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Weekend Special: PM Modi लेंगे G7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा, साइप्रस- क्रोएशिया भी जाएंगे

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G7 देश वैश्विक संपत्ति का लगभग 50%, और 2024 के अनुसार दुनिया की कुल नाममात्र GDP का 44% से अधिक साझा करते हैं।

Last Updated- June 15, 2025 | 7:21 PM IST
PM Modi G7 Summit
PIB/ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज तीन देशों के महत्वपूर्ण दौरे पर रवाना हो गए हैं। इस दौरे के तहत वह साइप्रस, कनाडा और क्रोएशिया का दौरा करेंगे। इस यात्रा का उद्देश्य भारत के वैश्विक संबंधों को मजबूत करना, आतंकवाद के खिलाफ सहयोग को बढ़ाना, और वैश्विक दक्षिण (Global South) की प्राथमिकताओं को प्रमुख वैश्विक मंच पर उजागर करना है।

साइप्रस दौरा (15-16 जून)

प्रधानमंत्री मोदी अपनी यात्रा की शुरुआत 15 जून को साइप्रस से करेंगे, जहाँ वे राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडुलाइड्स के निमंत्रण पर जाएंगे। मोदी ने कहा, “साइप्रस हमारे लिए एक घनिष्ठ मित्र और भूमध्य सागर क्षेत्र व यूरोपीय संघ में एक महत्वपूर्ण भागीदार है।”

उन्होंने आगे कहा कि यह दौरा ऐतिहासिक संबंधों को मजबूत करने और व्यापार, निवेश, सुरक्षा, प्रौद्योगिकी, और जनसंपर्क (people-to-people exchanges) को बढ़ावा देने का अवसर प्रदान करेगा।

कनाडा: G7 शिखर सम्मेलन (Kananaskis)

साइप्रस के बाद पीएम मोदी कनाडा के कानानास्किस में होने वाले G7 शिखर सम्मेलन 2025 में हिस्सा लेंगे। उन्हें इस सम्मेलन में कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के निमंत्रण पर बुलाया गया है।

मोदी ने कहा कि यह सम्मेलन “वैश्विक मुद्दों पर विचारों के आदान-प्रदान” और Global South की प्राथमिकताओं को प्रमुखता से रखने का मंच प्रदान करेगा। इसके अलावा, वे भागीदार देशों के नेताओं से भी मुलाकात करेंगे।

क्रोएशिया दौरा (18 जून)

18 जून को प्रधानमंत्री मोदी क्रोएशिया पहुंचेंगे, जहाँ उनकी मुलाकात राष्ट्रपति जोरान मिलानोविक और प्रधानमंत्री आंद्रेज प्लेनकोविक से होगी। पीएम मोदी का यह क्रोएशिया का पहला दौरा है।

उन्होंने कहा, “भारत और क्रोएशिया के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक संबंध हैं। यह दौरा द्विपक्षीय सहयोग को नए क्षेत्रों में विस्तारित करेगा।”

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तीन देशों की यात्रा पर निकलने से पहले क्या कहा पीएम मोदी ने- 

आज मैं साइप्रस गणराज्य, कनाडा और क्रोएशिया की तीन देशों की यात्रा पर रवाना हो रहा हूँ। 15-16 जून को मैं साइप्रस गणराज्य की यात्रा करूँगा, जहाँ मैं साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडुलाइड्स के निमंत्रण पर जा रहा हूँ। साइप्रस हमारे लिए एक घनिष्ठ मित्र और भूमध्य सागर क्षेत्र तथा यूरोपीय संघ (EU) में एक महत्वपूर्ण साझेदार है। यह यात्रा हमारे ऐतिहासिक संबंधों को और प्रगाढ़ करने तथा व्यापार, निवेश, सुरक्षा, प्रौद्योगिकी और जन-से-जन संपर्क (people-to-people exchanges) के क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।

साइप्रस के बाद, मैं कनाडा के कानानास्किस जाऊँगा जहाँ मैं कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के निमंत्रण पर G7 शिखर सम्मेलन में भाग लूँगा। यह सम्मेलन वैश्विक मुद्दों पर विचारों के आदान-प्रदान और वैश्विक दक्षिण (Global South) की प्राथमिकताओं को साझा करने के लिए एक उपयोगी मंच प्रदान करेगा। मैं भागीदार देशों के नेताओं से संवाद की भी आशा करता हूँ।

18 जून को मैं क्रोएशिया गणराज्य की यात्रा करूँगा और वहाँ क्रोएशिया के राष्ट्रपति जोरान मिलानोविक और क्रोएशिया गणराज्य के प्रधानमंत्री आंद्रेय प्लेनकोविक से मुलाकात करूँगा। भारत और क्रोएशिया के बीच सदियों पुराने गहरे सांस्कृतिक संबंध रहे हैं। किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह क्रोएशिया की पहली यात्रा होगी, जो आपसी हितों के क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग के नए रास्ते खोलेगी।

यह तीन देशों की यात्रा उन भागीदार देशों का धन्यवाद करने का भी एक अवसर है, जिन्होंने सीमापार आतंकवाद के विरुद्ध भारत की लड़ाई में दृढ़ समर्थन दिया है, और सभी प्रकार के आतंकवाद से निपटने के लिए वैश्विक समझ को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में सहयोग को प्रेरित करेगी।

कनाडा के प्रधानमंत्री ने किया था पीएम मोदी को फोन- 

विदेश मंत्रालय प्रवक्ता ने बताया कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी का टेलीफोन कॉल प्राप्त हुआ। दोनों नेताओं के बीच G7 शिखर सम्मेलन और द्विपक्षीय संबंधों को लेकर सकारात्मक और सौहार्दपूर्ण बातचीत हुई।

बातचीत के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी ने प्रधानमंत्री कार्नी को हाल ही में हुए आम चुनावों में उनकी जीत पर बधाई दी और उन्हें इस माह के अंत में कनाडा के कानानास्किस में होने वाले G7 शिखर सम्मेलन में आमंत्रण के लिए धन्यवाद दिया।

दोनों नेताओं ने भारत और कनाडा के बीच गहरे जन-सामान्य स्तर के संबंधों की सराहना की और आपसी सम्मान व साझा हितों के आधार पर नवीन ऊर्जा के साथ मिलकर काम करने के संकल्प को दोहराया। प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि वह शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री कार्नी से मुलाकात को लेकर उत्सुक हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस बातचीत की जानकारी X (पूर्व में ट्विटर) पर साझा करते हुए लिखा:

“कनाडा के प्रधानमंत्री @MarkJCarney से कॉल प्राप्त कर खुशी हुई। उन्हें हालिया चुनावी जीत पर बधाई दी और इस माह के अंत में कानानास्किस में होने वाले G7 शिखर सम्मेलन में आमंत्रण के लिए धन्यवाद किया। जीवंत लोकतंत्रों के रूप में, जो गहरे जनसंपर्क से जुड़े हैं, भारत और कनाडा आपसी सम्मान और साझा हितों के मार्गदर्शन में नई ऊर्जा के साथ मिलकर काम करेंगे। शिखर सम्मेलन में हमारी मुलाकात को लेकर उत्साहित हूँ।”

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क्या है G7 समूह, क्यों है इतना प्रभावशाली

G7 (ग्रुप ऑफ सेवन) एक अंतर-सरकारी राजनीतिक और आर्थिक मंच है, जिसमें कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, यूरोपीय संघ (EU) को एक “गैर-सूचीबद्ध सदस्य” के रूप में सम्मिलित किया गया है। यह समूह बहुलवाद, उदार लोकतंत्र और प्रतिनिधि सरकार जैसे साझा मूल्यों पर आधारित है। इसकी शुरुआत 1973 में वित्त मंत्रियों की एक अनौपचारिक बैठक के रूप में हुई थी, लेकिन समय के साथ यह एक औपचारिक और उच्च-स्तरीय मंच बन गया है, जहाँ वैश्विक व्यापार, सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और जलवायु परिवर्तन जैसे प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा और समाधान की दिशा में समन्वय किया जाता है।

हर साल, G7 देशों के प्रधानमंत्री या राष्ट्राध्यक्ष, साथ ही EU के आयोग अध्यक्ष और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष, G7 शिखर सम्मेलन में भाग लेते हैं। वर्ष भर समूह के अन्य वरिष्ठ अधिकारी विभिन्न स्तरों पर बैठकें करते रहते हैं। कई बार अन्य देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों को भी अतिथि के रूप में आमंत्रित किया जाता है। गौरतलब है कि 1997 से 2014 तक रूस भी इसका हिस्सा था, जब तक उसे G8 से निष्कासित नहीं किया गया।

G7 किसी संधि पर आधारित नहीं है और इसका कोई स्थायी सचिवालय या कार्यालय नहीं है। इसके संचालन के लिए हर वर्ष एक सदस्य देश अध्यक्षता (Presidency) करता है, जो नीतिगत प्राथमिकताओं का निर्धारण करता है और शिखर सम्मेलन की मेजबानी करता है। वर्ष 2025 में कनाडा G7 की अध्यक्षता कर रहा है।

हालाँकि G7 के पास कोई कानूनी या संस्थागत ढांचा नहीं है, फिर भी इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अत्यधिक प्रभावशाली माना जाता है। इसने कई वैश्विक पहलों को जन्म दिया है, जैसे:

  • HIV/AIDS महामारी से मुकाबला,
  • विकासशील देशों को वित्तीय सहायता, 
  • और 2015 के पेरिस जलवायु समझौते को आगे बढ़ाने में भूमिका।

हालांकि, समूह की आलोचना भी की जाती रही है — जैसे कि इसकी सीमित और पुराने ढांचे की सदस्यता, वैश्विक प्रतिनिधित्व की कमी, और कुछ मामलों में अप्रभावी कार्यप्रणाली।

G7 के सभी सदस्य अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) द्वारा उन्नत अर्थव्यवस्थाएं मानी जाती हैं। आज G7 देशों की कुल जनसंख्या लगभग 78 करोड़ है, जो दुनिया की लगभग 10% आबादी के बराबर है। ये देश वैश्विक संपत्ति का लगभग 50%, और 2024 के अनुसार दुनिया की कुल नाममात्र GDP का 44% से अधिक, जबकि PPP (क्रय शक्ति समता) के आधार पर लगभग 30% वैश्विक GDP साझा करते हैं।

G7 समूह में 7 सदस्य देश और यूरोपीय संघ शामिल, अध्यक्षता हर वर्ष तय क्रम में बदलती है।

कनाडा में हो रहा है G7 शिखर सम्मेलन

15 से 17 जून 2025 के बीच, G7 देशों के नेता कनाडा के कानानास्किस (अल्बर्टा) में G7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा ले रहे हैं, जहाँ कनाडा इस वर्ष G7 की अध्यक्षता कर रहा है।

कनाडा सरकार के प्रवक्ता के अनुसार अपने अब तक के G7 अध्यक्षीय कार्यकालों के दौरान, कनाडा ने वैश्विक नेतृत्व का प्रदर्शन किया है। उसने वैश्विक सुरक्षा और आर्थिक संकट, स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों, और विकास संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए कई नई और नवोन्मेषी पहलों की शुरुआत की है।

कनाडा की पहल से लोकतंत्र, साइबर सुरक्षा, महासागर संरक्षण, और संकट स्थितियों में महिलाओं और लड़कियों की शिक्षा जैसे महत्वाकांक्षी मुद्दों पर भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। इस वर्ष का शिखर सम्मेलन इन पहलों को और आगे बढ़ाने तथा वर्तमान वैश्विक संकटों के समाधान पर केंद्रित रहेगा।

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First Published - June 15, 2025 | 5:07 PM IST

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