वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कुछ और राहत उपायों की घोषणा की। ये उपाय विभिन्न क्षेत्रों को महामारी के कारण मची उथलपुथल से निपटने में मदद के इरादे से घोषित किए गए हैं। सीतारमण ने इस अवसर का लाभ उठाते हुए कई अन्य सरकारी पहल को भी रेखांकित किया। देश के बड़े हिस्से में कोविड के मामले भी कम हो चुके हैं और इस वजह से राज्य सरकारों ने भी लोगों के आवागमन तथा अन्य गतिविधियों पर लगे प्रतिबंध शिथिल किए हैं। इसके परिणामस्वरूप आर्थिक गतिविधियों में सुधार हुआ है लेकिन कारोबारियों के लिए अनिश्चितता बरकरार है। यदि संक्रमण एक बार पुन: बढ़ा तो आर्थिक सुधार की प्रक्रिया बाधित होगी। इस संदर्भ में ताजा घोषणाएं विभिन्न क्षेत्रों और कारोबारों को ऋण की उपलब्धता सुधारने पर केंद्रित हैं।
प्रमुख घोषणाओं की बात करें तो सरकार कोविड से प्रभावित क्षेत्रों को 1.1 लाख करोड़ रुपये की ऋण गारंटी बढ़ाएगी। स्वास्थ्य क्षेत्र में इसका इस्तेमाल आठ बड़े शहरों के बाहर स्वास्थ्य बुनियादी ढांचा विकसित करने में किया जा सकता है। ऐसे ऋण के लिए ब्याज दर को 7.95 फीसदी पर सीमित रखा गया है। कम ब्याज दर के कारण अस्पतालों तथा अन्य सेवा प्रदाताओं को क्षमता बढ़ाने का प्रोत्साहन मिलना चाहिए और माना जा सकता है कि उपरोक्त गारंटी से कर्जदाता भी ऐसे लोगों को कर्ज देने के लिए प्रोत्साहित होंगे। इसके अलावा स्वास्थ्य क्षेत्र में सरकार चालू वित्त वर्ष में शिशुओं की देखभाल पर 23,220 करोड़ रुपये की राशि व्यय करेगी। यह अच्छा कदम है और शिशुओं की समस्याओं के निराकरण के लिए क्षमता बढ़ाने में योगदान करेगा। सरकार ने गत वर्ष घोषित इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी योजना की कुल सीमा में 1.5 लाख करोड़ रुपये का इजाफा किया है। इस योजना के तहत अब तक 2.7 लाख करोड़ रुपये मूल्य का ऋण वितरित किया गया है। इससे छोटे कारोबारियों को अपना काम दोबारा शुरू करने या काम का विस्तार करने के लिए कार्यशील पूंजी जुटाने में मदद मिलेगी। सरकार सूक्ष्म वित्त संस्थानों द्वारा करीब 25 लाख लोगों को प्रदत्त 1.25 लाख रुपये तक के ऋण को गारंटी प्रदान करेगी। यह ऋण कम ब्याज दर पर उपलब्ध होगा और इससे भी छोटे कारोबारियों और उद्यमियों को कारोबारी गतिविधियां दोबारा शुरू करने में सहायता मिलेगी। सरकार पर्यटन से जुड़े लोगों के ऋण को भी गारंटी देगी। पर्यटन कोविड से सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्रों में शामिल है। बहरहाल, यह स्पष्ट नहीं है कि इससे पर्यटन क्षेत्र को कुछ मदद मिलेगी या नहीं। शायद इसमें कुछ वक्त लगे।
व्यापक स्तर पर ऋण और गारंटी में विस्तार तथा कम ब्याज दर से इस कठिन समय में कारोबारों को मदद मिलेगी। परंतु जो लोग मांग में सुधार के लिए बड़े राजकोषीय कदम की आशा में थे वे निराश होंगे। इन घोषणाओं की नीयत अच्छी है लेकिन इनसे कुछ खास बदलता नहीं दिखता। स्पष्ट है कि गत वर्ष की तरह सरकार का ध्यान राहत देने पर है न कि प्रत्यक्ष सरकारी व्यय द्वारा मांग बढ़ाने पर। इस समय यही उचित है क्योंकि महामारी समाप्त नहीं हुई है और ऐसे समय पर राजकोष पर दबाव बढ़ेगा जबकि राजस्व में सुधार की आशा नहीं है। कोविड से संबद्ध राहत के अलावा वित्त मंत्री ने अन्य नीतिगत कदमों मसलन सार्वजनिक-निजी भागीदारी वाली परियोजनाओं और परिसंपत्ति मुद्रीकरण की प्रक्रिया, इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण के लिए उत्पादन संबद्ध प्रोत्साहन योजना, ब्रॉडबैंड के विस्तार और बिजली क्षेत्र के लिए नई योजना का भी जिक्र किया। इनमें से अधिकांश पहल एक निश्चित अवधि में काम करेंगी और उनका कोई तात्कालिक प्रभाव नहीं होगा। ऐसे में टिकाऊ आर्थिक सुधार इस बात पर निर्भर है कि टीकाकरण की गति बढ़ाकर महामारी को कितने निर्णायक ढंग से रोका जा सकता है।