इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन निर्माता एथर एनर्जी अपने स्कूटरों में एल्युमीनियम का इस्तेमाल कम करने की योजना बना रही है। यह लागत घटाने और मुनाफा बढ़ाने के इंजीनियरिंग-आधारित प्रयास का हिस्सा है। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं और कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच कंपनी इसे जारी रखे हुए है।
बिज़नेस स्टैंडर्ड से बात करते हुए एथर एनर्जी के सह-संस्थापक और सीटीओ स्वप्निल जैन ने कहा कि कंपनी के पिछले वाहन, खासकर प्रदर्शन पर केंद्रित 450 सीरीज, हल्के और हाई-परफॉर्मेंस वाले फीचर्स देने के लिए ज्यादा एल्युमीनियम कंटेंट के साथ बनाए गए थे। अब इस तरीके को बदला जा रहा है, क्योंकि एथर परिवारों के लिए सही स्कूटर बनाने की दिशा में बढ़ रही है। जैन ने कहा, ‘ज्यादा एल्युमीनियम का इस्तेमाल हल्के, हाई-परफॉर्मेंस वाले वाहनों के लिए किया जाता था। हाई-परफॉर्मेंस पारिवारिक वाहन को जरूरी नहीं कि इन सभी चीजों की जरूरत हो।’ उन्होंने बताया कि रिज्टा जैसे नए मॉडलों में एल्युमीनियम का इस्तेमाल पहले ही कम कर दिया गया है। आने वाले प्लेटफॉर्म पर इसमें और भी कटौती की योजना है।
इस बदलाव से लागत पर काफी असर पड़ने की उम्मीद है। सूत्रों के मुताबिक एल्युमीनियम की मात्रा कम करके उसकी जगह लोहा और इस्पात जैसे दूसरे विकल्प इस्तेमाल करने से हर गाड़ी पर लागत में 15 प्रतिशत तक की बचत हो सकती है जिससे सीधे मुनाफे में मदद मिलेगी। यह एथर की नई ईएल प्लेटफॉर्म रणनीति के अनुरूप है। इसे बड़े पैमाने पर उत्पादन और लागत-दक्षता के लिए तैयार किया जा रहा है। इसमें सामग्री, इलेक्ट्रॉनिक्स के एकीकरण और पूरी बनावट में बदलाव शामिल हैं।
जानकारों का कहना है कि डिजाइन पर आधारित लागत में यह कमी कंपनी के वित्तीय सफर में पहले से ही साफ दिखाई दे रही है। इक्विरस सिक्योरिटीज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एथर का सकल मार्जिन तेजी से बढ़ा है। यह वित्त वर्ष 2022 के लगभग 6 प्रतिशत से बढ़कर वित्त वर्ष 2026 के पहले नौ महीनों में करीब 20 प्रतिशत हो गया है, जिसकी मुख्य वजह बिल-ऑफ-मटीरियल (बीओएम) में कमी और इंजीनियरिंग में कुशलता है। ब्रोकरेज ने बताया कि नए ईएल प्लेटफॉर्म से बीओएम लागत में कमी के अगले चरण को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, जिससे यूनिट इकोनॉमिक्स में कई साल तक सुधार होता रहेगा।
एमके ग्लोबल फाइनैंशियल सर्विसेज की एक अलग रिपोर्ट में मार्जिन में वृद्धि का जिक्र करते हुए बताया गया है कि एथर का सकल मार्जिन बढ़कर लगभग 20 प्रतिशत हो गया है, जबकि एबिटा घाटा तेजी से कम होकर 10 प्रतिशत से नीचे आ गया है।
जैन ने कहा कि एल्युमीनियम की लागत वैश्विक ऊर्जा कीमतों के प्रति बहुत ज्यादा संवेदनशील रहती है जिससे इस पर निर्भरता कम करने की जरूरत और भी बढ़ जाती है। उन्होंने कहा, ‘एल्युमीनियम ऊर्जा पर बहुत ज्यादा निर्भर करता है। इसलिए जैसे-जैसे ऊर्जा की कीमतें बढ़ती हैं, इसकी लागत भी बढ़ जाती है।’ उन्होंने बताया कि हालांकि भारत के पास पर्याप्त घरेलू क्षमता है और पश्चिम एशिया संकट के कारण आपूर्ति में कमी की संभावना कम है, फिर भी कीमतों में उतार-चढ़ाव चिंता का विषय बना हुआ है।
एल्युमीनियम के साथ-साथ एथर रेअर अर्थ सामग्रियों पर निर्भरता कम करने के लिए भी काम कर रही है।