श्रम और रोजगार मंत्रालय नई पेंशन योजना पर विचार कर रहा है। इसके तहत सेवानिवृत्ति के लिए बचत करने के इच्छुक कर्मचारी और कामगार जब चाहें रकम जमा कर सकेंगे। जानकारों के मुताबिक नई योजना नियमित अवधि पर अंशदान वाले मौजूदा पेंशन मॉडल से एकदम अलग है।
प्रस्तावित योजना को यूनिफाइड पेंशन स्कीम कहा गया है और इसे चलाने की जिम्मेदारी कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) को दी जा सकती है। यह योजना औपचारिक और अनौपचारिक क्षेत्रों में काम करने वाले सभी कामगारों के लिए होगी। यह प्रस्ताव केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए पेंशन फंड नियामकीय एवं विकास प्राधिकरण द्वारा चलाई जा रही ‘यूनिफाइड पेंशन स्कीम’ से अलग है।
प्रस्तावित योजना ईपीएफओ को सौंपे जाने की बात चल रही है और इसे सभी कामगारों के लिए यूनिवर्सल पेंशन प्लेटफॉर्म माना गया है। वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा, ‘सार्वभौमिक पेंशन योजना के रूप में इसकी कल्पना की जा रही है और कोई भी कामगार इसका सदस्य बन सकता है। पहले से चल रही योजनाओं के उलट इसमें अंशदान नियोक्ता के जरिये नहीं होगा बल्कि कर्मचारी खुद कर सकेगा। अधिकारी के अनुसार अंशदान में लचीलापन ही इस योजना की मुख्य विशेषता होगी। इसमें सदस्य के पास जब भी ज्यादा रकम आए, वे इसमें जमा कर सकते हैं। इसमें हर महीने, हर तिमाही या सालाना रकम जमा कराने की कोई शर्त नहीं होगी।
अधिकारी ने कहा, ‘मौजूदा पेंशन योजनाओं में सबसे बड़ी चुनौती तय अवधि पर अंशदान करना है। अनौपचारिक क्षेत्र में कामगारों के पास नियमित आय नहीं होती है। नई योजना में जब भी व्यक्ति के पास अतिरिक्त रकम होगी, वह जमा कर देगा।’ इस कदम के जरिये सरकार संगठित श्रमबल के दायरे का विस्तार करना चाहती है।
चूंकि कर्मचारी भविष्य योजना (ईपीएस) प्राथमिक तौर पर संगठित क्षेत्र के वेतनभोगी कर्मचारियों की जरूरतें पूरी करती है, इसलिए भारत के श्रमबल का बड़ा हिस्सा संस्थागत रिटायरमेंट बचत से बाहर रहता है। इस सिलसिले में श्रम मंत्रालय को सवाल भेजे गए थे, लेकिन खबर लिखे जाने तक जवाब नहीं मिला।
प्रस्ताव के तहत प्रत्येक सदस्य के पास ईपीएफओ के तहत इस्तेमाल होने वाले यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (यूएएन) की तरह यूनीक क्रमांक होगा। पेंशन खाता इसी से जुड़ा होगा। इससे कामगार मौका मिलने पर अंशदान जारी रख सकता है, चाहे उसके पास रोजगार हो या नहीं। कई वित्तीय योजनाओं में लंबे समय तक आर्थिक गतिविधि नहीं होने पर खाता निष्क्रिय कर दिया जाता है मगर इस योजना में लंबे समय तक अंशदान नहीं होने पर भी खाता चलता रहेगा। अधिकारियों ने बताया कि इसके ग्राहकों का अलग से नामांकन होगा और अलग पहचान एवं क्यूआर कोड होगा।
प्रस्तावित पेंशन योजना के तहत मिलने वाला रिटर्न सरकार की ओर से ईपीएफ जमा के लिए हर साल घोषित की जाने वाली ब्याज दर से जुड़ा हो सकता है। सरकार सेवानिवृत्ति के समय भुगतान के कई विकल्पों पर भी विचार कर रही है। जब कोई सदस्य 60 साल का हो जाएगा तो उसे जमा हुई रकम का कुछ हिस्सा एकमुश्त निकालने या एन्युटी चुनने की इजाजत दी जा सकती है। इससे उसे तय समय (जैसे 10 या 15 साल) तक समय-समय पर भुगतान मिलता रहे। हालांकि, अधिकारियों ने संकेत दिया है कि पैसे निकालने के नियमों में कुछ पाबंदियां भी होंगी। इससे यह तय हो सकेगा कि बचत का कुछ हिस्सा सेवानिवृत्ति के बाद की आय के लिए सुरक्षित रहे।