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दिल्ली में कुछ घंटों के लिए ही ऑक्सीजन बची है: केजरीवाल

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Last Updated- December 12, 2022 | 5:41 AM IST

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को केंद्र सरकार से अपील की कि दिल्ली को मेडिकल ऑक्सीजन की आपूर्ति की जाए और कहा कि कुछ अस्पतालों में कुछ घंटे में ऑक्सीजन खत्म होने वाली है। उन्होंने रविवार को कोरोनावायरस मरीजों के लिए ऑक्सीजन की कमी को ‘आपातकाल’ करार दिया था। केजरीवाल ने केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल को पत्र लिखकर इस मामले में हस्तक्षेप करने के लिए कहा। दिल्ली के मुख्यमंत्री ने ट्वीट किया, ‘दिल्ली में ऑक्सीजन का गंभीर संकट बना हुआ है। मैं एक बार फिर केंद्र से आग्रह करता हूं कि दिल्ली को जल्द से जल्द ऑक्सीजन की आपूर्ति की जाए। कुछ अस्पतालों में कुछ घंटे के लिए ही ऑक्सीजन बची हुई है।’ दिल्ली सरकार ने सोमवार को 24 सदस्यीय समिति का गठन किया था ताकि कोविड-19 रोगियों के इलाज के लिए ऑक्सीजन का ‘उचित’ इस्तेमाल सुनिश्चित किया जा सके। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से जारी आदेश के मुताबिक ‘ऑक्सीजन ऑडिट समिति’ इसके उपभोग के बर्बादी वाले क्षेत्रों की पहचान करेगी। इसमें कहा गया कि काफी संख्या में कोविड-19 से गंभीर रूप से पीडि़त रोगियों के अस्पतालों में भर्ती होने से ऑक्सीजन की मांग काफी बढ़ गई है।
औद्योगिक इस्तेमाल में हो कटौती: अदालत
दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि आर्थिक हित मानव जीवन से ज्यादा महत्त्वपूर्ण नहीं हैं। इसके साथ ही अदालत ने कोरोना मरीजों को ऑक्सीजन मुहैया कराने के लिए इस्पात व पेट्रोलियम उत्पादन में कुछ कमी करने का सुझाव दिया है। न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति रेखा पल्ली के पीठ ने कहा कि अगर लॉकडाउन जारी रहा तो सब कुछ ठप हो जाएगा और ऐसी स्थिति में इस्पात, पेट्रोल और डीजल की क्या जरूरत होगी। पीठ ने कहा, ‘लॉकडाउन के दौरान क्या विकास होगा?’ इसके साथ ही अदालत ने केंद्र से सवाल किया कि ऑक्सीजन के औद्योगिक उपयोग पर रोक लगाने के लिए 22 अप्रैल तक का इंतजार क्यों किया जा रहा है। अदालत ने कहा, ‘कमी अभी है। आपको अभी ऐसा करना होगा। इस्पात और पेट्रोलियम उद्योगों से कुछ ऑक्सीजन लेने की ओर देखिए। उनके पास बड़े ‘पॉकेट’ और बड़ी ‘लॉबी’ हैं, लेकिन उन्हें बताएं कि अगर उन्हें उत्पादन में कटौती करनी है तो वे उत्पादन में कटौती कर सकते हैं। जीवन को बचाना होगा।’
पीठ ने केंद्र सरकार के एक वकील के उदाहरण का हवाला दिया, जिनके पिता अस्पताल में ऑक्सीजन पर थे, लेकिन इसकी कमी के मद्देनजर इसे बचाने के लिए कम दबाव में ऑक्सीजन दिया जा रहा था। अदालत ने सवाल किया, ‘क्या आप उन्हें 22 अप्रैल तक रुकने को कह सकते हैं?’ पीठ ने कहा, ‘अगर कुछ नहीं किया गया, तो हम एक बड़े संकट की ओर बढ़ रहे हैं लगभग एक करोड़ लोगों की मौत हो सकती है। क्या हम इसे स्वीकार करने को तैयार हैं।’
पीठ ने उन अस्पतालों में कोविड बेड बढ़ाने का भी सुझाव दिया, जिनके पास अपनी ऑक्सीजन उत्पादन क्षमता है। अदालत ने यह टिप्पणी उस समय की जब केंद्र ने एक हलफनामे में कहा कि फिलहाल दिल्ली में ऑक्सीजन की आपूर्ति में कोई कमी नहीं है और ऑक्सीजन के औद्योगिक इस्तेमाल पर 22 अप्रैल से रोक लगा दी गई है। स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से अदालत को बताया गया कि 20 अप्रैल तक की स्थिति के अनुसार मेडिकल ऑक्सीजन की आवश्यकता में 133 प्रतिशत की असामान्य बढ़ोतरी का अनुमान है। दिल्ली द्वारा बतायी गयी मांग का प्रारंभिक अनुमान 300 टन का था जिसका संशोधित अनुमान बढ़कर 700 टन हो गया। केन्द्र ने उच्च न्यायालय को यह जानकारी भी दी कि उसने दिल्ली सरकार के अस्पतालों को करीब 1,390 वेंटिलेटर मुहैया करवाए हैं।
100 बेड से अधिक क्षमता वाले सभी अस्पतालों में ऑक्सीजन संयंत्र बनाना जरूरी: योगी
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को राज्य में संक्रमण के इलाज के लिए 100 बेड से अधिक क्षमता वाले सभी अस्पतालों में ऑक्सीजन संयंत्र स्थापना को अनिवार्य करने के निर्देश दिये। राज्य सरकार केएक प्रवक्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री ने कोविड-19 प्रबंधन के लिए गठित टीम-11 को दिशानिर्देश देते हुए कहा कि प्रदेश में पांच नए ऑक्सीजन संयंत्र की स्थापना की कार्यवाही प्रारंभ हो गई है जिसे तुरंत सक्रिय किया जाए। उन्होंने कहा कि भविष्य में 100 बेड से अधिक क्षमता वाले सभी अस्पतालों में ऑक्सीजन संयंत्र बनाना अनिवार्य किया जाए। उन्होंने कहा कि एयर सेपरेशन यूनिट जैसी आधुनिक तकनीक को प्रोत्साहित किया जाए और प्रदेश में इसकी क्षमता बढ़ाई जानी चाहिए। उन्होंने ऑक्सीजन की कालाबाजारी पर प्रभावी अंकुश के निर्देश देते हुए कहा कि सभी ऑक्सीजन संयंत्र पर पुलिस सुरक्षा हो।
मरीजों के लिए बेड की संख्या बढ़ेगी
दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने मंगलवार को घोषणा की कि कोविड-19 मरीजों के लिए आगामी कुछ दिन में राष्ट्रीय राजधानी के विभिन्न अस्पतालों एवं उपचार केंद्रों में करीब 2,700 अतिरिक्त बेड की व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने लोगों को आश्वासन दिया कि घबराने की कोई जरूरत नहीं है। कोरोनावायरस संकट गहराने पर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोमवार रात 10 बजे से 26 अप्रैल सुबह 5 बजे तक छह दिनों के लिए लॉकडाउन की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि कोविड-19 के बढ़ते मामलों से निपटने के लिए ऐसा करना जरूरी है क्योंकि शहर की स्वास्थ्य प्रणाली की क्षमता चूक रही है। सिसोदिया ने मंगलवार को एक ऑनलाइन संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘ढाई सप्ताह में यहां बेड की संख्या तिगुनी हो गई है। अगले कुछ दिनों में 2,700 और बेड का प्रबंध किया जाएगा। कोविड-19 के अधिकतर मरीज घर में ही क्वारंटीन में ठीक हो रहे हैं। जिन लोगों को अस्पताल में भर्ती किए जाने की आवश्यकता है, मैं उनसे अपील करता हूं कि वे बेड की उपलब्धता के बारे में ऐप के जरिये पहले पता कर लें और इसके बाद अस्पताल जाएं। 3 अप्रैल को दिल्ली में कोविड-19 बेड 6,071 थे जो 20 अप्रैल को 19,101 तक पहुंच गये।’
केजरीवाल की अपील
दिल्ली में लगाए गए छह दिन के लॉकडाउन के बीच मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को लोगों से अपील की है कि वे इस अवधि में घरों के भीतर ही रहें। उन्होंने कहा कि यह फैसला लोगों की सेहत और सुरक्षा की दृष्टि से लिया गया है। दिल्ली में लॉकडाउन गत सोमवार को रात 10 बजे से शुरू हो गया है और 26 अप्रैल को तड़के 5 बजे तक जारी रहेगा। केजरीवाल ने ट्वीट किया, ‘दिल्ली में आज से लॉकडाउन शुरू हो चुका है। ये फैसला आपके स्वास्थ्य और सुरक्षा के मद्देनजऱ लिया गया है। कृपया इसमें सरकार का सहयोग करें, अपने घर पर ही रहें, संक्रमण से बचकर रहें।’   भाषा

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First Published - April 20, 2021 | 11:16 PM IST

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