सरकार पश्चिम एशिया संकट से उपजी भू-राजनीतिक चुनौतियों के कारण व्यापार में आ रही अड़चनों को दूर करने के लिए नए उपाय लागू करने पर विचार कर रही है। प्रभावित निर्यातकों की मदद करने के लिए क्या रणनीति अपनाई जाए, इस बारे में विभिन्न मंत्रालयों से विचार-विमर्श किया जा रहा है। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को यह जानकारी दी।
सूत्रों के अनुसार वाणिज्य विभाग निर्यातकों को फ्रेट सब्सिडी की पेशकश करने पर विचार कर रहा है, ताकि माल भेजने के लिए लंबे नौवहन मार्गों का उपयोग करने के कारण बढ़ी लागत को कम किया जा सके। गोयल ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, ‘कुछ और निर्णय विचाराधीन हैं। इसके लिए विभिन्न मंत्रालयों एवं अलग-अलग स्तर पर विचार-विमर्श चल रहा है।’
विभाग ने पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण भारतीय निर्यातकों के समक्ष खड़ी हुईं माल ढुलाई लागत वृद्धि, बीमा प्रीमियम बढ़ोतरी और युद्ध संबंधी निर्यात जोखिम जैसी चुनौतियों को कम करने के लिए पिछले महीने ही 497 करोड़ रुपये की ‘निर्यात सुविधा के लिए लचीलापन और रसद हस्तक्षेप’ नाम से राहत योजना शुरू की थी।
केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘इस युद्ध ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को बहुत नुकसान पहुंचाया है। यह वैश्विक व्यापार को कड़ी चोट पहुंचा रहा है। विशेष रूप से संपत्ति का नुकसान और निर्दोष लोगों की मौत को लेकर सभी चिंतित हैं। समुद्र के रास्ते वस्तुओं की मुक्त आवाजाही में उत्पन्न हुई कठिनाइयां सभी के लिए परेशानी का सबब बन गई हैं। उम्मीद है कि ये दिक्कतें शीघ्र दूर होंगी।’
इन तमाम चुनौतियों के बावजूद भारत ने खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा के मामले में लचीलापन अपनाया है जिससे देश ‘काफी हद तक’ सुरक्षित और मजबूत बना हुआ है। गोयल ने कहा, ‘उपभोक्ताओं को एलपीजी मिल रही है। औद्योगिक एलएनजी आपूर्ति अब 80 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गई है। पेट्रोलियम उत्पादों की कोई कमी नहीं है। हमारी रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं। कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार मौजूद है और भविष्य के लिए आपूर्ति बनाए रखने के लिए कच्चे तेल, एलपीजी और एलएनजी की नई खेप भी आ रही है।’
पीयूष गोयल ने यह भी कहा कि अमेरिका में अपने उत्पादों के लिए भारत तरजीही बाजार पहुंच तलाश रहा है। अमेरिका के साथ हमारे संबंध बहुत मजबूत हैं। उसके साथ हमारी प्रौद्योगिकी, रक्षा, व्यापार और निवेश जैसे क्षेत्रों में गहरी रणनीतिक साझेदारी है।
गोयल ने संवाददाताओं से कहा, ‘हमारे पास प्रौद्योगिकी, रक्षा, व्यापार और निवेश आदि क्षेत्रों में अमेरिका के साथ गहरी रणनीतिक साझेदारी है। हमारा मानना है कि भारत को तरजीही बाजार पहुंच मिलनी चाहिए।’ उन्होंने कहा कि भारत का अमेरिका के साथ अंतरिम व्यापार समझौता दक्षिण पूर्व एशिया के उसके प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में सर्वश्रेष्ठ है।
मंत्री ने कैमरून के याउंडे में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर से भी मुलाकात की और भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) वार्ता में अगले कदमों पर चर्चा की। अब व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करने की समय-सीमा तय करने का सुझाव देने की बारी अमेरिका की है। मंत्री ने बताया कि अमेरिका के अलावा न्यूजीलैंड के साथ व्यापार समझौता अप्रैल में ही हो जाएगा। ओमान के साथ समझौता 1 मई से प्रभावी हो सकता है और ब्रिटेन के साथ समझौता 30-40 दिनों के भीतर अंजाम तक पहुंचने की उम्मीद है। दक्षिणी अफ्रीकी सीमा शुल्क संघ एवं कनाडा के साथ बातचीत एक या दो महीने में शुरू हो सकती है।