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Aadhaar Update: अब जन्म के साथ बनेगा आधार! सरकार की नई व्यवस्था से बदल जाएगा पूरा सिस्टम

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अब सरकार बर्थ सर्टिफिकेट को आधार से लिंक करने की नई व्यवस्था ला रही है, जिससे नवजात बच्चों की पहचान और सरकारी सेवाओं से जुड़ी प्रक्रियाएं अधिक आसान और पारदर्शी हो सकेंगी।

Last Updated- March 07, 2026 | 3:58 PM IST
Aadhaar Card
Representative Image

Aadhaar Update: भारत में आधार कार्ड आज सबसे महत्वपूर्ण पहचान दस्तावेजों में से एक बन चुका है। बैंक खाता खुलवाने से लेकर मोबाइल सिम खरीदने, स्कूल में दाखिला कराने, सरकारी योजनाओं का लाभ लेने और कई प्रशासनिक प्रक्रियाओं में आधार की आवश्यकता पड़ती है। इसी कारण सरकार लगातार पहचान से जुड़े दस्तावेजों को आपस में जोड़कर व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और सरल बनाने की दिशा में काम कर रही है।

इसी कड़ी में अब सरकार जन्म प्रमाण पत्र यानी बर्थ सर्टिफिकेट को आधार कार्ड से जोड़ने की व्यवस्था लागू कर रही है। इस नई पहल का उद्देश्य बच्चों की पहचान से जुड़े रिकॉर्ड को एक ही सिस्टम में सुरक्षित रखना और भविष्य में होने वाली प्रक्रियाओं को आसान बनाना है।

क्या होता है बर्थ सर्टिफिकेट और कहां से बनता है

जन्म प्रमाण पत्र किसी व्यक्ति की पहचान और नागरिकता का सबसे पहला आधिकारिक दस्तावेज होता है। यह प्रमाणित करता है कि बच्चे का जन्म कब और कहां हुआ है।

भारत में बर्थ सर्टिफिकेट नगर निगम, नगर परिषद, ग्राम पंचायत, अधिसूचित क्षेत्र परिषद, या संबंधित स्थानीय प्रशासनिक संस्थाएं जारी करती हैं। विदेश में जन्म लेने वाले भारतीय बच्चों के लिए यह प्रमाण पत्र भारतीय दूतावास या वाणिज्य दूतावास द्वारा जारी किया जाता है।

सरकार बर्थ सर्टिफिकेट से आधार क्यों जोड़ रही है

सरकार का उद्देश्य बच्चों की पहचान से जुड़े सभी जरूरी रिकॉर्ड को शुरुआती स्तर पर ही एकीकृत करना है। वर्तमान में नवजात बच्चों के लिए आधार कार्ड बनाया जाता है जिसे बाल आधार कहा जाता है।

बाल आधार बनवाने के बाद बच्चे की उम्र 5 साल और 15 साल होने पर उसका बायोमेट्रिक अपडेट कराना अनिवार्य होता है। नई व्यवस्था के तहत बर्थ सर्टिफिकेट और आधार को आपस में जोड़ने से बच्चे की जानकारी एक ही सिस्टम में सुरक्षित और अपडेट रहेगी।

इससे भविष्य में कई काम आसान हो जाएंगे जैसे

  • स्कूल में एडमिशन

  • सरकारी योजनाओं का लाभ

  • स्वास्थ्य बीमा

  • पासपोर्ट बनवाना

  • छात्रवृत्ति और अन्य सरकारी सेवाएं

सरकार का मानना है कि इस प्रक्रिया से फर्जी पहचान या दस्तावेजों के दुरुपयोग को भी रोका जा सकेगा।

फिलहाल कितने राज्यों में उपलब्ध है सुविधा

बर्थ सर्टिफिकेट और आधार लिंक करने की सुविधा फिलहाल देश के लगभग 16 राज्यों में उपलब्ध है। इस व्यवस्था की शुरुआत करीब एक साल पहले की गई थी और धीरे धीरे इसे अन्य राज्यों में भी लागू किया जा रहा है।

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण यानी UIDAI का लक्ष्य है कि आने वाले कुछ महीनों में यह सुविधा पूरे देश में उपलब्ध हो जाए। इससे नवजात बच्चों का जन्म पंजीकरण और आधार से जुड़ी प्रक्रिया एक साथ पूरी की जा सकेगी।

पहले से बने दस्तावेजों को कैसे लिंक करें

यदि किसी बच्चे का बर्थ सर्टिफिकेट और आधार कार्ड पहले से बना हुआ है, तो उन्हें ऑनलाइन लिंक करना भी संभव है। इसके लिए निम्न प्रक्रिया अपनानी होगी।

  1. सबसे पहले Civil Registration System की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।

  2. वेबसाइट पर General Public Sign Up विकल्प के जरिए अपना अकाउंट बनाएं।

  3. लॉगिन करने के बाद Birth Registration सेक्शन में जाएं।

  4. यहां आधार लिंक करने का विकल्प दिखाई देगा।

  5. इसमें बर्थ रजिस्ट्रेशन नंबर, आधार नंबर और मोबाइल नंबर दर्ज करें।

  6. मोबाइल पर आए OTP को दर्ज करके प्रक्रिया पूरी करें।

यदि दोनों दस्तावेजों की जानकारी सिस्टम में मेल खाती है तो आधार और बर्थ सर्टिफिकेट तुरंत लिंक हो जाते हैं। लेकिन अगर किसी प्रकार की जानकारी गलत पाई जाती है, तो उसे ठीक कराने के लिए नजदीकी UIDAI सेवा केंद्र जाना पड़ सकता है।

नवजात बच्चों के लिए कैसे होगी यह प्रक्रिया

नई व्यवस्था के तहत अस्पताल में बच्चे के जन्म के बाद उसकी जानकारी रजिस्ट्रेशन सेंटर में दर्ज की जाती है। यह जानकारी सीधे ऑनलाइन Civil Registration System पोर्टल पर अपलोड हो जाती है।

इस पंजीकरण में बच्चे का नाम, जन्म की तारीख, जन्म का समय, लिंग और माता पिता की जानकारी दर्ज की जाती है। अब इसी प्रक्रिया के दौरान आधार से जुड़ी प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है।

छोटे बच्चों के लिए शुरुआत में बायोमेट्रिक जानकारी नहीं ली जाती। इसलिए उन्हें पहले एक अस्थायी आधार नंबर जारी किया जाता है। बाद में बच्चे की उम्र बढ़ने पर बायोमेट्रिक अपडेट करके आधार को पूर्ण रूप से सक्रिय किया जाता है।

व्यवस्था से क्या होगा फायदा

सरकार का मानना है कि बर्थ सर्टिफिकेट और आधार की लिंकिंग से बच्चों की पहचान से जुड़े रिकॉर्ड सुरक्षित और पारदर्शी होंगे। इससे भविष्य में शिक्षा, स्वास्थ्य और सरकारी योजनाओं से जुड़ी प्रक्रियाएं काफी सरल और तेज हो जाएंगी।

साथ ही डिजिटल रिकॉर्ड बनने से दस्तावेजों की फर्जीवाड़े की संभावना भी कम हो जाएगी और नागरिकों को बार बार अलग अलग दस्तावेज जमा करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

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First Published - March 7, 2026 | 3:58 PM IST

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