गिफ्ट सिटी में खुदरा निवेशकों द्वारा ग्लोबल ऐक्सेस प्लेटफॉर्म (गैप) के माध्यम से विदेश में सूचीबद्ध प्रतिभूतियों की खरीद-बिक्री के शुरुआती संकेत दिख रहे हैं। ये प्लेटफॉर्म इस तरह की ट्रेडिंग की सुविधा देते हैं। कई ब्रोकरों ने इंटरनैशनल फाइनैंशियल सर्विसेज सेंटर (आईएफएससी) में ऐसी सेवा शुरू करने में दिलचस्पी दिखाई है।
गिफ्ट सिटी में बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) की यूनिट इंडिया विक्स के आंकड़ों के मुताबिक गैप के जरिये वैश्विक एक्सचेंजों पर ट्रेड की गई वैल्यू चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में बढ़कर 1.93 अरब डॉलर हो गई जो पिछले वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में 96.36 करोड़ डॉलर थी। वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में इस तरह की खरीद-बिक्री का मूल्य 63.94 करोड़ डॉलर था।
खरीद-फरोख्त की कुल वैल्यू में से 1.5 अरब डॉलर का ट्रेड अमेरिका के एक्सचेंजों पर हुआ। इसके बाद दक्षिण कोरिया के एक्सचेंज पर 27.2 करोड़ डॉलर और जर्मनी के एक्सचेंज पर 4.37 करोड़ डॉलर का ट्रेड हुआ।
पिछले कुछ महीनों में दक्षिण कोरियाई बाजार में काफी उठापटक देखी गई है। इसके अलावा वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में ग्राहकों की संख्या बढ़कर 66,210 हो गई जो जनवरी-मार्च 2026 में 4,940 थी। वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में इनकी संख्या 584 थी। हालांकि ज्यादातर भागीदारी आईएफएससी स्थित संस्थागत इकाइयों से आ रहे हैं लेकिन भारत और विदेश में खुदरा निवेशक भी ऑफशोर इक्विटी, एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड और दूसरे उत्पादों में ट्रेड कर रहे हैं।
आईएफएससी इकाइयों की भागीदारी मुख्य रूप से डेरिवेटिव में है।आईएफएससीए ने पिछले साल अगस्त में गैप ढांचा पेश किया था, जिसके बाद कई कंपनियों ने अपनी सेवाएं शुरू कर दीं।
जानकारों का कहना है कि भले ही ज्यादातर वॉल्यूम अमेरिकी प्रतिभूतियों से आता है लेकिन दूसरे बाजारों की प्रतिभूतियों में भी दिलचस्पी बढ़ रही है।
एनएसई इंटरनैशनल एक्सचेंज का ग्लोबल ऐक्सेस प्लेटफॉर्म दो महीने में यूरोप और एशिया-प्रशांत की प्रतिभूतियां भी उपलब्ध करा सकता है। अभी यह अमेरिका में सूचीबद्ध प्रतिभूतियों की खरीद-बिक्री की सुविधा देता है।
इंटरनैशनल फाइनैंशियल सर्विसेज सेंटर अथॉरिटी (आईएफएससीए) के कार्यकारी निदेशक प्रदीप रामकृष्णन के अनुसार इस सेगमेंट में ट्रेडर और खुदरा निवेशक दोनों सक्रिय हैं और कई भारतीय और अंतरराष्ट्रीय भागीदारों ने गैप या ब्रोकरेज के लिए लाइसेंस हासिल किए हैं। उन्होंने बताया कि जून में 16 ब्रोकरों ने पंजीकरण कराया है।
तिमाही नतीजों के बाद शेयर ब्रोकर ग्रो के प्रबंधकों ने विश्लेषकों के साथ बातचीत में बताया कि वे अगले कुछ महीनों में गिफ्ट सिटी के माध्यम से अमेरिकी शेयरों की ट्रेडिंग की सुविधा देने की योजना बना रहे हैं। इस प्रमुख शेयर ब्रोकर को गिफ्ट-आईएफएससी में ब्रोकर-डीलर का लाइसेंस मिला है।
ग्रो के प्रबंधन ने कहा, ‘हम एक तरह से इस उत्पाद का परीक्षण कर रहे हैं और जल्द ही इसे पेश करेंगे। लेकिन यह बताना मुश्किल है कि यह ग्राहकों के लिए कब उपलब्ध होगा। हम अमेरिकी शेयरों के साथ शुरुआत करेंगे और अगर यह सफल रहा तो दूसरे देशों के शेयरों की मांग की भी थाह लेंगे। उसी के आधार पर हम इसे आगे बढ़ाएंगे।’
जीरोधा और अपस्टॉक्स जैसे कई अन्य ब्रोकरों ने भी गिफ्ट सिटी में पंजीकरण कराया है।
गिफ्ट सिटी में स्थित खुदरा निवेश ऐप बीलॉन्ग के मुख्य कार्याधिकारी और सह-संस्थापक अंकुर चौधरी ने कहा कि वैश्विक शेयरों में खुदरा निवेश बढ़ रहा है। कई कंपनियां गिफ्ट सिटी का रुख कर रही हैं। वे या तो खुद गैप (ग्लोबल ऐसेट प्रदाता) के तौर पर लाइसेंस ले रही हैं या फिर आईएफएससीए के साथ पंजीकृत गैप के लिए ब्रोकर के तौर पर काम कर रही हैं।
हालांकि कुछ भागीदारों का कहना है कि उदारीकृत धनप्रेषण योजना के तहत व्यक्तिगत सीमा एक चुनौती हो सकती है लेकिन चौधरी का मानना है कि असली दिक्कत 10 लाख रुपये से ज्यादा की रकम पर स्रोत पर कर संग्रह टीसीएस) के तौर पर लगने वाला 20 फीसदी कर है। उन्होंने कहा, ‘यह कोई अतिरिक्त कर नहीं है क्योंकि इसे भविष्य की कर देनदारियों में समायोजित किया जा सकता है लेकिन यह निवेश योग्य राशि पर काफी बोझ डालता है।’
चौधरी ने कहा कि अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर ब्रोकरेज आम तौर पर 0.25 फीसदी के आसपास होती है और इसकी ऊपरी सीमा भी ज्यादा होती है।
उन्होंने कहा, ‘इसके अलावा धन निकासी जैसे शुल्क भी होते हैं जो विभिन्न प्लेटफॉर्म पर अलग-अलग होते हैं। कुछ प्लेटफॉर्म कोई शुल्क नहीं लेते जबकि कुछ न्यूनतम निकासी राशि के आधार पर शुल्क लेते हैं। साथ ही मुद्रा विनिमय के लिए फॉरेक्स शुल्क भी वसूला जाता है जो कुछ मामलों में 0.8 से 1 फीसदी तक हो सकता है। हमारा मानना है कि एक तरह के शुल्क के बजाय कुल लागत ज्यादा मायने रखती है।’