प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
निवेशक कमर्शल पेपर (सीपी) बाजार से हटकर सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट (सीडी) की ओर बढ़ रहे हैं, क्योंकि प्राइमरी सीडी इश्युएंस में वृद्धि हुई है और इन कम अवधि के निवेश के साधनों में दरें भी बढ़ी हैं। निवेशकों को जोखिम और रिटर्न दोनों ही दृष्टिकोण से सीडी बाजार अधिक आकर्षक लग रहा है। ऐसा खासकर इसलिए है, क्योंकि बैंकिंग व्यवस्था में जमा में आई कमी को देखते हुए बैंक इस माध्यम से धन जुटा रहे हैं।
भारतीय रिजर्व बैंक के नवीनतम आंकड़ों से पता चला है कि अगस्त 2025 से आउटस्टैंडिंग सीपी इश्युएंस में लगभग 1 लाख करोड़ रुपये की गिरावट आई है, जबकि इसी अवधि के दौरान सीडी इश्युएंस में भी लगभग इतनी ही वृद्धि हुई है।
एडलवाइस एसेट मैनेजमेंट लिमिटेड में प्रेसीडेंट और सीआईओ- फिक्स्ड इनकम, धवल दलाल ने कहा, ‘पारंपरिक रूप से म्युचुअल फंडों की प्राथमिकता में सीडी शामिल रही है। जनवरी और फरवरी में प्राथमिक सीडी की आपूर्ति बढ़ने के साथ स्वाभाविक रूप से उन्होंने सीडी के लिए आवंटन बढ़ाया होगा। सीडी न केवल तुलनात्मक रूप से अधिक मुनाफा दे रहे हैं, बल्कि अधिक लिक्विड भी हैं।’
उन्होंने आगे कहा, ‘ऋण वृद्धि में मजबूती और खुदरा जमा वृद्धि में सुस्ती के अंतर को पाटने के लिएबैंकों ने सीडी पर अधिक भरोसा किया है।’
सीडी की बकाया राशि 31 जनवरी तक बढ़कर 5.8 लाख करोड़ रुपये हो गई, जबकि 22 अगस्त, 2025 को समाप्त पखवाड़े में यह 4.9 लाख करोड़ रुपये थी। इस बीच सीपी की बकाया राशि 31 जनवरी तक घटकर 4.3 लाख करोड़ रुपये रह गई, जबकि 15 अगस्त, 2024 को समाप्त पखवाड़े में यह 5.5 लाख करोड़ रुपये थी।
केयरएज रेटिंग्स में एसोसिएट डायरेक्टर, बीएफएसआई, सौरभ भालेराव ने कहा, ‘कमर्शल पेपर्स और सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट के लिए निवेशक आधार काफी हद तक समान है। उधारकर्ता की प्रकृति में मुख्य अंतर है। सीडी मुख्य रूप से बैंकों द्वारा जारी की जाती हैं, जबकि सीपी ज्यादातर कॉरपोरेट्स द्वारा जारी किए जाते हैं। नतीजतन सीडी में आमतौर पर सीपी की तुलना में ऋण जोखिम कम रहता है।’
उन्होंने आगे कहा, ‘सीडी दरों में वृद्धि के साथ निवेशकों को अपेक्षाकृत कम ऋण जोखिम और अधिक यील्ड का संयोजन आकर्षक लगने की संभावना है। इसके कारण सीडी बाजार की ओर धन की आवक बढ़ी है। दूसरी ओर कंपनियां सीपी के माध्यम से कम अवधि के लिए उधार लेती हैं, इसकी तुनला में बैंक इस क्षेत्र में अधिक प्रतिस्पर्धी बने हुए हैं।
हाल के महीनों में ऋण की मांग में जोरदार वृद्धि और जमा वृद्धि कम होने के कारण बैंकों की सीडी पर निर्भरता बढ़ी है। ऋण और जमा में अंतर को देखते हुए आमतौर पर बैंकों का सीडी इश्युएंस बढ़ा है।