रिकॉर्ड खरीद के बाद चावल का भंडार बढ़ने से दबाव में आई ओडिशा सरकार ने खुले बाजार में एक लाख टन चावल बेचने का फैसला किया है। साथ ही, गोदामों पर दबाव कम करने के लिए पीडीएस लाभार्थियों को अतिरिक्त मुफ्त अनाज देने के दायरे का भी विस्तार किया गया है। राज्य इस समय दो लाख टन से अधिक चावल के अधिशेष से जूझ रहा है। यह स्थिति तब बनी है, जब केंद्र ने 2024-25 के खरीफ विपणन सत्र के लिए खरीद लक्ष्य बढ़ाकर 58 लाख टन कर दिया था।
ओडिशा ने खरीफ सत्र में 73.45 लाख टन और रबी में 19.18 लाख टन धान की ऐतिहासिक खरीद की, जिससे अनुमानित रूप से 63.37 लाख टन चावल का उत्पादन हुआ। इसमें से लगभग 30 लाख टन चावल राज्य के भीतर ही राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए), राज्य खाद्य सुरक्षा योजना (एसएफएसएस) और अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के तहत उपयोग कर लिया गया।
आंकड़ों के अनुसार भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) द्वारा 28 लाख टन चावल केंद्रीय पूल के लिए उठाए जाने के बाद राज्य के पास 5.37 लाख टन चावल अधिशेष बचा था। बाद में 2.26 लाख टन आंतरिक खपत में समाहित किया गया और 1.09 लाख टन 121 एकीकृत जनजातीय विकास एजेंसी (आईटीडीए) ब्लॉकों में वितरित किया गया। इसके बाद भी राज्य के पास 2.02 लाख टन चावल अधिशेष शेष है।
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मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी की अध्यक्षता में राज्य कैबिनेट ने हाल ही में नई फसल आने से पहले पुराने स्टॉक को निकालने के लिए एक लाख टन चावल खुले बाजार में नीलाम करने को मंजूरी दी है। इस नीलामी की जिम्मेदारी ओडिशा स्टेट सिविल सप्लाइज कॉरपोरेशन (ओएससीएससी) को दी गई है, जो एफसीआई के मूल्य निर्धारण ढांचे और परिचालन दिशानिर्देशों के अनुरूप प्रक्रिया पूरी करेगा।
अधिकारियों के अनुसार यह कदम भंडारण संकट से बचने, गुणवत्ता खराब होने के जोखिम को कम करने और प्रणाली में तरलता बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है। नीलामी प्रक्रिया से होने वाले संभावित वित्तीय नुकसान को राज्य सरकार स्वयं वहन करेगी। भंडार को तेजी से कम करने के लिए राज्य सरकार ने कल्याणकारी दायरे का भी बड़ा विस्तार किया है। एनएफएसए और एसएफएसएस के लाभार्थियों को प्रति व्यक्ति प्रति माह अतिरिक्त 5 किलोग्राम चावल मुफ्त देने का भी निर्णय लिया गया है। मौजूदा कोटे के साथ यह मिलकर प्रति व्यक्ति 10 किलो हो जाएगा।
इस खाद्य सुरक्षा कवच को हाल ही में स्वीकृत मुख्यमंत्री अन्नपूर्णा योजना (एमएपीवाई) के माध्यम से और विस्तार दिया जाएगा। इस योजना के तहत सार्वजनिक वितरण प्रणाली के 1 करोड़ से अधिक परिवारों सहित कुल 3.28 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को कवर किया जाएगा। इस कार्यक्रम का पैमाना कल्याण के साथ-साथ वित्तीय प्रतिबद्धता के लिहाज से भी बड़ा है। राज्य को इस पर सालाना करीब 8,813 करोड़ रुपये खर्च करने होंगे यानी लगभग 734 करोड़ रुपये प्रति माह, जो पूरी तरह राज्य के बजट से वहन किए जाएंगे। अधिकारियों का अनुमान है कि इस योजना के तहत हर महीने करीब 1.64 लाख टन चावल का वितरण होगा, जिससे अधिशेष स्टॉक की नियमित खपत सुनिश्चित होगी।