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Rupee vs Dollar: 95 का स्तर लांघकर लौटा रुपया, RBI नियमों से डॉलर-फॉरवर्ड बाजार में हलचल

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वित्त वर्ष 2026 के अंतिम कारोबारी दिन रुपया 94.81 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। वित्त वर्ष 2012 के बाद वित्त वर्ष 2026 रुपये के लिए सबसे खराब रहा

Last Updated- March 30, 2026 | 10:47 PM IST
Rupee

डॉलर के मुकाबले रुपये में आज खूब उतार-चढ़ाव दिखा और कुछ समय के लिए यह 95 प्रति डॉलर के स्तर को लांघ गया और 95.24 प्रति डॉलर के निचले स्तर पर पहुंच गया। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि कंपनियों ने ऑनशोर और ऑफशोर बाजारों के बीच आर्बिट्राज (कीमतों के अंतर से फायदा उठाने) का लाभ उठाया जबकि आयातकों की डॉलर की मांग के कारण रुपये की शुरुआती बढ़त खत्म हो गई।

सुबह के कारोबार में रुपया मजबूत खुला था और करीब 1 फीसदी चढ़कर 93.53 प्रति डॉलर पर आ गया था। भारतीय रिजर्व बैंक ने रुपये पर पड़ने वाले अवमूल्यन के दबाव को रोकने के लिए शुक्रवार को बैंकों की खुली ऑनशोर डॉलर-रुपया स्थितियों पर सीमा तय कर दी थी इसलिए आज रुपया मजबूत खुला था।

वित्त वर्ष 2026 के अंतिम कारोबारी दिन रुपया 94.81 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। वित्त वर्ष 2012 के बाद वित्त वर्ष 2026 रुपये के लिए सबसे खराब रहा। चालू वित्त वर्ष में रुपये में 9.85 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई और सभी ए​शियाई मुद्राओं में इसका प्रदर्शन सबसे खराब रहा। इस साल मार्च में रुपये में 4.04 फीसदी की नरमी आई। 2020 में कोविड के बाद से यह रुपये का सबसे खराब महीना साबित हुआ।

भारतीय रिजर्व बैंक का बैंकों की ऑनशोर पोजीशन पर सीमा लगाने का फैसला (10 अप्रैल तक) ऐसे समय में आया है जब डॉलर पर लंबी अवधि के दांव काफी बढ़ गए थे। बैंकों को इसमें निवेश कम करने के लिए मजबूर करके केंद्रीय बैंक ऑनशोर मार्केट में डॉलर की अल्पकालिक आपूर्ति बढ़ाना चाहता था। बैंकों ने केंद्रीय बैंक से नियमों में ढील देने का अनुरोध किया है क्योंकि उन्हें मार्क-टु-मार्केट घाटे का सामना करना पड़ रहा है।

बाजार के जानकारों का कहना है कि भारतीय रिजर्व बैंक के कदम ने बैंकों की शुद्ध खुली पोजीशन 10 करोड़ डॉलर पर सीमित कर दी थी तथा हाजिर और नॉन-डिलीवरेबल फॉरवर्ड (एनडीएफ) बाजारों के बीच कीमतों के अंतर पर आधारित सौदों को खत्म करना पड़ा।

बैंकों ने हाजिर बाजार में डॉलर बेचे जबकि फॉरवर्ड सेगमेंट में खरीदारी की। इससे शुरुआती कारोबार में डॉलर की कीमत में तेजी से बढ़ोतरी हुई और एक साल के एनडीएफ तथा ऑनशोर फॉरवर्ड दरों के बीच का अंतर बढ़कर लगभग एक रुपया हो गया। एक साल का डॉलर/रुपया फॉरवर्ड प्रीमियम बढ़कर लगभग 2.92 फीसदी पहुंच गया, जो पिछले हफ्ते लगभग 2 फीसदी था। यह इस बात का संकेत है कि फॉरवर्ड कवर की मांग बहुत ज्यादा थी क्योंकि बैंक अपनी पोजीशन खत्म करने की होड़ में लगे थे।

डीलरों के अनुसार विदेशी बैंकों की बिकवाली और ओवरनाइट इंडेक्स्ड स्वैप दरों में बढ़ोतरी के कारण सरकारी बॉन्ड यील्ड भी 7 फीसदी के पार 7.04 फीसदी पर बंद हुई जो जुलाई 2024 के बाद से सबसे अधिक है। शुक्रवार को यह 6.94 फीसदी थी।

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First Published - March 30, 2026 | 10:43 PM IST

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