देश में इस वर्ष सरकारी गेहूं खरीद ने नया रिकॉर्ड स्थापित किया है। केंद्र सरकार ने गेहूं खरीद का लक्ष्य 355.4 लाख टन निर्धारित किया था, लेकिन 21 जून तक खरीद बढ़कर 357.6 लाख टन पहुंच गई। इससे लक्ष्य भी पार हो गया। यह पिछले वर्ष की समान अवधि में हुई 299.5 लाख टन खरीद की तुलना में लगभग 19 प्रतिशत अधिक है। बेहतर उत्पादन और व्यापक खरीद व्यवस्था के कारण इस बार किसानों से बड़ी मात्रा में गेहूं की खरीद संभव हो सकी।
इसका प्रमुख कारण गेहूं उत्पादन में वृद्धि है। कृषि मंत्रालय के अनुमान के अनुसार वर्ष 2025-26 में देश का गेहूं उत्पादन रिकॉर्ड 1206.6 लाख टन तक पहुंच सकता है, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 2.3 प्रतिशत अधिक है। उत्पादन बढ़ने के मद्देनजर सरकार ने खरीद लक्ष्य को चरणबद्ध तरीके से बढ़ाया। पहले इसे 303 लाख टन से बढ़ाकर 345 लाख टन किया गया और बाद में राज्यों की मांग को देखते हुए इसे 355.4 लाख टन कर दिया गया।
राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और बिहार जैसे राज्यों में खरीद अभियान काफी सफल रहा। राजस्थान में रिकॉर्ड स्तर पर 27.1 लाख टन गेहूं खरीदा गया। उत्तर प्रदेश में सरकारी खरीद 21.6 लाख टन तक पहुंच गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में दोगुने से अधिक है। बिहार में भी खरीद बढ़कर 40,364 टन हो गई, जो पिछले साल के मुकाबले दोगुने से अधिक है।
इसमें पंजाब और मध्य प्रदेश का योगदान सबसे महत्त्वपूर्ण रहा। पंजाब में 121.6 लाख टन गेहूं की खरीद हुई जबकि मध्य प्रदेश में 104.4 लाख टन गेहूं खरीदा गया।