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आगाज में दिखा मस्त अंदाज

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Last Updated- December 07, 2022 | 7:05 PM IST

शुक्रवार सुबह वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने नैशनल स्टॉक एक्सचेंज में करेंसी फ्यूचर कारोबार का जैसे ही आगाज किया, कारोबारी डॉलर की मतवाली चाल से मोटा मुनाफा काटने में जुट गए।


इसका असर भी दिखने लगा क्योंकि शुरुआती कुछ मिनटों में ही करीब 5000 लॉट का कारोबार हुआ। उस समय एक डॉलर 44.15 रुपये का मिल रहा था। और तो और शाम होते होते अगर एनएसई में कुल 65742 सौदे दर्ज किए गए।

कारोबारियों का सबसे ज्यादा झुकाव सितंबर कॉन्ट्रैक्ट पर रहा, जहां 42900 से ज्यादा सौदे हुए। अगर रकम के लिहाज से देखी जाए तो यह आंकड़ा करीब 1.89 अरब रुपये का बैठता है। अलंकित असाइनमेंट के ट्रेडिंग मैनेजर सुनील कुमार सैनी ने बताया कि उनका ब्रोकरेज हाउस अपने क्लाइंट की तरफ से करीब 5 करोड़ रुपये का सौदा करने में कामयाब रहा।

दूसरे ब्रोकरेज हाउस की स्थिति कमोबेश ऐसी ही थी। अंतर इतना ही है कि कारोबार कहीं कम तो कहीं ज्यादा हुआ। सैनी ने कहा कि शुरुआती दौर में उनके ब्रोकरेज हाउस के जरिए फ्यूचर का कारोबार करने वाले क्लाइंट ही मूल रूप से करेंसी फ्यूचर से जुड़े हैं।

वैसे विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक निवेशकों को इस बाबत प्रशिक्षण नहीं मिलेगा तब तक वे इसमें संजीदगी से भागीदारी नहीं कर पाएंगे। कुछ अन्य शहरों के डीलर्स ने बताया कि शुक्रवार को करेंसी फ्यूचर में बैंक और बड़े कॉरपोरेट घरानों ने खासी दिलचस्पी दिखाई। निवेशकों की सबसे ज्यादा दिलचस्पी सितंबर कॉन्ट्रैक्ट में रही। इसके बाद अगस्त 2009 का कॉन्ट्रैक्ट अव्वल रहा, जिसमें करीब 15000 सौदे हुए।

ब्रोकरेज हाउस इंडिया बुल्स के असिस्टेंट वाइस प्रेजिडेंट संजय सिंह ने कहा कि आज से शुरू हुए करेंसी फ्यूचर को बाजार ने हाथों हाथ लिया। हालांकि कुछ कागजी खानापूरी लंबित होने की वजह से इंडिया बुल्स के ज्यादातर क्लाइंट इस कारोबार में भागीदारी नहीं कर पाए।

वैसे बाजार से जुड़े विशेषज्ञों का तो यहां तक कहना है कि आने वाले दिनों में करेंसी फ्यूचर निफ्टी इंडेक्स से ज्यादा लोकप्रिय होने का माद्दा रखता है। उनका ये भी कहना है कि अगर फ्यूचर करेंसी का बाजार रफ्तार पकड़ता है तो आने वाले दिनों में भारत रुपये की पूर्ण परिवर्तनीयता की तरफ निश्चित रूप से बढ़ेगा।

क्या है मुद्रा वायदा?

किसी भी मान्यता प्राप्त एक्सचेंज में किसी होने वाला यह कारोबार स्टॉक फ्यूचर या निफ्टी फ्यूचर की तरह है। फर्क सिर्फ इतना है कि करेंसी फ्यूचर में शेयर की जगह डॉलर पर बोली लगाई जाती है। इसकी कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव के हिसाब से किसी निवेशक की लाभ-हानि का आकलन होता। दूसरे शब्दों में कहें तो निर्धारित दर पर भविष्य की किसी तारीख को डॉलर की खरीद-बिक्री ही करेंसी फ्यूचर ट्रेडिंग कहलाती है।

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First Published - August 29, 2008 | 11:24 PM IST

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