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‘जातिगत गणना को ठंडे बस्ते में डालना चाहती है मोदी सरकार’, कांग्रेस ने केंद्र पर लगाया आरोप

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कांग्रेस ने केंद्र पर जातिगत गणना टालने का आरोप लगाया है। जयराम रमेश के अनुसार, महिला आरक्षण में संशोधन का उद्देश्य असल मुद्दों से ध्यान भटकाना है

Last Updated- April 12, 2026 | 10:48 PM IST
Jairam Ramesh
कांग्रेस महासचिव (प्रभारी संचार) जयराम रमेश | फाइल फोटो

कांग्रेस ने रविवार को आरोप लगाया कि सरकार जातिगत गणना को ठंडे बस्ते में डालना चाहती है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश को गुमराह करने और बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी करने के एजेंडे के साथ महिला आरक्षण कानून में संशोधन करना चाहते हैं। कांग्रेस महासचिव (प्रभारी संचार) जयराम रमेश ने दावा किया कि मोदी सरकार यह कहकर अनुच्छेद 334-ए में संशोधन करना चाहती है कि जातिगत गणना के परिणाम कुछ वर्षों तक उपलब्ध नहीं होंगे, लेकिन वह इस तथ्य को नजरअंदाज कर रही है कि बिहार और तेलंगाना दोनों राज्यों ने छह महीने से भी कम समय में व्यापक जाति सर्वेक्षण पूरा कर लिया है। 

अनुच्छेद 334-ए में यह प्रावधान किया गया है कि जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया के बाद महिलाओं के लिए संसद और विधान सभाओं में आरक्षण प्रभावी होगा। रमेश ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट में कहा, ‘यह स्पष्ट है कि मोदी सरकार जातिगत गणना को ठंडे बस्ते में डालना चाहती है।’ 

कांग्रेस के दावों पर सरकार की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। रमेश ने कहा कि 20 जुलाई, 2021 को सरकार ने लोक सभा में एक प्रश्न का उत्तर देते हुए कहा था कि उसने जनगणना में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के अलावा अन्य जातियों की गणना न करने का नीतिगत निर्णय लिया है। कांग्रेस महासचिव के मुताबिक, 21 सितंबर, 2021 को मोदी सरकार ने उच्चतम न्यायालय में एक हलफनामा दाखिल कर कहा कि उसने जातिगत गणना न कराने का नीतिगत निर्णय लिया है। 

उन्होंने बताया, ‘28 अप्रैल, 2024 को एक टेलीविजन साक्षात्कार में प्रधानमंत्री ने जातिगत गणना के मुद्दे को उठाने के लिए कांग्रेस पर शहरी नक्सली मानसिकता रखने का आरोप लगाया था।’

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First Published - April 12, 2026 | 10:48 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

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