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केंद्र मदद नहीं करता तो देखने होंगे टीकाकरण के संसाधन

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Last Updated- December 12, 2022 | 5:33 AM IST

बीएस बातचीत
गैर भाजपा शासित ज्यादातर राज्यों ने केंद्र की तीसरे चरण के टीकाकरण नीति की आलोचना की है। ईशिता आयान दत्त के साथ बातचीत में पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री अमित मित्रा ने कहा कि अंतर मूल्य बेतुका है और इससे राज्यों पर भारी अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। संपादित अंश…
पश्चिम बंगाल जैसे राज्य वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद की तत्काल बैठक की मांग क्यों कर रहे हैं?
जीएसटी परिषद की बैठक न करना संवैधानिक प्रावधानों के खिलाफ है। सितंबर 2016 की पहली बैठक में मंजूर वस्तु एवं सेवा कर के प्रोसीजर ऐंड कंडक्ट आफ बिजनेस रेगुलेशन के पैराग्राफ 6 में कहा गया है कि वित्त वर्ष की हर तिमाही में परिषद की कम से कम एक बैठक होगी।  जीएसटी परिषद की 42वीं बैठक 12 अक्टूबर को हुई थी। उसके बाद कोई बैठक नहीं हुई। यह नियम का उल्लंघन है।

जीएसटी परिषद में उठने वाला सबसे अहम मसला क्या है?
2021-22 में राज्यों के मुआवजे में संभावित गिरावट 1.56 लाख करोड़ रुपये होगी। उपकर के संग्रह और राज्यों को उसे दिए जाने के बाद इतनी कमी रहने का अनुमान है। क्या इतने भारी भरकम अंतर के बाद चर्चा की उम्मीद न की जाए? पश्चिम बंगाल का राजस्व अंतर 13,575 करोड़ रुपये है। जीएसटी परिषद को बैठक कर समाधान निकालने की जरूरत है।

तीसरे चरण का टीका का राज्यों पर कितना बोझ होगा?
चाहे अमेरिका हो या ब्रिटेन या यूरोपीय संघ के 27 देश, दुनिया के किसी भी देश में टीके के अंतर मूल्य (डिफरेंशियल प्राइसिंग) का प्रावधान नहीं है। लेकिन यहां तीन दरें होंगी- केंद्र के लिए, राज्य के लिए और निजी क्षेत्र के लिए। यह अनसुना है।

पश्चिम बंगाल में मुफ्त टीकाकरण होगा। क्या टीकाकरण सरकारी अस्पतालों में किया जाएगा?
ममता बनर्जी 5 मई से 18 साल के उम्र से ज्यादा के सभी लोगों को मुफ्त टीका देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। लेकिन जब हमने इसकी घोषणा की थी तो नियत दर 150 रुपये प्रति खुराक थी। अब मूल्य 400 रुपये प्रति खुराक कर दिया गया है, जिसका राज्य पर भारी बोझ पड़ेगा।
क्या अंतर मूल्य अब केंद्र व राज्य के बीच विवाद का मुख्य विषय है?
अंतर मूल्य बेतुका है।  आप राज्यों के लिए दाम बढ़ाने की अनुमति कैसे दे सकते हैं? इसका बोझ राज्य के खजाने पर पड़ेगा। नोटबंदी की तरह इस मामले में भी राज्यों से कोई चर्चा नहीं की गई।

नवंबर तक पश्चिम बंगाल ने कोविड प्रबंधन पर 4,000 करोड़ रुपये खर्च किए। अब तक कितना बोझ पड़ा है?
परिवर्तनशील प पूंजीगत व्यय की लागतें हैं। तमाम अस्पतालों को दुरुस्त किया गा है। हमने सुरक्षित घरों की स्थापना की है, होटलों को क्वारंटीन केंद्र की तरह इस्तेमाल किए हैं। हमने करोड़ों मास्क, टनों हैंड सैनिटाइजर, लाखों पीपीई किट का उत्पादन व वितरण किया है। सब पर बड़ी लागत आई है और 6,000 करोड़ रुपये से ज्यादा पहले ही खर्च किया जा चुका है।

कई राज्यों ने संकेत दिए हैं कि वे अन्य विभागों का धन टीके  की खरीद में लगाने जा रहे हैं। पश्चिम बंगाल टीकाकरण के वित्तपोषण के लिए क्या करेगा?
अगर केंद्र सरकार मदद करने से इनकार कर देता है तो हम संसाधन तलाशेंगे। लेकिन हम जन केंद्रित और सामाजिक बुनियादी ढांचा योजनाओं में कटौती नहीं करेंगे। राज्य की 94 योजनाएं चल रही हैं, जिनमें 31 बहुत बड़ी हैं। केंद्र सरकार को कदम बढ़ाकर राजकोषीय घाटे का मुद्रीकरण करना चाहिए और राज्यों को कोविड महामारी पर काबू पाने में मदद करनी चाहिए।

अगली सरकार बनाने को लेकर आपको कितना भरोसा है?
मुझे पूरा भरोसा है। 11 राज्यों में अमित शाह की भविष्यवाणी फेल हो चुकी है। उन्हें उनके अनुमान के 30 प्रतिशत से ज्यादा सीटें कभी नहीं मिली हैं। इस तरह से अगर वह 200 सीट कह रहे हैं तो उनका मतलब 60-70 सीटों से है।

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First Published - April 23, 2021 | 11:46 PM IST

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