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ईरान-इजरायल तनाव से हिला फॉरेक्स मार्केट, एक ही दिन में 0.8% टूटकर 95.71 पर पहुंचा रुपया

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पश्चिम एशिया में दोबारा भड़की लड़ाई और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण सोमवार को रुपया डॉलर के मुकाबले 0.8% टूटकर 95.71 पर बंद हुआ

Last Updated- June 08, 2026 | 10:31 PM IST
Rupee vs Dollar
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

सोमवार को ईरान और इजरायल के बीच दोबारा भड़की लड़ाई के कारण अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आई। इसके चलते रुपये ने वह बढ़त गंवा दी जो शुक्रवार को विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए उठाए गए कदमों की बदौलत हासिल हुई थी। देसी शेयर बाजार में बिकवाली ने भी रुपये पर दबाव डाला। सोमवार को रुपया 95.71 प्रति डॉलर पर बंद हुआ जो पिछले बंद स्तर 94.94 प्रति डॉलर से 0.8 फीसदी कम है।

यह पिछले चार सप्ताह में सबसे बड़ी एक दिवसीय गिरावट रही। 2026 में रुपया डॉलर के मुकाबले 6.1 फीसदी टूट चुका है। सोमवार को वह एशिया की सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाली मुद्राओं में रहा।

शुक्रवार को सरकार और रिजर्व बैंक द्वारा विदेशी पोर्टफोलियो निवेश को बढ़ावा देने के लिए उठाए गए कदमों के बाद रुपये ने दो महीने में अपनी सबसे बड़ी एकदिवसीय बढ़त दर्ज की थी। लेकिन सोमवार को उसमें फिर गिरावट आ गई। बाजार प्रतिभागियों ने कहा कि पूंजी प्रवाह पैकेज से संबंधित आशावाद प्रतिकूल वैश्विक संकेतों से दब गया।

एचडीएफसी सिक्योरिटीज के शोध विश्लेषक दिलीप परमार ने कहा, ‘प​श्चिम ए​शिया में बढ़ते तनाव ने कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और अमेरिकी डॉलर की सुरक्षित निवेश मांग को बढ़ावा दिया जिससे भारतीय रुपया शुक्रवार के अधिकांश लाभ को गंवा बैठा।’ उन्होंने कहा, ‘इसके अलावा अमेरिकी नौकरियों के मजबूत आंकड़ों ने उम्मीदें जगा दी हैं कि एफओएमसी ब्याज दरें बढ़ा सकता है। इससे जोखिम लेने की इच्छा और कमजोर हुई और अमेरिकी डॉलर को मजबूती मिली। निकट भविष्य में हाजिर रुपया 94.50 से 96.50 के बीच टिकने की उम्मीद है।’

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच सोमवार को ब्रेंट वायदा तेजी में खुला और 4 फीसदी से अधिक उछलकर 96.86 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। एक समय यह 98 डॉलर प्रति बैरल तक चला गया था। इसी बीच अपेक्षा से बेहतर अमेरिकी श्रम बाजार आंकड़ों ने यह उम्मीद मजबूत की कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व इस वर्ष मौद्रिक नीति को और सख्त कर सकता है। इससे ट्रेजरी यील्ड्स बढ़ीं और डॉलर को मजबूती मिली। ऊंची अमेरिकी यील्ड्स आम तौर पर उभरते बाजारों की परिसंपत्तियों की आकर्षण शक्ति को कम करती हैं और रुपये जैसी मुद्राओं पर दबाव डालती हैं।

10 वर्ष के मानक अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड पिछले दिन के 3.89 फीसदी से बढ़कर 4.57 फीसदी हो गई। घरेलू इक्विटी भी दबाव में रही और बेंचमार्क सूचकांक एशियाई बाजारों में व्यापक गिरावट के बीच दो महीने के निचले स्तर पर आ गए। विदेशी निवेशकों की निकासी और जोखिम से बचाव ने स्थानीय मुद्रा पर अतिरिक्त दबाव डाला।

कारोबारियों ने कहा कि दिन की शुरुआत में डॉलर की बिकवाली ने रुपये को कुछ सहारा दिया लेकिन कॉरपोरेट डॉलर मांग और विदेशी पोर्टफोलियो निकासी ने उन्हें मात दे दी। एक सरकारी बैंक के डीलर ने कहा, ‘सुबह कुछ हस्तक्षेप हुआ था लेकिन बड़े पैमाने पर निकासी ने डॉलर खरीद को निष्फल कर दिया।’ पिछले एक वर्ष में रुपया डॉलर के मुकाबले 10.5 फीसदी गिर चुका है।

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First Published - June 8, 2026 | 10:31 PM IST

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