Accenture Results: आईटी दिग्गज एक्सेंचर ने मार्च-मई तिमाही (Q3 FY26) के नतीजे जारी किए हैं। कंपनी की आय सालाना आधार पर 5.6 फीसदी बढ़कर 18.7 अरब डॉलर रही, जो बाजार के अनुमान के लगभग बराबर है। इसके बावजूद निवेशकों ने नतीजों को लेकर खास उत्साह नहीं दिखाया और कंपनी के शेयर में जोरदार गिरावट देखने को मिली।
तिमाही के दौरान कंपनी के कंसल्टिंग कारोबार की वृद्धि सिर्फ 1 फीसदी रही। वहीं आउटसोर्सिंग या मैनेज्ड सर्विसेज कारोबार 5 फीसदी बढ़ा। यानी कंपनी का बड़ा कारोबार अभी भी चल रहा है, लेकिन नए प्रोजेक्ट मिलने की रफ्तार पहले जैसी नहीं दिख रही।
निवेशकों की सबसे बड़ी चिंता नए ऑर्डर यानी बुकिंग्स को लेकर है। तिमाही में एक्सेंचर को 19.3 अरब डॉलर के नए ऑर्डर मिले, जो पिछले साल के मुकाबले 2 फीसदी कम हैं। दिलचस्प बात यह है कि कंसल्टिंग बुकिंग्स 13 फीसदी बढ़ीं, लेकिन आउटसोर्सिंग बुकिंग्स करीब 15 फीसदी गिर गईं। यही वजह है कि बाजार ने नतीजों को ज्यादा सकारात्मक नहीं माना।
कंपनी का कहना है कि पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में चल रहे संघर्ष का असर उसके कारोबार पर पड़ा है। एक्सेंचर के मुताबिक इस वजह से उसे करीब 10 करोड़ डॉलर के राजस्व का नुकसान हुआ। कंपनी ने यह भी बताया कि कुछ बड़े आउटसोर्सिंग सौदे फिलहाल टल गए हैं और अब उनके अगले वित्त वर्ष में आने की उम्मीद है।
एक्सेंचर ने वित्त वर्ष 2026 के लिए अपनी ग्रोथ गाइडेंस भी कम कर दी है। पहले कंपनी को 3 से 5 फीसदी की वृद्धि की उम्मीद थी, लेकिन अब उसने इसे घटाकर 3 से 4 फीसदी कर दिया है। यानी कंपनी को आने वाले महीनों में कारोबार की रफ्तार थोड़ी धीमी रहने का अंदेशा है।
हालांकि कंपनी भविष्य को लेकर काफी आशावादी है। एक्सेंचर का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आने वाले वर्षों में उसके लिए बड़ा ग्रोथ इंजन साबित हो सकता है। कंपनी का कहना है कि ग्राहक अब सिर्फ AI के छोटे-छोटे प्रयोग नहीं कर रहे, बल्कि बड़े पैमाने पर AI आधारित बदलाव की योजनाएं बना रहे हैं।
अब तक एक्सेंचर का फोकस बड़ी कंपनियों पर रहा है, लेकिन अब वह मिड-साइज कंपनियों के बाजार में भी उतर रही है। इसके लिए कंपनी ने “Accenture Edge” नाम का नया प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है। इसके जरिए तकनीक, डेटा, साइबर सुरक्षा, AI और उत्पादकता से जुड़ी सेवाएं दी जाएंगी।
एक्सेंचर ने अधिग्रहण (एक्विजिशन) की अपनी योजना भी बढ़ा दी है। कंपनी अब इस साल करीब 9 अरब डॉलर खर्च कर दूसरी कंपनियां खरीदेगी। पहले यह लक्ष्य 5 अरब डॉलर था। इससे साफ है कि कंपनी भविष्य की तैयारी में कोई कमी नहीं छोड़ना चाहती।
नुवामा का कहना है कि एक्सेंचर के कमजोर ऑर्डर और पूरे साल के लिए ग्रोथ अनुमान घटाने की खबर भारतीय IT कंपनियों के लिए बहुत बड़ी चिंता की बात नहीं है, लेकिन इसे पूरी तरह नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता। ब्रोकरेज का मानना है कि मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव की वजह से कुछ प्रोजेक्ट टले और कारोबार पर असर पड़ा। हालांकि अब हालात सुधरते दिख रहे हैं, इसलिए इसका असर लंबे समय तक रहने की उम्मीद नहीं है।
नुवामा के मुताबिक नतीजों के बाद एक्सेंचर के शेयर में करीब 15 फीसदी की गिरावट कुछ ज्यादा ही रही। यानी बाजार ने जरूरत से ज्यादा नकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। ब्रोकरेज अब भी मानता है कि जनरेटिव AI आने वाले वर्षों में भारतीय IT कंपनियों के लिए बड़ा मौका लेकर आएगा। जैसे-जैसे कंपनियां AI को बड़े पैमाने पर अपनाएंगी, IT कंपनियों के लिए नए प्रोजेक्ट और नया कारोबार पैदा होगा।
साथ ही, हाल के महीनों में IT शेयरों में आई गिरावट के बाद कई कंपनियों के शेयर अब आकर्षक कीमतों पर मिल रहे हैं। यानी जिन निवेशकों की नजर लंबी अवधि पर है, उनके लिए IT सेक्टर में मौके बन सकते हैं।
(डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।)