेकिन उन्होंने किसी स्तर का बचाव करने की कोई प्रतिबद्धता नहीं जताई। संभवतः उनका इशारा मार्च में किए गए उस भारी हस्तक्षेप की ओर था जब पश्चिम एशिया में हुए संघर्ष के चलते रुपया दबाव में आ गया था।

बाजार के भागीदारों ने कहा कि पाबंदियों में आंशिक ढील का हाजिर रुपये पर तुरंत कोई असर पड़ने की संभावना नहीं है क्योंकि रुपये की दिशा अभी भी व्यापक वैश्विक कारकों से ही तय हो रही है। वै​श्विक ऊर्जा बाजार में कीमतें बढ़ने से रुपये पर दबाव और बढ़ गया है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतें 95 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं।

डॉलर के मुकाबले मार्च में रुपया करीब 4 फीसदी से ज्यादा नरम हो गया था मगर अप्रैल में अभी तक यह 1.41 फीसदी मजबूत हुआ है। साल 2026 में रुपये में अभी तक 3.87 फीसदी की गिरावट आई है।

Advertisement
First Published - April 21, 2026 | 10:11 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement