प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
एक इक्विटी ट्रेडिंग फर्म में काम करने वाले सतीश महाजन (नाम बदला हुआ) का कहना है कि शुरू में आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) से काम के घंटों के दौरान समय बचने की उम्मीद थी।
उन्होंने कहा, ‘जब हमने दो साल पहले तेजी से कोडिंग करने के लिए एआई का उपयोग करना शुरू किया, तो इरादा शेष समय में प्रौद्योगिकी और कोड स्टैक के नए स्वरूपों का पता लगाना था। इसके विपरीत, आज डेवलपर अधिक घंटों तक काम कर रहे हैं क्योंकि उत्पादन यानी काम पूरा करने की समय-सीमा तेजी से कम हो गई है। यह एक सप्ताह से घटकर सिर्फ एक दिन तक रह गई है।’ काम की रफ्तार में यह तेजी अब डेवलपर की दैनिक जिंदगी पर असर डाल रही है।
बेंगलूरु में डॉटनेट आर्किटेक्ट राघव शेट्टी (नाम बदला गया) के पास 17 से अधिक वर्षों का अनुभव है। उनका कहना है कि जो इंजीनियर प्रभावी ढंग से एआई का उपयोग करना जानते हैं, उन्हें अपना जीवन आसान लगेगा। बेहतर प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग के साथ जो काम पहले दो से तीन दिन में होते थे, अब एक ही दिन में पूरे किए जा सकते हैं।
लेकिन इस दक्षता के साथ कुछ शर्तें भी जुड़ी हैं। उनका कहना है कि एआई एजेंट 90 प्रतिशत समय सही ढंग से काम कर सकते हैं, लेकिन मानवीय हस्तक्षेप अभी भी जरूरी है, चाहे त्रुटियों को ठीक करना हो, समाधानों का अनुकूल करना हो या कई एआई-आधारित विकल्पों में से सही आउटपुट चुनना हो।
महाजन ने कहा कि इस बदलाव ने कोडिंग की प्रकृति को ही मौलिक रूप से बदल दिया है। उन्होंने कहा, ‘व्यक्तिगत रूप से, हमने कम से कम 90 प्रतिशत तक कोडिंग करना बंद कर दिया है। हमारा अधिकांश समय अब प्रॉम्प्ट और समीक्षा में जाता है। पहले जिन कार्यों को सीटीओ और प्रबंधकों द्वारा संभाला जाता था, वे अब डेवलपर की भूमिका का हिस्सा हैं।’
इन जमीनी स्तर के बदलावों ने भारत के आईटी सेवा मॉडल के भविष्य को लेकर व्यापक चिंताओं को जन्म दिया है। इस बार चिंता एंथ्रोपिक द्वारा क्लाउड को-वर्क की पेशकश को लेकर है, जो एक जेनरेटिव एआई प्लेटफॉर्म है। इनमें 11 प्लग-इन हैं जिन्हें पिछले महीने कानूनी, बिक्री, मार्केटिंग और डेटा विश्लेषण में कार्यों को स्वचालित करने के लिए पेश किया गया । इससे निवेशकों के दिमाग में यह सवाल घूम रहा है कि यदि एआई एजेंट स्वतंत्र रूप से जटिल परिचालन समस्याओं को हल कर सकते हैं तो कई पारंपरिक सॉफ्टवेयर लेयर कितने आवश्यक रह जाएंगे। इसके बाद कई बड़ी आईटी सेवा कंपनियों के शेयरों की कीमतों और मूल्यांकन में गिरावट आई।