देश की कंपनियां मोबाइल फोन विनिर्माण योजना (एमपीएमएस) के तहत पात्रता के लिए आवेदन करने की योजना बना रही हैं। इन कंपनियों में डिक्सन टेक्नॉलजीज (इंडिया), 12,000 करोड़ रुपये से अधिक वाली अंबर एंटरप्राइजेज इंडिया, लावा इंटरनैशनल तथा प्लस (4जी) और नोवा (5जी) जैसे एआई प्लस किफायती स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनी नेक्स्टक्वांटम शिफ्ट टेक्नॉलजीज (नेक्स्टक्यूएसटी) शामिल हैं। इस योजना के नियम पिछले सप्ताह जारी किए गए थे। इसका 5 साल के लिए 62,500 करोड़ रुपये का बजट है।
एमपीएमएस मोबाइल उपकरणों के लिए 5 साल वाली उत्पादन से जुड़ी (पीएलआई) योजना की जगह ले रही है, जो साल 2025-26 में समाप्त हो गई। इस नई योजना में बदलाव किया गया है। इस बदलाव का मकसद निर्यात को प्रोत्साहित करना और वेंडरों को घरेलू आपूर्तिकर्ताओं से पुर्जे खरीदने के लिए प्रोत्साहित करके स्थानीयकरण को बढ़ावा देना है।
बिज़नेस स्टैंडर्ड के साथ बातचीत में अंबर एंटरप्राइजेज के मुख्य कार्य अधिकारी और पूर्णकालिक निदेशक जसबीर सिंह ने कहा, ‘हम इस अधिसूचना और उसकी बारीकियों को देख रहे हैं ताकि यह पता चल सके कि हम इसके लिए पात्र हैं या नहीं। अगर हम पात्र हुए, तो निश्चित रूप से इस पर विचार करेंगे।’ इनकी कंपनी देश में एयर कंडीशनर बनाने वाली सबसे बड़ी मूल डिज़ाइन/ उपकरण विनिर्माता (ओईएम) कंपनियों में से एक है।
इस साल जून में अंबर एंटरप्राइजेज ने चीन की दिग्गज कंपनी बीबीके इलेक्ट्रॉनिक्स के तीन ब्रांड – ओपो, रीयलमी और वनप्लस को असेंबल करने के लिए ओपो मोबाइल्स इंडिया के साथ विनिर्माण साझेदारी की थी। मोबाइल फोन क्षेत्र में कंपनी की यह पहली शुरुआत है। जहां मार्च 2027 में परीक्षण उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है, वहीं कंपनी का लक्ष्य पहले साल में ही सालाना 80 से 90 लाख फोन बनाना है। दूसरे साल में यह संख्या बढ़ाकर 1.3 करोड़ से लेकर 1.5 करोड़ करने का इरादा है।
लावा इंटरनैशनल के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक हरि ओम राय ने भी इस बात की पुष्टि की कि कंपनी इस योजना के तहत भारतीय ब्रांडों के लिए इस प्रोत्साहन श्रेणी में आवेदन करेगी। राय ने कहा, ‘हां, हम अपने खुद के ब्रांड लावा के लिए इस योजना के तहत आवेदन की योजना बना रहे हैं, जिसे हम खुद बनाते हैं।’
रीयलमी के पूर्व मुख्य कार्य अधिकारी माधव सेठ की कंपनी नेक्स्टक्यूएसटी ने भी इस बात की तस्दीक की कि वह इस योजना के लिए आवेदन करेगी। सेठ ने कहा, ‘हम एक भारतीय ब्रांड के लिए इस योजना के लिए आवेदन कर रहे हैं। हमें लगता है कि इसमें बहुत गुंजाइश है और इसी वजह से हम अपनी अनुसंधान एवं विकास (आरऐंडडी) क्षमताएं विकसित करने में पहले ही 1 करोड़ डॉलर का निवेश कर चुके हैं और इसके लिए 600 से ज्यादा इंजीनियरों को भर्ती किया है।’
घटनाक्रम के जानकार सूत्रों के मुताबिक देश की प्रमुख स्मार्टफोन ओईएम कंपनियों में शुमार डिक्सन भी इस योजना के तहत पात्रता आवेदन की योजना बना रही है। यह कंपनी उन कुछ भारतीय कंपनियों में शामिल थी, जिन्हें पिछली पीएलआई योजना से भी फायदा हुआ था।