facebookmetapixel
Advertisement
ITC Hotels Q4 Results: मुनाफा 23% बढ़कर ₹317.43 करोड़ पर पहुंचा, रेवेन्यू ₹1,253 करोड़ के पारUpcoming IPO: SEBI ने तीन फर्मों को दी हरी झंडी, बाजार से ₹1,200 करोड़ रुपये जुटाएंगी ये कंपनियांRupee at record low: रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर, 1 डॉलर की कीमत 96 के पारक्रेडिट स्कोर बढ़ाने का सीक्रेट: ये 3 आसान आदतें दिलाएंगी हर लोन की मंजूरी, एक्सपर्ट से समझें तरीका‘अमेरिका पर भरोसा नहीं, बातचीत तभी होगी जब वॉशिंगटन गंभीर हो’, दिल्ली में बोले ईरानी विदेश मंत्री26 मई तक केरल पहुंच सकता है मानसून; उत्तर भारत में भीषण लू का अलर्टExplainer: किस पेंशन पर कितना देना होता है टैक्स? ITR फाइल करने से पहले जानना जरूरीभारत को 2037 तक अर्बन इंफ्रा में ₹80 लाख करोड़ निवेश की जरूरत: रिपोर्टअगले हफ्ते एक्स-डिविडेंड होंगे L&T, Havells समेत कई बड़े शेयर, निवेशकों को मिलेगा कैश रिवॉर्डPM Modi UAE Visit: यूएई में पीएम मोदी का बड़ा बयान, पश्चिम एशिया में तनाव के बीच शांति की पहल में भारत आगे

हमारे स्लीप एपनिया उपकरण भारत में उपयोग के लिए सुरक्षित: Philips

Advertisement

स्लीप एपनिया के इलाज के लिए बाईपैप और कंटिन्युअस पॉजिटिव एयरवेज प्रेशर (सीपैप) उपचार वाले उपकरणों का उपयोग किया जाता है।

Last Updated- May 03, 2024 | 10:03 PM IST
Philips lay offs

डच हेल्थकेयर कंपनी फिलिप्स (Philips) का कहना है कि उसने भारत में अपने दोषपूर्ण स्लीप थेरेपी उपकरणों में सुधार पूरा कर लिया है। मौजूदा परीक्षणों के आधार पर उसका दावा है कि उनके निरंतर उपयोग से सेहत को कोई ज्यादा नुकसान हाने के आसार नहीं है।

बाई-लेवल पॉजिटिव एयरवे प्रेशर (बाईपैप) मशीनों के कुछ मॉडलों में फोम के क्षरण की समस्या पाए जाने के बाद कंपनी को जांच का सामना करना पड़ा है। इस वजह से इसके उपयोगकर्ताओं को सांस लेने में दिक्कत और स्वास्थ्य जोखिम पैदा हो गया था।

स्लीप एपनिया के इलाज के लिए बाईपैप और कंटिन्युअस पॉजिटिव एयरवेज प्रेशर (सीपैप) उपचार वाले उपकरणों का उपयोग किया जाता है। स्लीप एपनिया नींद का ऐसा गंभीर विकार है, जिसमें सांस बार-बार रुकता और चलता है।

फिलिप्स (Philips) ने जून 2021 में अपनी प्रतिक्रिया में सीपैप और बाईपैप उपकरणों के संबंध में फील्ड सेफ्टी नोटिस जारी किया था, जिसमें ध्वनि कम करने वाले फोम के क्षरण को लेकर चिंताओं का हवाला दिया गया था, जिसके कारण श्वसन मार्ग में कण और रसायन जा रहे थे।

Advertisement
First Published - May 3, 2024 | 9:46 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement