केरलम में फुटबॉल का जबरदस्त जुनून है। इसलिए, 2024 में जब राज्य की तत्कालीन वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) सरकार के खेल मंत्री वी अब्दुर रहमान ने घोषणा की कि उन्होंने यह कर दिखाया है-लियोनेल मेसी 2026 में राज्य में एक मैत्रीपूर्ण मैच खेलने आएंगे-तो ज्यादातर लोगों को उम्मीद थी कि अब्दुर रहमान 2026 के विधान सभा चुनावों में अपनी सीट (तिरुर) पर भारी बहुमत से जीत हासिल करेंगे। मंत्री और उनके विभाग द्वारा किए गए प्रयासों में स्पेन की यात्रा भी शामिल थी, जो स्वाभाविक रूप से जनता के खर्च पर हुई। यह अपने आप में समझ से परे था क्योंकि मेसी तो अर्जेंटीना के खिलाड़ी हैं।
मेसी भारत तो आए, पर केरलम में कभी नहीं दिखे। अब्दुर रहमान 24,000 से अधिक वोटों के अंतर से अपनी सीट हार गए। मेसी को केरलम में ‘आमंत्रित’ करने पर 200 करोड़ रुपये से अधिक के घपले की बात की जा रही है (राज्य की जांच एजेंसियां अभी भी इसकी गणना कर रही हैं)। कहा जाता है कि इसमें से अधिकांश पैसा विदेश में संदिग्ध कंपनियों में लगाया गया।
केरल मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (केएमएससीएल) के मामलों सहित अन्य घोटालों की जांच विशेष जांच दल (एसआईटी) कर रहे हैं। केएमएससीएल राज्य की प्रसिद्ध चिकित्सा प्रणाली का एक अभिन्न अंग है। मुख्यमंत्री वी डी सतीशन ने अपने 100 दिन के कार्यकाल में पांच एसआईटी गठित करने का आदेश दिया है। यह एक तरह का रिकॉर्ड प्रतीत होता है।
एलडीएफ की लगातार दो सरकारों के बाद सत्ता में आई कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) सरकार एलडीएफ की विश्वसनीयता को कमजोर करने के लिए अपराध और सजा को हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रही है। लेकिन इससे कहीं अधिक गंभीर समस्याएं हैं, जिनमें से कुछ संरचनात्मक हैं, जिनका समाधान करना आवश्यक है।
सतीशन ने इस दिशा में कुछ कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। जून में पेश किए गए अपने संशोधित बजट में सरकार ने राज्य की भूमि नीति की समीक्षा करने, केरलम को समुद्री विकास पर आधारित एक ‘बंदरगाह शहर’ अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित करने और नए निवेश ढांचे के माध्यम से विदेश से भेजे जाने वाले धन पर निर्भरता से मुक्ति पाने की घोषणा की।
महिलाओं के लिए मुफ्त परिवहन, जो पार्टी शासित राज्यों में कांग्रेस का एक प्रमुख कल्याणकारी उपाय बनता जा रहा है, लंबे समय से समानता की मांग कर रही आशा कार्यकर्ताओं के लिए नया पैकेज और वरिष्ठ नागरिकों के लिए नया विभाग कल्याणकारी पैकेज का हिस्सा थे। केरलम में मादक पदार्थों की समस्या के बारे में सभी जानते थे लेकिन कभी बात नहीं करते थे, अब यह सबके सामने आ गई और ऑपरेशन तूफान ने राज्य में सिंथेटिक ड्रग माफिया के व्यापक प्रभाव को उजागर किया।
सरकार के पहले 100 दिन में ही मादक पदार्थ एवं मनोविकार पदार्थ (एनडीपीएस) अधिनियम के तहत चौंका देने वाले 11,700 मामले दर्ज किए गए। ऑपरेशन तूफान पुलिस कार्रवाई, हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारियों, अंतरराज्यीय जांच और राजनीतिक संदेशों का एक अनूठा संगम बन गया है।
गृह मंत्री रमेश चेन्निथला इस अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं, जबकि उन्होंने अस्पष्ट रूप से यह स्वीकार किया है कि उन्होंने ‘कभी नहीं सोचा था कि मादक पदार्थ हमारे राज्य में एक गहरी जड़ जमा चुकी बीमारी है।’
सतीशन को बड़ा फायदा है। निकट भविष्य में राज्य के कोई चुनाव नहीं होने वाले हैं। स्थानीय निकाय चुनाव मई में हुए विधान सभा चुनावों से ठीक पहले हुए थे, इसलिए वे समाप्त हो चुके हैं। कहीं उपचुनाव की भी कोई आवश्यकता नहीं है। चुनावी मोर्चे पर उन्हें कुछ भी साबित करने की जरूरत नहीं है।
मई में हुए विधान सभा चुनावों में मिली करारी हार के बाद एलडीएफ अभी भी अपने घावों से उबरने में लगा है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है, लेकिन जमीनी स्तर पर उसे सीमित समर्थन मिल रहा है। यूडीएफ सरकार ने स्वतंत्रता दिवस समारोह से वंदे मातरम को हटाने का फैसला किया। भाजपा ने घोषणा की कि वह 21 अगस्त को केरलम के सभी 30 जिलों में वंदे मातरम गाएगी।
मामला तब उलझ गया जब कोझिकोड नगर निगम में ध्वजारोहण समारोह में कांग्रेस और वामपंथी पार्षदों ने जन गण मन गाया, वहीं सात भाजपा पार्षदों ने एक साथ वंदे मातरम गाया। राष्ट्रगान गाने वाले पार्षद इसके समाप्त होते ही चले गए। राष्ट्रगीत गाने वाले पार्षदों ने खाली कुर्सियों के सामने अंत तक गाया। यह एक निराशाजनक क्षण था।
केरलम में कांग्रेस कई गुटों का समूह है। सतीशन किसी भी गुट से संबंधित नहीं हैं। यह बात उन्हें सुरक्षा प्रदान करती है, लेकिन साथ ही उन्हें अधिक असुरक्षित भी बनाती है।
अब तक न तो गांधी परिवार के करीबी माने जाने वाले केसी वेणुगोपाल, न ही मुख्यमंत्री बनने के योग्य समझे जाने वाले रमेश चेन्निथला, और न ही राज्य के किसी अन्य कांग्रेस नेता ने कोई कदम उठाया है। इससे सतीशन को कुछ राहत मिली है। राज्य इकाई के नए प्रमुख की नियुक्ति आवश्यक है। यही उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती हो सकती है। अतीत में एक से अधिक मुख्यमंत्री राज्य पार्टी प्रमुख के साथ तालमेल न होने के कारण पद से हटाए जा चुके हैं।
लेकिन पार्टी के लक्ष्यों और वादों से कहीं ज्यादा सतीशन इस बात से अवगत हैं कि उन्हें मुख्यमंत्री पद पर अपनी व्यक्तिगत छाप छोड़नी है। वह पर्यावरण के प्रबल समर्थक के रूप में जाने जाते हैं।
वानिकी हो या खनन, इस क्षेत्र में सार्थक पहल अभी बाकी हैं। उन्होंने अतीत में केरलम की युवा पीढ़ी तक पहुंचने के लिए भी सार्थक प्रयास किए हैं। मुख्यमंत्री के रूप में, उन्हें आर्टिफिशल इंटेजिलेंस के लिए बजट आवंटन जैसे दिखावटी उपायों से आगे बढ़कर काम करना होगा।
फिलहाल सतीशन अपना समय यूडीएफ की विरासत को आगे बढ़ाने में लगा रहे हैं। लेकिन उनके लिए जीवन हमेशा इतना शांत नहीं रह सकता।