इससे पहले शून्यकाल में तृणमूल के डेरेक ओ ब्रायन ने यह मुद्दा उठाते हुए कहा था कि शिन्दे ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के इस वादे का उल्लंघन किया है कि जीजेएम नेतृत्व के साथ कोई भी बैठक राज्य सरकार के परामर्श के बाद होगी।
ओ ब्रायन ने कहा कि एक अगस्त को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंंह ने ममता को पत्र लिखकर कहा, मैंने केंद्र सरकार से जुड़े लोगों को आदेश दिया हैं कि जीजेएम नेतृत्व के साथ कोई भी बैठक राज्य सरकार के परामर्श के साथ की जानी चाहिए।
तृणमूल नेता ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री के आश्वासन के बाद शिंदे ने नयी दिल्ली में 3 सितंबर को जीजेएम नेतृत्व के साथ बैठक की और राज्य सरकार को इस बारे में कुछ भी नहीं बताया।
ओ ब्रायन और उनके सहयोगियों ने इस मुद्दे पर गृह मंत्री के बयान की मांग की थी। तृणमूल सदस्यों के हंगामे के कारण शून्यकाल में बैठक दस मिनट के लिए स्थगित भी की गई थी।
सदन की बैठक पुन.ं शुरू होने पर संसदीय कार्य राज्य मंत्री राजीव शुक्ला ने कहा कि गृह मंत्री आज उपलब्ध नहीं हैं और उनका स्वास्थ्य भी ठीक नहीं है। तब तृणमूल सदस्यों ने मांग की कि गृह राज्य मंत्री इस मुद्दे पर बयान दें। इस पर शुक्ला ने आश्वासन दिया कि सदन की बैठक खत्म होने से पहले गृह राज्य मंत्री इस बारे में बयान देंगे।
भाषा मनीषा राजेश अमृत जलीस