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ईसीएल नियमों से बैंकिंग सेक्टर पर दबाव, पीएसयू और मझोले निजी बैंक होंगे सबसे ज्यादा प्रभावित

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ईसीएल ढांचे के तहत बैंकों को क्रेडिट जोखिम के आधार पर ऋणों को विभिन्न चरणों में वर्गीकृत करने की आवश्यकता होगी।

Last Updated- April 29, 2026 | 9:15 AM IST
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भारतीय रिजर्व बैंक के अपेक्षित ऋण नुकसान (ईसीएल) पर जारी अंतिम दिशानिर्देश से विशेष रूप से असुरक्षित खुदरा, एमएसएमई और कॉरपोरेट ऋण के लिए अधिक अपफ्रंट प्रॉविजनिंग करने की जरूरत पड़ेगी। यह दिशानिर्देश पिछले साल अक्टूबर में जारी मसौदा दिशानिर्देशों के अनुरूप है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इसका असर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और मझोले दर्जे के प्राइवेट बैंकों पर अधिक नजर आएगा, जबकि बड़े प्राइवेट बैंक इन बदलावों को संभालने के हिसाब से बेहतर स्थिति में हैं।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि 4 वर्षों में 60 से 80 आधार अंकों का पूंजी प्रभाव पड़ेगा। साथ ही मुनाफे में 50,000-60,000 करोड़ रुपये की कमी आएगी। यह मानदंड 1 अप्रैल 2027 से प्रभावी होंगे।

दिशानिर्देश जारी होने के बाद बैंकिंग शेयरों में ज्यादातर गिरावट देखी गई। अधिकांश प्रमुख ऋणदाताओं को नुकसान हुआ, क्योंकि ब्रोकरेज फर्मों ने सलाह दी है कि बैंकों को नए दिशानिर्देशों के आधार पर प्रावधान बढ़ाने पड़ सकते हैं, जिससे उनकी पूंजी और मुनाफे में कमी आएगी। निफ्टी बैंक सूचकांक 1.5 प्रतिशत गिरकर 55,400.35 पर बंद हुआ, जबकि व्यापक बाजार में 0.40 प्रतिशत गिरावट आई है।

ईसीएल ढांचे के तहत बैंकों को क्रेडिट जोखिम के आधार पर ऋणों को विभिन्न चरणों में वर्गीकृत करने की आवश्यकता होगी। विवेकपूर्ण ईसीएल फ्लोर से संकेत मिलते हैं कि स्टेज-1 की संपत्तियों (0-30 दिन अतिदेय) के लिए प्रावधान, मानक संपत्तियों के लिए मौजूदा मानदंडों के साथ मोटे तौर पर तालमेल बनाए रहेगा, सिर्फ असुरक्षित खुदरा ऋणों में प्रावधान 0.4 प्रतिशत से बढ़कर 1 प्रतिशत हो जाएगा और निर्माण के चरण वाली वाणिज्यिक अचल संपत्ति के लिए प्रावधान 1 प्रतिशत से बढ़कर 1.25 प्रतिशत हो जाएगा।

स्टेज-2 संपत्तियों (30-90 दिन अतिदेय) के लिए प्रावधान जरूरतें अधिकांश ऋण श्रेणियों के लिए लगभग 5 प्रतिशत तक बढ़ जाएंगी, जबकि वर्तमान में यह 0.4 प्रतिशत है। स्टेज-3 (90+ दिन अतिदेय) में प्रावधान जरूरतें और बढ़ेंगी, जिसमें डिफॉल्ट में समय मौजूदा मानदंडों के साथ मोटे तौर पर समान रहता है।

यह ढांचा ट्रांजिशन राहत भी प्रदान कर रहा है, जिससे 1 अप्रैल, 2027 तक ईसीएल प्रावधानों और 31 मार्च, 2027 तक रखे गए प्रावधानों के बीच के अंतर को वित्त वर्ष 2028 से 2031 तक कॉमन इक्विटी टियर-1 पूंजी में चार साल की अवधि में चरणबद्ध तरीके से समायोजित किया जा सकेगा, जिससे बैंकों को असर से निपटने के लिए 4 साल का वक्त मिलेगा।

नोमुरा के विश्लेषकों ने एक रिपोर्ट में कहा, ‘ईसीएल मानदंडों के कार्यान्वयन से विशेष रूप से असुरक्षित खुदरा, एमएसएमई और कॉर्पोरेट एक्सपोजर में उच्च अपफ्रंट प्रॉविजनिंग होगा।’ उन्होंने आगे कहा, ‘पीएसयू और मझोले दर्जे के बैंकों पर प्रभाव अधिक होगा। कई सरकारी बैंकों ने बताया है कि एक बार का प्रावधान प्रभाव नेटवर्थ को 3 से 9 प्रतिशत तक प्रभावित कर सकता है। हमारे विचार में बड़े निजी बैंक बेहतर स्थिति में हैं, क्योंकि नेटवर्थ के लगभग 2 से 4 प्रतिशत प्रॉविजन बफर्स के कारण इसका असर कम होगा।’

नोमूरा के अनुसार सरकारी ऋणदाताओं में बैंक ऑफ बड़ौदा, केनरा बैंक और पंजाब नैशनल बैंक पर क्रमशः 65 आधार अंक, 124 आधार अंक और 108 आधार अंक के एक बार के सीईटी-1 प्रभाव पड़ सकता है। साथ ही नेटवर्थ में उल्लेखनीय कमी भी आएगी।

इसके विपरीत एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और ऐक्सिस बैंक जैसे बड़े निजी क्षेत्र के बैंक मजबूत पूंजी बफर्स द्वारा समर्थित हैं और काफी हद तक अप्रभावित दिखाई देते हैं। इंडसइंड बैंक पर 128 आधार अंकों का उच्च प्रभाव पड़ सकता है, जबकि कोटक महिंद्रा बैंक पर सीमित असर पड़ने की संभावना है।

मैक्वायर रिसर्च के वित्तीय सेवा अनुसंधान के एमडी और हेड सुरेश गणपथी ने कहा, ‘रिजर्व बैंक ने इसे लागू करने में देरी से इनकार कर दिया है, और नए मानदंड 1 अप्रैल 2027 से प्रभावी हैं। बैंकों को इसे एक बार के संक्रमण के रूप में अपने रिजर्व के माध्यम से समायोजित करने की अनुमति है, लेकिन प्रवाह प्रभाव, जो अतिदेय ऋणों (90 दिनों से कम अतिदेय) के लिए वार्षिक दर वृद्धि होगी, पीऐंडएल के माध्यम से प्रवाहित होगा।’

पंजाब ऐंड सिंध बैंक के एमडी और सीईओ स्वरूप साहा ने कहा, ‘हालांकि हमें सटीक प्रभाव का अनुमान लगाने के लिए जून तक इंतजार करना होगा, लेकिन अभी हमने जो गणना की है, हमारे ऊपर बहुत असर नजर नहीं आ रहा है। मुझे यह कोई बड़ी चुनौती नहीं लगती।’

बंधन बैंक ने परिणाम की घोषणा के दौरान कहा कि उसे भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा जारी नए ईसीएल दिशानिर्देशों से लगभग 1,250 करोड़ रुपये के प्रभाव की उम्मीद है। यदि इसे 5 वर्षों में बांटा जाता है, तो वार्षिक प्रभाव लगभग 250 करोड़ रुपये होगा।

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First Published - April 29, 2026 | 9:15 AM IST

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