कोटक एएमसी के मैनेजिंग डायरेक्टर नीलेश शाह का मानना है कि भारत शायद एलएलएम में एक प्रमुख देश नहीं बन पाएंगे। लेकिन सबसे अच्छा मौका एलएलएम का लाभ उठाकर ऐसे ऐप्स या एसएलएम बनाना है जो दुनिया को समाधान उपलब्ध करा सकें।
शाह ने मंगलवार को नयी दिल्ली में आयोजित बीएस मंथन में भारत की एआई स्टोरी पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि भारत की एआई स्टोरी हाल में हुए इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 की तरह है। कुछ लोगों को यह अच्छा (Attractive) लगा जबकि कुछ को अव्यवस्थित लगा।
उन्होंने कहा कि हम शायद एलएलएम में एक प्रमुख देश नहीं बन पाएंगे। हमारे लिए सबसे अच्छा विकल्प एलएलएम का लाभ उठाकर ऐसे ऐप्स या एसएलएम बनाना है जो दुनिया को सोल्यूएशंस कर सकें। उन्होंने कहा कि भारत की एआई स्टोरी को लेकर तस्वीर अभी साफ हो रही है। उन्होंने क्रिकेट का उदाहरण देते हुए कहा कि हमारे पास मौके हैं लेकिन हमें तिलक वर्मा की जगह अर्शदीप सिंह और जसप्रीत बुमराह की तरह खेलना होगा।
नीलेश शाह ने कहा कि जो फंड मैनेजर्स एआई तकनीक का इस्तेमाल करेंगे उनके लिए ये मददगार होगा। जबकि जो एआई से दूरी बनाएंगे उनके लिए ये बड़ी चुनौती के रूप में उभर कर सामने आएगा।
उन्होंने उदाहरण के तौर पर बताया कि जब डॉटकॉम आया था तो जिन कंपनियों के उसे अपनाया उनका बिजनेस मॉडल और काम करने का तरीका बदल गया। इससे उन्हें आगे बढ़ने में मदद मिली। वहीं, जिन्होंने इससे दूरी बनाई थी वो पीछे रह गए।
नीलेश शाह ने कहा कि अगर अमेरिका के टैरिफ कम होते हैं और प्रस्तावित भारत-ईयू फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से ड्यूटी और कम होती है, तो भारत एक वैश्विक लीडर के रूप में उभर सकता है। उन्होंने इस डील से मछली पालन और जलीय खेती में भारत को प्रमुख रूप से फायदा हो सकता है।
शाह ने यह भी कहा कि सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड (SEBI) ने डेटा इकट्ठा करने और उसका विश्लेषण करने का अच्छा काम किया है। सेबी का जो आदेश जेन स्ट्रीट पर प्रकाशित हुआ, वह पढ़ने लायक था। उन्होंने पैटर्न्स को बहुत बारीकी से पहचान लिया है।
निलेश शाह ने यह भी कहा कि भारत में रिटेल निवेशकों से फंड फ्लो लगातार आता रहेगा। निवेशक सोना, चांदी, मल्टी-एसेट फंड और फंड ऑफ फंड्स में भी अपना पैसा डिवाइड कर सकते हैं। हालांकि, रिटेल निवेशकों के लिए असली चुनौती यह है कि वे अपनी सेविंग को कैसे अलॉट करें। जबकि म्यूचुअल फंड्स ने पिछले तीन साल में अच्छा प्रदर्शन किया है, फिर भी घरों की फाइनेंशियल सेविंग में म्यूचुअल फंड्स में लगाया गया हिस्सा अभी भी सर्कुलेशन में मौजूद करेंसी से कम है।