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बाजार में अनुपालन लागत कम करने की तैयारी, सेबी करेगा नियमों की समीक्षा

पांडेय ने कहा कि वित्तीय स्थायित्व और विकास परिषद (एफएसडीसी) के स्तर पर सरलीकरण और लागत-प्रभाव विश्लेषण के मुद्दों पर भी चर्चा की गई है।

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खुशबू तिवारी   
Last Updated- February 12, 2026 | 9:58 PM IST

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने गुरुवार को कहा कि समूचे बाजार तंत्र में नियामकीय लागत घटाने के लिए सेबी कई उपायों पर विचार कर रहा है। इनमें नियामकीय अध्ययन केंद्र की स्थापना, आर्थिक और नीति विश्लेषण विभाग (डीईपीए) के तहत समर्पित इकाई बनाना और नियमनों के प्रभाव का आकलन करने के लिए बाहरी विशेषज्ञों की समिति का गठन शामिल है।

पांडेय ने छठे एनआईएसएम-सेबी सालाना अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान सम्मेलन के दौरान कहा, पूंजी की लागत महत्त्वपूर्ण होती है और इसे कम किया जाना चाहिए। सभी उत्पादक क्षेत्रों की वित्त तक पहुंच होनी चाहिए, जिसमें न केवल उपलब्धता बल्कि लागत भी शामिल है। हमारे सभी उपायों में लागत दक्षता अहम है। अगर आपको प्रतिस्पर्धा की क्षमता का निर्माण करना है तो जाहिर है कि अगर नियमों के अनुपालन का बोझ लागत और समय के लिहाज से बहुत अधिक है तो प्रतिस्पर्धा क्षमता भी उतनी ही कम हो जाती है।

जनवरी में बाजार नियामक ने नियमनों की थीमेटिक समीक्षा के लिए पांच सदस्यों की बाह्य विशेषज्ञ सलाहकार समिति (ईईएसी) का गठन किया था जिसकी अध्यक्षता मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन कर रहे हैं। अन्य सदस्यों में नियामकीय विशेषज्ञ और सेबी के पूर्व अधिकारी शामिल हैं। समिति को दक्षता, अनुपालन बोझ, प्रभाव और लागत-लाभ के मापदंडों पर नियमनों के मूल्यांकन का कार्य सौंपा गया है।

पांडेय ने कहा कि वित्तीय स्थायित्व और विकास परिषद (एफएसडीसी) के स्तर पर सरलीकरण और लागत-प्रभाव विश्लेषण के मुद्दों पर भी चर्चा की गई है। उन्होंने कहा, एफएसडीसी के माध्यम से अंतर-नियामकीय समन्वय स्थापित किया गया है। वे डेटा एकत्र करने, अनुसंधान को बढ़ावा देने और फिर वित्त तक पहुंच में सुधार करने और लागत कम करने के तरीकों पर विचार कर रहे हैं। इसमें विभिन्न नियामक शामिल हैं।

पांडेय ने कहा कि सेबी अन्य नियामकों के साथ समन्वय में पेंशन, राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस), बीमा और बैंकिंग जैसे क्षेत्रों को कवर करते हुए वित्तीय परिसंपत्तियों का एक समेकित विवरण प्रदान करने के लिए भी चर्चा कर रहा हैअपने संबोधन में सेबी प्रमुख ने व्यावहारिक वित्त, प्रौद्योगिकी जोखिमों और शासन ढांचों के क्षेत्र में भारत-विशिष्ट शोधों की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा, हमें यह समझने की आवश्यकता है कि प्रौद्योगिकी व्यवहार, प्रोत्साहन और परिणामों को कैसे बदलती है। नवाचार के साथ-साथ समझ भी होनी चाहिए। अन्यथा, गति सुरक्षा को पीछे छोड़ सकती है।

उन्होंने आर्टिफिशल इंटेलिजेंस मॉडलों से उत्पन्न होने वाले जोखिमों के प्रति भी आगाह किया, जिनमें फीडबैक लूप, अस्पष्टता और बड़े पैमाने पर त्रुटियों को बढ़ाने की क्षमता शामिल है। पांडेय ने कहा, ये सैद्धांतिक चिंताएं नहीं हैं। ये वास्तविक हैं और बढ़ती जा रही हैं। यहीं पर शोध अपरिहार्य हो जाता है। हमें डिजिटल वातावरण में बाजार की सूक्ष्म संरचना पर गहन अध्ययन की आवश्यकता है। हमें एआई-संचालित जोखिमों पर अध्ययन करने की जरूरत है।

First Published : February 12, 2026 | 9:50 PM IST