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सोना-चांदी के बाद अब तेल की बारी! कीमतों में बड़ी तेजी के संकेत

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गोल्ड-क्रूड रेशियो में गिरावट से तेल की कीमतों में बड़ी तेजी संभव, अपूर्वा शेठ ने जताई 113 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने की संभावना

Last Updated- March 09, 2026 | 8:49 AM IST
crude oil price

Crude Oil Price Hike: लंबे समय तक सीमित दायरे में रहने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में फिर मजबूती के संकेत दिखाई देने लगे हैं। फिलहाल कच्चे तेल की कीमत करीब 82 से 91 डॉलर प्रति बैरल के बीच चल रही है। सैमको सिक्योरिटीज की हेड ऑफ मार्केट पर्सपेक्टिव्स एंड रिसर्च अपूर्वा शेठ के मुताबिक यह उस लंबे दौर के बाद आई रिकवरी है जब तेल की कीमतें काफी समय तक एक दायरे में ही कारोबार कर रही थीं।

कमोडिटी बाजार में बदल रहा ट्रेंड

अपूर्वा शेठ के अनुसार कमोडिटी बाजार में आम तौर पर अलग-अलग चरणों में अलग-अलग सेक्टर आगे रहते हैं। मौजूदा चक्र में पहले कीमती धातुएं आगे रहीं। वैश्विक अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव के बीच सोने की कीमतों में तेज उछाल आया था। इसके बाद औद्योगिक मांग बढ़ने की उम्मीदों के कारण चांदी की कीमतों में भी तेजी देखने को मिली। उनका मानना है कि सोना और चांदी में बड़ी तेजी आने के बाद अब कमोडिटी बाजार का फोकस धीरे-धीरे ऊर्जा सेक्टर यानी कच्चे तेल की ओर जाता दिख रहा है।

अमेरिका–ईरान तनाव से सप्लाई की चिंता

अपूर्वा शेठ का कहना है कि मौजूदा समय में अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा संघर्ष तेल बाजार के लिए बड़ा जोखिम बन गया है। इस युद्ध ने ऊर्जा बाजार को अस्थिर कर दिया है और तेल सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है। खासतौर पर स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज को लेकर जोखिम बढ़ गया है, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। दुनिया की कुल तेल सप्लाई का लगभग 20% हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है, इसलिए यहां किसी भी तनाव का सीधा असर तेल की कीमतों पर पड़ता है।

Crude Oil Price: तकनीकी संकेत दे रहे हैं तेजी के संकेत

शेठ के मुताबिक हालिया कीमतों की चाल भी तेजी के संकेत दे रही है। कच्चा तेल 77.5 डॉलर के स्तर से ऊपर बना हुआ है, जो जून 2025 का हाई था। कीमत इस स्तर से ऊपर लगातार टिक रही है और हाल ही में इसमें तेज उछाल भी देखने को मिला है। उनके अनुसार आने वाले समय में कच्चे तेल के लिए अगला प्रमुख रेजिस्टेंस 87 डॉलर पर हो सकता है और उसके बाद कीमत 101 से 113 डॉलर प्रति बैरल के दायरे तक पहुंच सकती है। 100 डॉलर का स्तर बाजार के लिए मनोवैज्ञानिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

Crude Oil Price Hike: गोल्ड–क्रूड अनुपात भी दे रहा संकेत

अपूर्वा शेठ के अनुसार कमोडिटी बाजार की दिशा समझने के लिए गोल्ड–क्रूड ऑयल रेशियो भी एक महत्वपूर्ण संकेतक है। यह बताता है कि एक औंस सोना खरीदने के लिए कितने बैरल तेल की जरूरत होती है। फिलहाल यह अनुपात करीब 56 के आसपास है, जबकि पहले यह 82 तक पहुंच गया था। उनका मानना है कि इतना ऊंचा अनुपात लंबे समय तक नहीं रहता और समय के साथ सामान्य स्तर पर लौट आता है। अगर यह अनुपात करीब 45 तक आता है और सोने की कीमतें स्थिर रहती हैं, तो गणित के हिसाब से कच्चे तेल की कीमत 113 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती है।

निफ्टी पर पड़ सकता है असर

भारत दुनिया के बड़े तेल आयातकों में से एक है, इसलिए जब तेल महंगा होता है तो देश का आयात बिल बढ़ता है, महंगाई का दबाव बढ़ता है और बाजार की धारणा कमजोर पड़ सकती है।

वह कहती हैं, तकनीकी रूप से निफ्टी को 26,200 से 26,300 के स्तर के पास मजबूत रेजिस्टेंस मिल रहा है, जहां से कई बार ऊपर जाने की कोशिश असफल रही है। वहीं नीचे की ओर 24,500 एक अहम सपोर्ट स्तर है। उनका कहना है कि अगर निफ्टी इस स्तर से नीचे जाता है तो बाजार की संरचना कमजोर हो सकती है और ऐसे में अगला बड़ा सपोर्ट लगभग 21,500 के आसपास दिखाई दे सकता है। उनके मुताबिक अगर कच्चे तेल की कीमत 101 डॉलर से ऊपर जाती है तो ऊंची ऊर्जा कीमतों का दबाव भारतीय शेयर बाजार पर बना रह सकता है।

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First Published - March 9, 2026 | 8:49 AM IST

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