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शेयर बाजार में नया गणित! Closing Auction से क्यों बदल रहे हैं Sensex-Nifty के क्लोजिंग आंकड़े

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क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम लागू होने के बाद लगातार तीसरे दिन सेंसेक्स और निफ्टी के क्लोजिंग स्तर में अंतर दिखा, हालांकि यह पहले से थोड़ा कम रहा।

Last Updated- August 06, 2026 | 8:53 AM IST
Stock Market
Representative image

क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (सीएएस) शुरू होने के बाद लगातार तीसरे दिन बुधवार को मानक सूचकांकों बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी के बीच अंतर कायम रहा। सीएएस का इस्तेमाल डेरिवेटिव अनुबंध वाले शेयरों के बंद बाजार भाव की गणना के लिए किया जाता है। दोनों सूचकांकों के बीच लगभग 0.15 प्रतिशत अंक का अंतर देखा गया। निफ्टी बुधवार को 10 अंक या 0.04 प्रतिशत की बढ़त के साथ 24,625 पर बंद हुआ। सेंसेक्स भी 152 अंक या 0.2 प्रतिशत की बढ़त के साथ 78,581 पर बंद हुआ।

अपराह्न सवा तीन बजे निफ्टी 0.18 प्रतिशत नीचे कारोबार कर रहा था मगर क्लोजिंग ऑक्शन के दौरान इसमें 0.22 प्रतिशत अंक की तेजी आई। सेंसेक्स भी उस समय 0.09 प्रतिशत ऊपर था और ऑक्शन के दौरान इसमें 0.10 प्रतिशत अंक की और बढ़त हुई। सीएएस के तहत बंद भाव अपराह्न 3.15 बजे से 3.35 बजे के बीच होने वाली नीलामी से तय होती है।

यह प्रणाली बंद भाव तय करने के पुराने तरीके की जगह लाई गई है जिसमें कारोबारी सत्र के आखिरी 30 मिनट में हुए कारोबार की मात्रा के वॉल्यूम-वेटेड एवरेज प्राइस का इस्तेमाल किया जाता था। वॉल्यूम-वेटेड एवरेज प्राइस किसी शेयर की औसत कीमत को उस दौरान हुए कुल कारोबार के आधार पर तय करता है। जिन शेयरों में वायदा और विकल्प अनुबंध नहीं होते उनमें पुराना तरीका ही इस्तेमाल होता है।

इस पूरे मामले पर नाम नहीं छापने की शर्त पर एक ब्रोकर ने कहा,‘बुधवार को सेंसेक्स और निफ्टी के बीच का अंतर कम हुआ क्योंकि कारोबारियों ने दोनों बाजारों के बीच कीमतों में अंतर का फायदा उठाने की कोशिश की।’

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First Published - August 6, 2026 | 8:53 AM IST

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