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Editorial: दुरुस्त हो सूर्य घर बिजली योजना

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मॉड्यूल के आकार और उपकरणों की गुणवत्ता में फर्क होने के कारण उपकरण को लगाने यानी इंस्टॉलेशन में समस्या आने लगी और उपभोक्ता उसे लगवाने से इनकार करने लगे।

Last Updated- March 17, 2025 | 10:07 PM IST
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भारत में सौर ऊर्जा के अपेक्षाकृत कम उत्पादन और ताप बिजली पर अधिक निर्भरता देखकर पिछले वर्ष फरवरी में प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का ऐलान किया गया। इसे बड़ी क्रांतिकारी योजना माना गया था। मार्च 2027 तक 1 करोड़ घरों में सौर ऊर्जा आपूर्ति शुरू करने के मकसद वाली इस योजना के तहत रिहायशी घरों को 1 किलोवाट सौर ऊर्जा प्रणाली पर 30,000 रुपये, 2 किलोवाट पर 60,000 रुपये और 3 तथा उससे अधिक किलोवाट वाली प्रणाली पर 78,000 रुपये सब्सिडी दी जाती है। इससे घरों में बिजली का बिल तो घटेगा ही, वे बची हुई बिजली ग्रिड को बेच भी सकते हैं। इस योजना को सफल बनाने के लिए सब कुछ था। इसे जमकर रकम भी मिली: 2024-25 के बजट में 6,250 करोड़ रुपये आवंटित किए गए, जो बढ़ाकर 11,100 करोड़ रुपये कर दिए गए और 2025-26 के बजट में इसके लिए 20,000 करोड़ रुपये तय किए गए। सरकार ने ऑनलाइन पोर्टल बनाकर आवेदन प्रक्रिया को सरल भी बनाया है और बैंक से कर्ज की प्रक्रिया सुगम की है। योजना के तहत मांग भी खूब रही और 47.3 लाख आवेदन आए। मगर साल भर गुजरने के बाद भी योजना का प्रदर्शन कमजोर ही रहा है।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस वर्ष 10 मार्च तक 10 फीसदी लक्ष्य ही हासिल हो पाया है। कुछ रिपोर्ट के अनुसार हर महीने औसतन 70,000 घरों में सौर ऊर्जा प्रणाली लग रही हैं। इस रफ्तार से तो 2026 तक 30 फीसदी लक्ष्य ही पूरा हो पाएगा। देश के विभिन्न इलाकों में रफ्तार भी अलग है, मसलन दो-तिहाई प्रणालियां तो गुजरात और महाराष्ट्र में ही लगी हैं। हालांकि इन दोनों राज्यों में सबसे ज्यादा बिजली खपत होती है मगर योजना सभी राज्यों में समान गति से क्रियान्वित होती तो देश की बड़ी आबादी को इसके फायदे मिल पाते।

उपकरणों में गुणवत्ता और मानकीकरण की कमी इस सुस्ती की बड़ी वजह है मगर उसे आसानी से दूर किया जा सकता है। छत पर सौर ऊर्जा उपकरण (रूफटॉप सोलर सिस्टम) लगाने के बाजार में कम अनुभव वाली नई कंपनियां आ जाएं तो काम खराब होने ही लगता है। मरकॉम इंडिया के एक अनुसंधान में पता लगा कि सौर ऊर्जा का अपना कार्यक्रम छोड़कर सूर्य घर बिजली योजना अपनाने वाले राज्य केरल में नेट मीटरिंग मॉड्यूल जैसी अनिवार्य गुणवत्ता जांच को क्रियान्वयन एजेंसी ने नजरअंदाज कर दिया। मॉड्यूल के आकार और उपकरणों की गुणवत्ता में फर्क होने के कारण उपकरण को लगाने यानी इंस्टॉलेशन में समस्या आने लगी और उपभोक्ता उसे लगवाने से इनकार करने लगे।

नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय रूफटॉप सोलर सिस्टम में इस्तेमाल होने वाले विभिन्न पुर्जों के लिए मानक तय कर इस समस्या को दूर कर सकता है। कुछ सरकारी बिजली वितरण कंपनियों में पुरानी दिक्कतों ने भी योजना में बाधा डाली है। गुजरात की कंपनियों जैसी कुछ वितरण कंपनियां योजना के क्रियान्वयन में बहुत आगे रही हैं मगर दूसरी कंपनियों को डर है कि सौर ऊर्जा को ग्रिड में लेने पर उनकी माली हालत पहले से भी ज्यादा खस्ता हो जाएगी। साथ ही वे सौर ऊर्जा लेने को इसलिए भी तैयार नहीं हैं क्योंकि यह केवल दिन में ही मिल सकती है।

सरकार वैसी ही सक्रियता दिखाए, जैसी उसने स्वच्छ भारत और हर घर नल से जल जैसी योजनाओं के लिए दिखाई थी तो प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का प्रदर्शन और भी चमक सकता है। गर्मियों में तापमान लगातार बढ़ रहा है, इसलिए भारत को ताप बिजली पर अपनी निर्भरता फौरन कम करनी चाहिए। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना वाकई जबरदस्त संभावनाओं वाली योजना है और मामूली बदलावों से हिचककर इसे कमजोर नहीं होने देना चाहिए।

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First Published - March 17, 2025 | 10:05 PM IST

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