सरकार का आर्टिफिशल इंटेलिजेंस संचालन व आर्थिक समूह (एआईजीईजी) एआई क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियों, विशेष रूप से बड़े और स्मॉल तथा लार्ज लैंग्वेज मॉडलों तथा उनके द्वारा विकसित किए जा रहे चैटबॉट के लिए एक समान कानूनी ढांचा तैयार करने पर जोर दे सकता है। वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के अनुसार यह समूह उन व्यापक मापदंडों को भी निर्धारित करेगा जिनके भीतर ये कंपनियां संचालित हो सकेंगी।
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि व्यापक कानूनी ढांचे के तहत ऐसे नियम बनाए जाएंगे जो एआई कंपनियों के उत्पादों और सेवाओं के लिए सीमा तथा सैंडबॉक्स तय करेंगे, जिनका उल्लंघन नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘इंटरनेट कंपनी के संचालन के लिए नियम मौजूद हैं लेकिन एआई एक अलग तरह की चुनौतियां पेश करता है। एआई उपकरण बनाने और उपलब्ध कराने वाली कंपनियों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए और उन्हें घरेलू कानूनों का पालन करना चाहिए।’
इनके अलावा समूह भारत के व्यापक एआई लक्ष्यों को सीमित करेगा जिसके तहत ज्यादातर पैसे चुनिंदा एआई इस्तेमाल के मामलों पर खर्च किए जाएंगे। एक अन्य अधिकारी ने बताया कि इन मामलों से अगले 12 से 18 महीनों के भीतर ज़मीनी स्तर पर बदलाव देखने को मिल सकते हैं। उन्होंने कहा कि प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में स्वास्थ्य, कृषि और शिक्षा शामिल हो सकते हैं।
उन्होंने कहा, ‘नौकरी के संभावित नुकसान को जितना हो सके कम करने के लिए कर्मचारियों को दक्ष बनाने और उनकी कुशलता बढ़ाने पर भी ध्यान दिया जाएगा। हम जल्द ही उद्योग निकायों और कंपनियों के साथ बड़े पैमाने पर बातचीत शुरू करेंगे ताकि यह पता लगाया जा सके कि एआई की वजह से किस तरह की नौकरियों पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है। साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि उन विभागों में लोगों को दोबारा प्रशिक्षण देने का सबसे अच्छा तरीका क्या है?’
इस महीने की शुरुआत में इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने 10 सदस्यीय एआई संचालन और आर्थिक समूह के गठन की घोषणा की थी। इस समूह के प्रमुख केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री हैं। भारत की एआई संचालन नीति पर शीर्ष निकाय की आवश्यकता तब उत्पन्न हुई जब विशेषज्ञों ने नए लार्ज लैंग्वेज मॉडल और क्लॉड मिथोस जैसे एआई टूल की बढ़ती क्षमताओं से उत्पन्न चुनौतियों को उजागर किया जिन्होंने पुराने सिस्टम और सॉफ्टवेयर की सुरक्षा को भेदने की क्षमता दिखाई है।
इस समूह में केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री उपाध्यक्ष के रूप में शामिल हैं। भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार, मुख्य आर्थिक सलाहकार, नीति आयोग के सीईओ और दूरसंचार, आर्थिक मामले, विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा आईटी मंत्रालय के सचिवों को भी समूह में शामिल किया गया है।
एक अलग प्रौद्योगिकी और नीति विशेषज्ञ समिति का भी गठन किया गया है, जिसमें भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मद्रास के बी रविंद्रन, आईआईटी गांधीनगर के निदेशक रजत मूना तथा उद्योग निकायों नैसकॉम, डेटा सिक्योरिटी काउंसिल ऑफ इंडिया तथा मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन फॉर इन्फॉर्मेशन टेक्नॉलजी के प्रतिनिधि शामिल हैं। आईटी मंत्रालय के सचिव की अध्यक्षता वाली प्रौद्योगिकी और नीति विशेषज्ञ समिति, एआईजीईजी को विशेषज्ञता प्रदान करेगी और एआई नीतियों तथा संचालन से संबंधित राष्ट्रीय महत्त्व के मामलों पर उसे जानकारी देगी।