facebookmetapixel
Advertisement
NEET री-एग्जाम से पहले Telegram को नहीं मिली राहत, दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज की याचिकाGold Silver Price Today: सोना 1.50 लाख रुपये से नीचे लुढ़का, चांदी में भी तेज गिरावट; चेक करें आज के रेटइजराइल को जेडी वेंस की दोटूक चेतावनी- ‘हर सुरक्षा चुनौती का समाधान लोगों को मारकर नहीं कर सकते’IT शेयरों में भारी बिकवाली, निफ्टी IT करीब 6% टूटा; इंफोसिस, TCS समेत सभी 10 शेयर लाल निशान मेंAccenture के कमजोर संकेत से TCS, Infosys और Wipro के निवेशकों को क्या समझना चाहिए?भारत-ब्रिटेन डील का बड़ा फायदा! भारतीय कंपनियों के बचेंगे 500 मिलियन पाउंड हर सालAI बदलेगा रियल एस्टेट का खेल! 7 साल में सेक्टर को मिलेगा 17 अरब डॉलर तक का बूस्टभारत के ब्यूटी मार्केट में बड़ा दांव, लॉरियल खरीदेगी इनोविस्ट में बहुलांश हिस्सेदारीRBI की सख्ती से थम सकती है बॉन्ड बाजार की रफ्तार, विशेषज्ञों ने जताई आशंकाStock Market Update: Infosys-TCS की फिसलन से बाजार में हड़कंप; सेंसेक्स 700 अंक टूटा, निफ्टी 24,000 के नीचे लुढ़का

चावल की खरीद 1 करोड़ टन के पार

Advertisement
Last Updated- December 08, 2022 | 4:00 AM IST

केंद्र सरकार द्वारा की गई चावल की खरीद आज 100 लाख टन को पार कर गई। पिछले साल की समान अवधि की तुलना में इस बार की खरीद में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।


भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘चालू सीजन में 17 नवंबर को चावल की खरीद 101.7 लाख टन के स्तर को पार कर गई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह 84.7 लाख टन था।’

2008-09 के सीजन (अक्टूबर से नवंबर) में सरकार का लक्ष्य 276 लाख टन चावल खरीदने का है। चावल की सामान्य किस्मों के लिए सरकार ने 850 रुपये प्रति क्विंटल का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया है जबकि ‘ग्रेड ए’ का न्यूनतम समर्थन मूल्य 880 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है।

इसके अलावा केंद्र सरकार ने इस सीजन में एमएसपी के अतिरिक्त 50 रुपये प्रति क्विंटल के बोनस की घोषणा भी की है।चावल की खरीद का सीजन हरियाणा को छोड़ कर शेष राज्यों में 1 अक्टूबर से शुरू हुआ था।

राज्य सरकार के अनुरोध पर हरियाणा में चावल की खरीद 22 सितंबर से शुरू कर दी गई। हरियाणा में चावल की खरीद जल्द शुरू हो जाने के बावजूद सरकार 17 अक्टूबर तक 12.3 लाख टन चावल ही खरीद पायी जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह 13.2 लाख टन था।

सभी राज्यों की तुलना में पंजाब के किसानों का योगदान सबसे अधिक (80 लाख टन) रहा। एफसीआई के अधिकारी ने बताया कि इस साल धान की आवक और इसकी खरीद दोनों ही अधिक हुई है जो इस बात की ओर इशारा करता है कि उत्पादन अच्छा हुआ है साथ ही न्यूनतम समर्थन मूल्यों से किसान भी खुश हैं।

एफसीआई के आंकड़ों के अनुसार, मंडियों में धान की आवक 176.2 लाख टन को पार कर चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह 162.7 लाख टन थी। केंद्र सरकार भी इस साल मंडियों में आए धान का 84 प्रतिशत खरीदने में सक्षम रही है जबकि पिछले साल यह 75 प्रतिशत थी। 2007-08 के सीजन में 285 लाख टन चावल की खरीद की गई थी।

Advertisement
First Published - November 17, 2008 | 11:33 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement