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SEBI का मास्टरस्ट्रोक: AIF योजनाओं के लिए फास्ट-ट्रैक व्यवस्था शुरू, अब कम समय में लॉन्च होंगे फंड

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सेबी ने एआईएफ (AIF) स्कीमों के लिए फास्ट-ट्रैक मंजूरी व्यवस्था शुरू की है। अब आवेदन के 30 दिनों के भीतर फंड लॉन्च करने की अनुमति मिल सकेगी

Last Updated- April 30, 2026 | 10:38 PM IST
SEBI
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने ऑल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड (एआईएफ) के निजी नियोजन मेमोरंडम (पीपीएम) की प्रोसेसिंग के लिए फास्ट-ट्रैक व्यवस्था शुरू की है। इसका मकसद समयसीमा को कम करना और पूंजी के तेजी से इस्तेमाल आसान बनाना है।

संशोधित फ्रेमवर्क के तहत एआईएफ (मान्यता प्राप्त निवेशकों के लिए बड़े मूल्य वाले फंड (एलवीएफ) को छोड़कर) को सेबी के पास अपना आवेदन जमा करने के 30 दिन के बाद स्कीम लॉन्च करने और निवेशकों को पीपीएम वितरित करने की अनुमति होगी, जब तक कि उन्हें दूसरा कोई निर्देश न मिले।

पहली बार की स्कीमों के लिए एआईएफ या तो सेबी से पंजीकरण मिलने के बाद या फिर फाइलिंग के 30 दिन पूरे होने के बाद, इनमें से जो भी बाद में हो, अपनी स्कीम लॉन्च कर सकते हैं। इस दौरान नियामक के जो भी सुझाव या टिप्पणिया आएंगी, उन्हें योजना शुरू करने से पहले उसमें शामिल करना होगा।

यह कदम पिछली प्रक्रिया से एक बदलाव दर्शाता है, जिसमें सेबी योजनाओं को आगे बढ़ने की अनुमति देने से पहले पीपीएम खुलासों की समीक्षा करता था और उन पर अपनी टिप्पणियां देता था। इस कारण अक्सर कई बार संशोधन करने से देर होती थी।

नए नियमों के तहत सेबी ने यह भी अनिवार्य किया है कि किसी स्कीम का पहला क्लोज, एआईएफ लॉन्च के लिए पात्र होने की तारीख से 12 महीने के भीतर पूरा हो जाना चाहिए। खुलासे ठीक हैं या नहीं, पूरे हों नहीं, इसकी ज़िम्मेदारी पूरी तरह से मर्चेंट बैंकरों और एआईएफ मैनेजरों की होगी।

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First Published - April 30, 2026 | 10:29 PM IST

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