गुरुवार को सोने की कीमतों में थोड़ी गिरावट आई। इसकी वजह फेडरल रिजर्व के नीति संबंधी सख्त संकेत और डॉलर का मजबूत होना था। वहीं, अमेरिका-ईरान के बीच शांति समझौते ने महंगाई की चिंताओं को कम किया और तेल की कीमतों में गिरावट ला दी।
सुबह 9:07 बजे तक हाजिर सोना 0.2 प्रतिशत गिरकर 4,249.16 डॉलर प्रति औंस पर था। पिछले हफ्ते कीमतें नवंबर 2025 के बाद अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई थीं। अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स 2.6 प्रतिशत गिरकर 4,268.40 डॉलर पर आ गया।
जैनर मेटल्स के उपाध्यक्ष और वरिष्ठ मेटल्स रणनीतिकार पीटर ग्रांट ने कहा, ‘सबसे अहम बात कल फेड का सख्त रुख था। इसकी वजह से डॉलर इस साल नए ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है, जिससे सोने पर कुछ दबाव बना हुआ है।’
फेड ने बुधवार को ब्याज दरों को स्थिर रखा, लेकिन 19 नीति निर्माताओं में से नौ का मानना है कि साल के अंत में दरों में वृद्धि की आवश्यकता होगी।
नीतिगत बयान के बाद अमेरिकी डॉलर की कीमत बढ़ी और यह अभी एक साल के सबसे ऊंचे स्तर पर है, जिससे विदेशी खरीदारों के लिए डॉलर में कीमत वाली कीमती धातुएं महंगी हो गई हैं।
सीएमई फेडवॉच टूल के अनुसार बाजार अब दिसंबर में अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने की 88 प्रतिशत संभावना मानकर चल रहे हैं। यह दर फेड के पॉलिसी स्टेटमेंट से पहले देखी गई 61 प्रतिशत संभावना से ज्यादा है। सोना आमतौर पर ज्यादा ब्याज दरों वाले माहौल में संघर्ष करता है। पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद से ही इसकी कीमतों पर दबाव बना हुआ है।