facebookmetapixel
Advertisement
पश्चिम एशिया संकट की मार: लुधियाना का हैंडटूल कारोबार ठप, न मजदूर मिल रहे, न गैस; निर्यातक बैचेनएयरपोर्ट पर इमिग्रेशन की लंबी लाइनों से हो जाते हैं परेशान? ‘ई-गेट्स’ से कुछ ही सेकंड में ऐसे मिलेगी क्लियरेंस!Market Outlook: ईरान-अमेरिका वार्ता बेनतीजा, कच्चे तेल की कीमतें तय करेंगी इस हफ्ते की दिशाExplainer: जेडी वेंस का बिना समझौते किए इस्लामाबाद से वापस लौटने के बाद अब आगे क्या होगा?NSE IPO: ₹20 हजार करोड़ का मेगा इश्यू में लगाना चाहते हैं पैसा? जानें क्यों हर निवेशक नहीं है एलिजिबलAsha Bhosle Passes Away: 12,000 गानों की आवाज खामोश! नहीं रहीं आशा भोसले, 92 साल की उम्र में निधनMCap: शेयर बाजार में तूफानी तेजी! टॉप 8 कंपनियों की वैल्यू 4.13 लाख करोड़ बढ़ी, HDFC Bank सबसे आगेTCS का बड़ा हायरिंग ब्लास्ट! FY27 में 25,000 फ्रेशर्स को ऑफर, लेकिन आगे की भर्ती पर CEO ने डिमांड को बताया गेमचेंजरअमरावती को बड़ा फंडिंग बूस्ट! वर्ल्ड बैंक ने जारी किए $340 मिलियन, अप्रैल में और $150 मिलियन मिलने की उम्मीदFPI का भरोसा टूटा! अप्रैल के 10 दिन में ₹48,213 करोड़ की निकासी, क्या निवेशकों के लिए खतरे की घंटी?

सोने की कीमतों में कोहराम: रिकॉर्ड स्तर से 22% लुढ़का सोना, क्या ब्याज दरों का डर खा रहा है चमक?

Advertisement

पश्चिम एशिया युद्ध के कारण बढ़ती मुद्रास्फीति और उच्च ब्याज दरों की आशंका ने सोने की कीमतों को रिकॉर्ड स्तर से 22% नीचे धकेल दिया है

Last Updated- March 24, 2026 | 11:09 PM IST
Gold and silver rate today
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के चलते मंगलवार को सोने की कीमतों में गिरावट जारी रही। इस तनाव ने मुद्रास्फीति की आशंकाओं और वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों में वृद्धि की संभावना को हवा दी। हाजिर सोने की कीमत सुबह 0.6 फीसदी गिरकर 4,377.93 डॉलर प्रति औंस पर आ गई, जबकि पिछले सत्र में यह नवंबर के बाद के अपने सबसे निचले स्तर 4,097.99 डॉलर पर पहुंच गई थी।

अप्रैल डिलिवरी के लिए अमेरिकी सोने के वायदा भाव में 0.6 फीसदी की गिरावट आई और यह 4,378.80 डॉलर पर पहुंच गया। टीडी सिक्योरिटीज के कमोडिटी रणनीति के वैश्विक प्रमुख बार्ट मेलेक ने कहा, अगर युद्ध जारी रहता है और ऊर्जा की कीमतें लगातार बढ़ती रहती हैं तो यह सोने के लिए अच्छी खबर नहीं है।

उन्होंने कहा, दूसरी तिमाही में सोने पर दबाव रहने वाला है, लेकिन मुझे लगता है कि साल के अंत तक सोने को लेकर दृष्टिकोण फिर से काफी अच्छा दिखेगा क्योंकि हमें उम्मीद है कि तब तक फेड जैसे केंद्रीय बैंकों को ज्यादा आजादी मिलेगी और हम डॉलर में नरमी और ब्याज दरों में गिरावट देख सकते हैं। सोने को एक सुरक्षित निवेश और मुद्रास्फीति से बचाव का साधन माना जाता है, लेकिन ब्याज न मिलने के कारण उच्च ब्याज दर वाले माहौल में इसका आकर्षण कम हो जाता है। 

इस युद्ध के कारण होर्मुज स्ट्रेट से होकर दुनिया के करीब 20 फीसदी तेल और एलपीजी का परिवहन प्रभावी रूप से रुक गया है, जिससे ऊर्जा की कीमतें बढ़ गई हैं और मुद्रास्फीति की चिंता में इजाफा हुआ है। इसके बाद, अग्रणी केंद्रीय बैंकों ने युद्ध के कारण कीमतों में व्यापक वृद्धि होने की स्थिति में कार्रवाई करने की अपनी तत्परता पर जोर दिया है।

हाजिर सोने की कीमत 29 जनवरी के 5,594.82 डॉलर के अपने रिकॉर्ड स्तर से करीब 22 फीसदी गिर गई है। कॉमर्जृबैंक के विश्लेषकों ने एक नोट में कहा, कीमत में हालिया गिरावट साल की शुरुआत में हुई भारी वृद्धि की तरह ही एक जरूरत से ज्यादा प्रतिक्रिया वाली लग रही है। एक तरह से सोने के लिए स्थिति एक चरम से दूसरे चरम पर पहुंच गई है। अन्य धातुओं में, हाजिर चांदी 1.3 फीसदी गिरकर 68.20 डॉलर पर आ गई, प्लैटिनम 0.2 फीसदी बढ़कर 1,885.18 डॉलर पर पहुंच गया जबकि पैलेडियम 2.9 फीसदी गिरकर 1,392.25 डॉलर पर आ गया।

Advertisement
First Published - March 24, 2026 | 11:04 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement